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Maoist Surrender: दो इनामी नक्सली समेत 9 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, सभी पर हत्या और लूट के आरोप

Maoist Surrender: वामपंथी उग्रवाद प्रभावित संगठन भाकपा माओवादी की सबसे सशक्त बटालियन पीएलजीए के नौ माओवादियों ने छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण किया है।

Maoist Surrender: वामपंथी उग्रवाद प्रभावित छत्तीसगढ़ में भाकपा माओवादी की सबसे सशक्त बटालियन पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) के नौ माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में दो इनामी नक्सली भी शामिल हैं, जिनमें से एक पर आठ लाख रुपये और दूसरे पर चार लाख रुपये का इनाम था। बीजापुर पुलिस के अनुसार, ये माओवादी राज्य सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण के लिए आगे आए हैं।

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की पहचान

आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में लक्ष्मी माड़वी, पुल्ली ईरपा, भीमे मड़कम, रमेश कारम, सिंगा माड़वी, रामलू भंडारी, देवा मड़कम, रामा पुनेम और हुंगा माड़वी शामिल हैं। ये सभी PLGA के सक्रिय सदस्य रहे हैं और हत्या, लूटपाट, सड़क जाम और पुलिसकर्मियों पर हमले जैसी कई गंभीर वारदातों में शामिल थे।

लक्ष्मी माड़वी: जनवरी 2024 में पामेड़ थाना क्षेत्र के धर्मावरम कैंप पर हुए हमले में शामिल थी।

पुल्ली ईरपा: 2020 में ओडिशा के मलकानगिरि जिले में पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में भाग लिया था।

भीमे मड़कम: 2017 में बुरकापाल में पुलिस पार्टी पर हुए हमले का मास्टरमाइंड, जिसमें 25 पुलिस जवान शहीद हुए थे।

रमेश कारम: मई 2017 में मिरतुर थाना क्षेत्र में पुलिसकर्मियों पर घात लगाकर हमला किया था।

सिंगा माड़वी और रामलू भंडारी: 2022 और 2023 में गादेगुड़ा क्षेत्र में सड़क अवरुद्ध करने और पुल पर बम लगाने जैसी घटनाओं में शामिल थे।

देवा मड़कम, रामा पुनेम और हुंगा माड़वी: विभिन्न माओवादी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा चुके हैं।

पुनर्वास नीति बनी आत्मसमर्पण की वजह

बीजापुर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सहायता जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। सरकार का उद्देश्य नक्सल प्रभावित युवाओं को हिंसा छोड़कर विकास की मुख्यधारा में लाना है। आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को सुरक्षा प्रदान करते हुए पुनर्वास प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

पुलिस अधीक्षक ने कहा, राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। माओवादी संगठन से जुड़े कई लोग हिंसा और शोषण से तंग आकर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं। यह आत्मसमर्पण उसी दिशा में एक बड़ा कदम है।

आत्मसमर्पण का सामाजिक प्रभाव

आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने भी अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि उन्होंने संगठन के बहकावे में आकर हिंसा का रास्ता अपनाया था। अब वे समाज की भलाई के लिए काम करना चाहते हैं। स्थानीय प्रशासन ने भी इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि माओवाद से प्रभावित इलाकों में शांति बहाल करने के लिए यह आत्मसमर्पण एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

बढ़ती आत्मसमर्पण की प्रवृत्ति

बीते कुछ महीनों में छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादियों के आत्मसमर्पण की घटनाओं में तेजी आई है। अधिकारियों के अनुसार, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, सतत विकास कार्यों और पुनर्वास नीति के चलते माओवादियों के मन में मुख्यधारा में लौटने की इच्छा बढ़ी है। सरकार ने आत्मसमर्पण करने वालों को समाज में पुनः स्थापित करने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं, जिनमें स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता, बच्चों की शिक्षा के लिए सुविधाएं और आवास की व्यवस्था शामिल है।

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