दिल्ली में लगातार बढ़ते ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए ट्रैफिक पुलिस अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेने जा रही है। इसके तहत सड़कों पर लगे कैमरे और सेंसर वास्तविक समय (रीयल टाइम) में ट्रैफिक के दबाव को भांपकर ट्रैफिक सिग्नलों को ऑटोमैटिक तरीके से नियंत्रित करेंगे। इस व्यवस्था को इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम में शामिल किया जा रहा है। यह तकनीक पहले से ही बेंगलुरु में लागू है, जहां ट्रैफिक दबाव के अनुसार सिग्नल अपने आप समय समायोजित करते हैं, जिससे वाहनों की आवाजाही अधिक सुचारु रहती है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस इस प्रणाली को राजधानी में लागू करने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्ताव को केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। फिलहाल इस परियोजना का बजट प्रस्ताव वित्तीय समिति के पास विचाराधीन है।
वर्तमान में सड़कों पर लगे कैमरे केवल यातायात नियम तोड़ने वालों पर नजर रखने और चालान जारी करने के लिए उपयोग किए जाते हैं, जबकि ट्रैफिक सिग्नल के संचालन में उनकी कोई भूमिका नहीं होती। फिलहाल राजधानी के अधिकांश चौराहों पर पारंपरिक फिक्स्ड टाइमर आधारित सिग्नल सिस्टम काम कर रहा है, जिसमें सिग्नल का समय मैनुअल सेटिंग के आधार पर तय किया जाता है। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, कई स्थानों पर यह प्रणाली जाम का कारण बन रही है, क्योंकि ट्रैफिक घनत्व के अनुसार सिग्नल समय में बदलाव नहीं होता। इस स्थिति में कई बार कुछ चौराहों पर रेड लाइट लंबे समय तक रहती है, जिससे वाहनों की कतार बढ़ जाती है और जाम की समस्या गंभीर हो जाती है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, नई योजना के तहत अब एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम लागू करने की तैयारी है। इस सिस्टम में फिक्स्ड टाइमर की जगह वास्तविक समय (रीयल टाइम) ट्रैफिक घनत्व के आधार पर सिग्नल का समय अपने आप तय होगा।
ऐसे काम करेंगे आधुनिक कैमरे
प्रस्तावित एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम (Adaptive Traffic Control System) के तहत यदि किसी दिशा में सिग्नल का समय एक मिनट निर्धारित है, लेकिन वहां के वाहन 30 सेकेंड में ही निकल जाते हैं, तो सिस्टम स्वतः 31वें सेकेंड पर उस दिशा का सिग्नल लाल कर देगा। इसके बाद यह सिस्टम उन दिशाओं को प्राथमिकता देगा जहां वाहनों की लंबी कतार लगी है और वहां सिग्नल को हरा कर ट्रैफिक को सुचारु करेगा। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का मानना है कि इस तकनीक से जाम की समस्या में करीब 20 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। इस योजना के तहत मौजूदा कैमरों के साथ-साथ नए आधुनिक कैमरे लगाने का भी प्रस्ताव है। इनमें थर्मल कैमरों को शामिल करने की बात कही जा रही है, जो कोहरे और कम दृश्यता की स्थिति में भी ट्रैफिक की निगरानी कर सकेंगे।
तीन चरणों में होगा काम
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, इस सिस्टम को राजधानी के कुल 1092 जंक्शनों पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। फिलहाल योजना के तहत इन सभी चौराहों को स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक बड़ा तकनीकी प्रोजेक्ट है, जिसे तुरंत लागू करना संभव नहीं है। इसलिए इसे चार वर्षों की समयसीमा में तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में प्रमुख और अत्यधिक व्यस्त चौराहों को शामिल किया जाएगा, इसके बाद बाकी क्षेत्रों में विस्तार किया जाएगा।
