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Wednesday, September 2, 2026
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Sundar Pichai : बिलियनेयर बनने वाले हैं गूगल CEO सुंदर पिचाई, ल‍िस्‍ट में शाम‍िल होते ही बनेगा र‍िकॉर्ड

Sundar Pichai : अल्फाबेट और गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुंदर पिचाई एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने के करीब हैं। इस उपलब्धि के बाद पिचाई ने दुनिया के उन कुछ चुनिंदा नॉन- फाउंडर टेक एग्जिक्यूटिव में जगह बना ली है।

Sundar Pichai : अल्फाबेट इंक के सीईओ सुंदर पिचाई के नाम एक बड़ी उपलब्‍ध‍ि जुड़ने वाली है। वह क‍िसी भी टेक कंपनी के फाउंडर नहीं होने के बावजूद नेटवर्थ के मामले में नया र‍िकॉर्ड बनाने जा रहे है। बहुतत जल्द उनकी संपत्‍त‍ि 10 अंक में पहुंचने वाली है। 51 साल के पिचाई साल 2015 में गूगल के CEO बने हैं, तब से कंपनी के शेयरों की कीमत 400 प्रतिशत से भी ज्यादा बढ़ गई है। इस दौरान S&P और नैस्‍डैक में भी गूगल का प्रदर्शन जबरदस्‍त रहा है।

दुनिया के सबसे ज्यादा कमाने वाले सीईओ में से एक

एक रिपोर्ट के मुताबिक शेयरों के जबरदस्त उछाल के बाद सुंदर पिचाई दुनिया के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले सीईओ में से एक बना गए है। उनकी संपत्ति लगभग एक अरब डॉलर के करीब पहुंच गई है। हालांकि, गूगल के एक प्रवक्ता ने इन सब खबरों पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

कंपनी के प्रोडक्‍ट में हुआ काफी इजाफा

प‍िचाई के गूगल के CEO की जिम्मेदारी संभालने के बाद कंपनी के प्रोडक्‍ट में जबरदस्त फायदा हुआ। इसमें गूगल असिस्टेंट, गूगल होम, गूगल पिक्सल, गूगल वर्कस्पेस जैसी कई नई चीजों को शाम‍िल क‍िया गया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाने में गूगल सबसे आगे रहे। उन्होंने इसे एक जेनरेशन अपार्च्‍युन‍िटी बताया है।

बचपन में नहीं टीवी और कार

भारतीय मूल के सुंदर पिचाई का मूल नाम सुंदरराजन है। पिचाई का जन्म तमिलनाडु के मदुरै में 1972 में हुआ था, लेकिन वो चेन्नई में पले-बढ़े। उनकी मां लक्ष्मी एक स्टेनोग्राफर और पिता रघुनाथ पिचाई इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह चेन्नई में दो कमरे के अपार्टमेंट में पला बड़ा है। जहां वह और उसका छोटा भाई लिविंग रूम के फर्श पर सोते थे। अपने बचपन के अधिकांश समय में पिचाई के पास टेलीविजन या कार नहीं थी। कभी-कभी उनके घर में पानी भी नहीं होता था।

ऐसे हुए तकनीकी उद्योग की ओर आकर्षित

उन्होंने बताया कि जब वह 12 वर्ष के थे, तब परिवार को पहला रोटरी टेलीफोन मिला। जिसके बारे में उन्होंने कहा कि इससे उन्हें प्रौद्योगिकी की सुविधाओं से परिचित कराया गया। ब्रिटिश समूह जीईसी के लिए एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के रूप में अपने पिता की नौकरी के बारे में जिज्ञासा के साथ-साथ युवा पिचाई को तकनीकी उद्योग की ओर आकर्षित किया।

सुंदर ने 2004 में ज्वाइन किया था गूगल

उन्होंने स्कूल में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, अंततः खड़गपुर में प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में स्थान प्राप्त किया, जहाँ उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। जब उन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में छात्रवृत्ति जीती, तो उनके पिता ने पिचाई के हवाई जहाज के टिकट और अन्य खर्चों को कवर करने के लिए परिवार की बचत से 1,000 डॉलर दिया। अप्रैल 2004 में सुंदर ने गूगल ज्वाइन किया था। गूगल में सुंदर पिचाई पहला प्रोजेक्ट प्रोडक्ट मैनेजमेंट और इनोवेशन शाखा में दिया गया।

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