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Monday, October 5, 2026
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Chhattisgarh News: अब स्कूलों की होगी रैंकिंग, DPI का बड़ा फैसला… जानिये किन स्तर पर होगी मॉनिटरिंग

रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (मध्याह्न भोजन योजना) को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बड़ा निर्णय लिया है। शासन की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार अब संकुल और विकासखंड स्तर पर स्कूलों की रैंकिंग की जाएगी। यह रैंकिंग विभिन्न मानकों और सूचकांकों के आधार पर तय होगी, ताकि स्कूलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित हो और योजना की गुणवत्ता में सुधार हो सके। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग, मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर की ओर से पत्र जारी किया गया है।

विभाग ने बताया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 17 मार्च 2025 को आयोजित राज्य स्तरीय मॉनिटरिंग समिति की बैठक में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना की गुणवत्ता सुधार को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए थे। इन्हीं निर्देशों के पालन में यह नई व्यवस्था लागू की जा रही है।शासन द्वारा तय किए गए मानकों के अनुसार स्कूलों की रैंकिंग भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता व्यवस्था, छात्रों की उपस्थिति प्रतिशत, शाला पोषण वाटिका की स्थिति, एएमएस पोर्टल में डाटा प्रेषण, न्योता भोजन आयोजन और मध्याह्न भोजन दिवस जैसे बिंदुओं के आधार पर की जाएगी। इन सभी सूचकांकों को मिलाकर स्कूलों का मूल्यांकन होगा।

विभागीय निर्देशों के अनुसार जिन मानकों की जानकारी पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध होगी, उन्हें सीधे पोर्टल से लिया जाएगा। वहीं भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और पोषण वाटिका जैसी व्यवस्थाओं के मूल्यांकन के लिए न्यूनतम तीन सदस्यीय निर्णायक दल गठित किया जाएगा। इस दल में कम से कम एक सक्रिय जनप्रतिनिधि और एक महिला सदस्य को शामिल करना अनिवार्य होगा। निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए यह भी तय किया गया है कि संकुल स्तर की शालाओं की रैंकिंग के लिए संकुल के बाहर तथा विकासखंड स्तर की शालाओं के लिए विकासखंड के बाहर से सदस्यों को निर्णायक दल में शामिल किया जाएगा। दल में शिक्षक, प्रधान पाठक और संकुल समन्वयकों को भी शामिल किया जा सकेगा।

निर्णायक दल सभी सूचकांकों के लिए अंक निर्धारण की नियमावली तैयार करेगा। इसके बाद कुल अंकों के आधार पर स्कूलों की रैंकिंग तय की जाएगी। शासन ने यह भी निर्देश दिया है कि यह प्रक्रिया वर्ष में कम से कम दो बार अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए। योजना के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को जिला और विकासखंड स्तर के कार्यक्रमों में सम्मानित किया जाएगा। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली शालाओं को पुरस्कार देकर अन्य स्कूलों को प्रेरित करने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए एमएमई मद की राशि का उपयोग किया जाएगा।इसके अलावा जो स्कूल रैंकिंग में प्रथम स्थान प्राप्त करेंगे, उन्हें “प्रशिक्षक शाला” के रूप में विकसित किया जाएगा। इन स्कूलों के सफल मॉडल और श्रेष्ठ व्यवस्थाओं को अन्य कमजोर या कम रैंकिंग वाले स्कूलों के साथ साझा किया जाएगा, ताकि पूरी शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुधार हो सके।

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