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Tuesday, November 3, 2026
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GST में बड़ा बदलाव: हेल्थ और क्लीन एनर्जी सेस की तैयारी, महंगी होंगी सिगरेट, कोल्ड ड्रिंक और लक्जरी कारें

GST: सरकार की योजना मौजूदा कंपनसेशन सेस की जगह दो नए सेस- हेल्थ सेस और क्लीन एनर्जी सेस लागू करने की है। इससे जहां तंबाकू उत्पाद, सिगरेट और शुगर वाली कोल्ड ड्रिंक्स जैसी वस्तुएं महंगी होंगी।

GST: देश में लागू वस्तु एवं सेवा कर (GST) प्रणाली में बड़ा बदलाव जल्द देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार की योजना मौजूदा कंपनसेशन सेस की जगह दो नए सेस- हेल्थ सेस और क्लीन एनर्जी सेस लागू करने की है। इससे जहां तंबाकू उत्पाद, सिगरेट और शुगर वाली कोल्ड ड्रिंक्स जैसी वस्तुएं महंगी होंगी, वहीं लक्जरी कार और कोयला जैसे उत्पादों पर भी अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। सरकार का उद्देश्य इन नए सेस के माध्यम से स्वास्थ्य और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को आगे बढ़ाना और राजस्व में बढ़ोतरी करना है।

GST: हेल्थ सेस, सिगरेट और कोल्ड ड्रिंक्स पर बढ़ेगा बोझ

हेल्थ सेस उन वस्तुओं पर लगाया जाएगा जिन्हें समाज के लिए हानिकारक माना जाता है। इसमें तंबाकू, सिगरेट और मीठे शीतल पेय (कोल्ड ड्रिंक्स) शामिल हैं। वर्तमान में ये उत्पाद पहले से ही 28% GST स्लैब में आते हैं और इन पर कंपनसेशन सेस भी लागू होता है।

अब इनके ऊपर अतिरिक्त हेल्थ सेस लगाने की तैयारी की जा रही है ताकि लोगों को इनके इस्तेमाल से दूर रखा जा सके और सरकार को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि हेल्थ सेस से सिगरेट और कोल्ड ड्रिंक की कीमतों में 5-10% तक बढ़ोतरी संभव है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ेगा।

GST: क्लीन एनर्जी सेस, लक्जरी कार और कोयला होंगे महंगे

दूसरा प्रस्तावित सेस क्लीन एनर्जी सेस है, जिसका उद्देश्य लक्जरी कार, SUV जैसी महंगी गाड़ियों और कोयला जैसे प्रदूषणकारी ईंधन पर टैक्स बढ़ाकर हरित ऊर्जा की दिशा में कदम बढ़ाना है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हरित भारत नीति को समर्थन देने के रूप में देखा जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इससे इलेक्ट्रिक वाहनों और कम प्रदूषण वाली तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा, वहीं प्रदूषण फैलाने वाले उत्पाद महंगे होने से उपभोक्ताओं का रुझान स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ेगा।

GST स्लैब में भी बदलाव की तैयारी

सिर्फ सेस ही नहीं, सरकार 12% GST स्लैब को खत्म करने पर भी विचार कर रही है। इससे कुछ उत्पाद 5% के स्लैब में आ सकते हैं, जबकि कुछ को 18% के उच्च स्लैब में शामिल किया जाएगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, टूथपेस्ट और डेली यूज प्रोडक्ट्स जैसे कुछ वस्तुएं सस्ते टैक्स ब्रैकेट में आ सकती हैं, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। हालांकि, स्लैब बदलाव से शुरुआत में केंद्र सरकार पर 50,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, लेकिन सरकार को उम्मीद है कि कीमतें कम होने से खपत बढ़ेगी और टैक्स कलेक्शन में सुधार होगा।

GST कलेक्शन में बढ़ोतरी, खजाना भरने की तैयारी

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून 2025 में GST कलेक्शन में 6.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह 1.85 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1.74 लाख करोड़ रुपये था। हालांकि, अप्रैल 2025 में GST कलेक्शन 2.37 लाख करोड़ और मई में 2.01 लाख करोड़ रुपये रहा था। जून में कमी की मुख्य वजह कंपनियों की ओर से टैक्स भुगतान में देरी और कुछ तकनीकी बदलाव बताए जा रहे हैं।

क्यों जरूरी है यह बदलाव?

GST परिषद में कंपनसेशन सेस का संग्रह राज्यों को राजस्व घाटे की भरपाई के लिए किया जाता था, जिसकी अवधि समाप्त होने की ओर है। अब सरकार इस सेस को हेल्थ और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में लक्षित कर राजस्व का उपयोग प्रभावी ढंग से करना चाहती है। वहीं, सेस बढ़ने से जहां सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा, वहीं स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी लक्ष्यों की दिशा में भी कदम बढ़ेंगे।

क्या होगा असर?

अगर यह प्रस्ताव लागू हुआ:

  • सिगरेट, कोल्ड ड्रिंक, लक्जरी कार, और कोयला महंगे होंगे।
  • इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और स्वच्छ ऊर्जा के विकल्पों को मिलेगा बढ़ावा।
  • कुछ रोजमर्रा की वस्तुओं पर टैक्स घटने से कीमतों में राहत मिलेगी।
  • सरकार के खजाने में राजस्व बढ़ेगा और उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव आएगा।

GST काउंसिल की अगली बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो यह देश की कर व्यवस्था और उपभोक्ता बाजार में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा।

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