22.7 C
New Delhi
Saturday, November 7, 2026
Homeदेशसरहद पार पहुंची मैरी कॉम की प्रेरणा, फातिमा जहरा ने पाकिस्तान को...

सरहद पार पहुंची मैरी कॉम की प्रेरणा, फातिमा जहरा ने पाकिस्तान को दिलाया पहला महिला बॉक्सिंग मेडल

भारत की दिग्गज मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम की प्रेरणा अब सरहदों के पार भी पहुंच चुकी है. पाकिस्तान की पहली महिला राष्ट्रमंडल खेल पदक विजेता मुक्केबाज फातिमा जहरा ने अपनी सफलता का श्रेय छह बार की इस विश्व चैंपियन से मिली प्रेरणा को दिया है. बाइस वर्षीय फातिमा ने महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. वह राष्ट्रमंडल खेलों में मुक्केबाजी में पदक जीतने वाली पाकिस्तान की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा शहर में पली-बढ़ीं फातिमा के पास अपने देश में महिला मुक्केबाजी का कोई बड़ा आदर्श नहीं था. ऐसे में उन्होंने भारत की महान मुक्केबाज मैरी कॉम को अपना प्रेरणास्रोत बनाया.

मैरी कॉम को माना गुरु, पाकिस्तानी बॉक्सर फातिमा ने रचा इतिहास

मैरी कॉम के संघर्षपूर्ण जीवन ने किया प्रभावित

फातिमा ने कहा, ‘मैं भारत की मैरी कॉम से प्रेरित हूं. उन्होंने बताया कि उन्हें केवल मैरी कॉम की उपलब्धियों ने ही नहीं, बल्कि उनके संघर्षपूर्ण जीवन ने भी गहराई से प्रभावित किया. मणिपुर के एक साधारण किसान परिवार में जन्मी मैरी कॉम ने आर्थिक तंगी, सामाजिक विरोध और सीमित संसाधनों जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए विश्व मुक्केबाजी में अपनी अलग पहचान बनाई.

फिल्म को देखकर किया अभ्यास 

फातिमा ने बताया कि वर्ष 2014 में मैरी कॉम के जीवन पर बनी बॉलीवुड फिल्म ने उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डाला. उन्होंने कहा, ‘मैं उनके जीवन पर बनी फिल्म बार-बार देखती थी. जब मैंने मुक्केबाजी शुरू की, तब उसी फिल्म को देखकर अभ्यास करती थी. मैं उनका बहुत सम्मान करती हूं. एक दिन मैं भी उनके जैसी बनना चाहती हूं. उम्मीद है कि भविष्य में उनसे मुलाकात भी होगी.’

परिवार के विरोध का करना पड़ा सामना

मैरी कॉम की तरह फातिमा को भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए परिवार के विरोध का सामना करना पड़ा. उन्होंने कहा, ‘मेरा पारिवारिक आर्थिक आधार बहुत मजबूत नहीं था. मेरे शुरुआती कोच ने मुझे सब कुछ सिखाया. परिवार मुक्केबाजी के खिलाफ था और मुझे अभ्यास के लिए जाने नहीं देता था, लेकिन मैंने हार नहीं मानी और अभ्यास करती रही.’

समय के साथ परिवार का बदला नजरिया

समय के साथ हालांकि परिवार का नजरिया भी बदला जिसके बारे में फातिमा मुस्कुराते हुए कहा, ‘अब मेरे मुकाबलों के दौरान मेरे परिवार को मुझसे भी ज्यादा चिंता रहती है.’ फातिमा को उम्मीद है कि उनका यह ऐतिहासिक पदक पाकिस्तान की दूसरी लड़कियों को भी सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा.

RELATED ARTICLES
New Delhi
clear sky
22.7 ° C
22.7 °
22.7 °
41 %
1.2kmh
0 %
Sat
23 °
Sun
30 °
Mon
31 °
Tue
30 °
Wed
31 °

Most Popular