Success Story: दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी में से अमेरिका की एक्सॉनमोबिल में जॉब करना हर किसी का सपना होता है, मगर भारतीय सेना की खाकी वर्दी के सामने यह ख्वाब भी फीका लगता है. इसकी एक बानगी केरल के कालीकट की रहने वाली अथिरा सुरेश है, जिसने यह साबित कर दिया है कि जब इरादे मजबूत हों, तो देश सेवा का मार्ग ही सबसे बड़ा होता है. आईआईटी-जेईई परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अथिरा ने एनआईटी कालीकट से सिविल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया. इसके बाद उन्होंने दिग्गज ऊर्जा और पेट्रोलियम कंपनियों में से एक एक्सॉनमोबिल में करियर की शुरुआत की.
पिता के नक्शेकदम पर चुनी सैन्य वर्दी
PRO डिफेंस प्रयागराज ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि अथिरा का सपना देश सेवा करने का था. कोर ऑफ सिग्नल में नाइक पद पर कार्यरत अपने पिता सुरेश से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी एक्सॉनमोबिल की नौकरी छोड़कर सेना में जाने का फैसला किया.
पहले प्रयास में पास की SSB परीक्षा
अथिरा ने अपनी इच्छाशक्ति के बल पर पहली ही कोशिश में सेवा चयन बोर्ड की कठिन परीक्षा पास की. इसके बाद उन्होंने ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, गया में कड़ी और चुनौतीपूर्ण सैन्य ट्रेनिंग पूरी की.
ओटीए गया पासिंग आउट परेड
बता दें कि 5 सितंबर 2026 को बिहार के गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में पासिंग आउट परेड हुई. इसके बाद देश को 253 नए सैन्य अफसर मिले हैं. इनमें शॉर्ट सर्विस कमीशन (टेक्निकल एंट्री) पुरुष-65 के 218 और एसएससी (टेक्निकल) महिला-36 की 35 अफसर कैडेट भारतीय सेना का हिस्सा बनीं.
ब्लूप्रिंट से बैटलफील्ड तक का शानदार सफर
ओटीए गया की पासिंग आउट परेड में अथिरा सुरेश को भारतीय सेना में आधिकारिक तौर पर एक अधिकारी के रूप में कमीशन प्रदान किया गया है. अथिरा ने सिविल इंजीनियरिंग के ब्लूप्रिंट बनाने से लेकर देश की रक्षा के लिए सैन्य वर्दी पहनने तक का शानदार सफर तय किया है.
