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Wednesday, July 8, 2026
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भारत की अंतरिक्ष यात्रा में ऐतिहासिक उड़ान: ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला Axiom-4 Mission पर रवाना

Axiom-4 Mission: ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के एक्सिओम-4 मिशन के सफलतापूर्वक उड़ान भरने पर बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी।

Axiom-4 Mission: भारत ने बुधवार को अंतरिक्ष क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जब भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला एक्सिओम-4 (Axiom-4) मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ओर रवाना हुए। नासा के फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A से इस मिशन का सफल प्रक्षेपण किया गया, जिसमें शुभांशु के साथ अमेरिका, हंगरी और पोलैंड के अंतरिक्ष यात्री भी शामिल हैं। यह मिशन न केवल भारत के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष सहयोग की एक जीवंत मिसाल भी है।

Axiom-4 Mission: राष्ट्रपति ने बोलीं, भारत के लिए अंतरिक्ष में एक नया मील का पत्थर स्थापित

इस मिशन की सफलता पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा उत्साह व्यक्त करते हुए ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और उनके दल को शुभकामनाएं दीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि शुभांशु शुक्ला ने भारत के लिए अंतरिक्ष में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ‘पूरा देश सितारों की एक भारतीय की यात्रा पर उत्साहित और गर्वित है। उनके अमेरिका, पोलैंड और हंगरी के साथी अंतरिक्ष यात्री यह सिद्ध करते हैं कि दुनिया वास्तव में एक परिवार है – वसुधैव कुटुम्बकम। यह मिशन नासा और इसरो के बीच स्थायी साझेदारी को भी दर्शाता है।’

नासा ने दी एक्सिओम-4 मिशन की जानकारी

अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक्सिओम मिशन-4 (Axiom Mission-4) की सफल लॉन्चिंग की पुष्टि की है। लॉन्चिंग के बाद नासा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से इस मिशन से जुड़ी अहम जानकारी साझा की। नासा ने अपने पोस्ट में लिखा, हमने एक्सिओम मिशन 4 की उड़ान भरी है। एक्स-4 मिशन 25 जून को सुबह 2:31 बजे (भारतीय समयानुसार दोपहर 12:01 बजे) लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A से रवाना हुआ। इस मिशन में चार निजी अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 14 दिनों के अभियान पर गए हैं।

Axiom-4 Mission: पीएम मोदी ने भी दी शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने संदेश में इस मिशन को भारत की बढ़ती अंतरिक्ष ताकत का प्रतीक बताया। उन्होंने लिखा, ‘भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर जाने वाले पहले भारतीय बनने की राह पर हैं। वह अपने साथ 1.4 बिलियन भारतीयों की इच्छाएं, उम्मीदें और आकांक्षाएं लेकर अंतरिक्ष की ओर गए हैं।

Axiom-4 Mission: वैश्विक सहयोग की मिसाल

एक्सिओम-4 मिशन, निजी अंतरिक्ष कंपनी Axiom Space का एक अंतरराष्ट्रीय मिशन है, जिसमें भारत, अमेरिका, पोलैंड और हंगरी के अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। यह मिशन अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा और निजी कंपनी Axiom Space के सहयोग से संपन्न हुआ है। अंतरिक्ष यात्री स्पेसएक्स (SpaceX) के फाल्कन 9 रॉकेट के ज़रिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की यात्रा पर रवाना हुए हैं।

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का चयन भारत की ओर से अंतरिक्ष मिशन में वैश्विक भागीदारी के लिए एक ठोस कदम माना जा रहा है। इससे भारत को भविष्य में मानवयुक्त मिशनों के संचालन और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी अग्रणी बनने का अवसर मिलेगा।

वैज्ञानिक शोध और साझेदारी का नया अध्याय

इस मिशन के दौरान, अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रहकर कई वैज्ञानिक प्रयोग, जीवविज्ञान, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में मानव व्यवहार, और नई तकनीकों के परीक्षण जैसे विषयों पर काम करेंगे। यह मिशन इसरो और नासा के बीच साइंटिफिक कोलैबोरेशन को भी और मजबूत करेगा। इस ऐतिहासिक मौके पर वैज्ञानिक समुदाय का कहना है कि यह उड़ान न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत के लिए वैश्विक नेतृत्व की दिशा में एक बड़ा कदम भी है।

भारत की अंतरिक्ष यात्रा में नया अध्याय

भारत के लिए यह मिशन विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह देश की पहली भागीदारी है जिसमें कोई भारतीय नागरिक किसी निजी अंतरराष्ट्रीय मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की ओर गया है। इससे पहले राकेश शर्मा 1984 में रूस के सहयोग से अंतरिक्ष में गए थे। शुभांशु शुक्ला का यह मिशन देश के अंतरिक्ष इतिहास में दूसरे मानव मिशन के रूप में दर्ज हो रहा है – लेकिन इस बार वह निजी क्षेत्र, बहुपक्षीय साझेदारी और वैश्विक मंच पर है।

शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा न केवल भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए गौरवशाली है, बल्कि यह आने वाले समय में इसरो की गगनयान जैसी मानव मिशनों को भी नई दिशा देगी। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की शुभकामनाओं के साथ, यह मिशन भारत की विज्ञान नीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध और नवाचार के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

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