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Friday, October 16, 2026
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Lung Cancer Early Signs: 3 हफ्ते से ज्यादा खांसी को न करें नजरअंदाज, ये हो सकता है लंग कैंसर का शुरुआती संकेत

Lung Cancer Early Signs: फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा संकेत जानना क्यों जरूरी है? इसकी वजह काफी गंभीर है. अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार हर साल फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतें प्रोस्टेट, ब्रेस्ट और कोलन कैंसर को मिलाकर होने वाली मौतों से भी ज्यादा होती हैं. यही कारण है कि इसके शुरुआती संकेतों को समझना बेहद जरूरी हो जाता है. चलिए आपको बताते हैं कि इसके लक्षण कब सामने आते हैं और यह कितना खतरनाक होता है.

65 साल की उम्र के बाद मामले

आंकड़ों के मुताबिक, ज्यादातर मरीजों में यह बीमारी 65 साल की उम्र के बाद सामने आती है. इसका सबसे बड़ा जोखिम कारक धूम्रपान है, जो फेफड़ों के कैंसर का खतरा कई गुना तक बढ़ा देता है. हालांकि, सिर्फ स्मोकिंग ही वजह नहीं है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, रेडॉन गैस जो एक प्राकृतिक गैस है भी इस बीमारी का बड़ा कारण बन सकती है.

क्या होते हैं इसके संकेत?

अब सवाल है कि इसका सबसे अहम संकेत क्या है? David Yashar, जो अमेरिका के मेमोरियलकेयर कैंसर इंस्टीट्यूट से जुड़े हैं, उनके अनुसार, लगातार बनी रहने वाली खांसी इसका सबसे सामान्य संकेत हो सकती है. अगर खांसी 2-3 हफ्तों तक ठीक नहीं होती, चाहे दवाइयां ली जा रही हों या घरेलू उपाय किए जा रहे हों, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

हालांकि, एक बड़ी चुनौती यह है कि लंग्स का कैंसर शुरुआती चरण में अक्सर कोई साफ लक्षण नहीं देता. कई बार इसके लक्षण तब तक सामने नहीं आते जब तक बीमारी काफी आगे न बढ़ जाए. यही वजह है कि इसके संकेत अक्सर अन्य सामान्य बीमारियों जैसे लगते हैं और लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते.

कुछ अन्य संकेतों में खून के साथ खांसी आना, अचानक वजन कम होना, सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं. लेकिन चूंकि ये लक्षण दूसरी बीमारियों में भी दिखते हैं, इसलिए भ्रम की स्थिति बन जाती है. अगर आप स्मोकिंग करते हैं या पहले कर चुके हैं, तो इन लक्षणों को लेकर और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। ऐसे किसी भी संकेत को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है.

क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉक्टरों के मुताबिक, अगर शक ज्यादा हो तो चेस्ट एक्स-रे और सीटी स्कैन जैसे टेस्ट किए जाते हैं, जिससे यह पता लगाया जा सके कि फेफड़ों में कोई गांठ या असामान्य बदलाव तो नहीं है. इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर इलाज की दिशा तय की जाती है.

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