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Friday, October 16, 2026
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बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे: जेसोर में राणा प्रताप बैरागी की गोली मारकर हत्या

Bangladesh: बांग्लादेश में हिंदू आबादी करीब 8-10 प्रतिशत है, लेकिन हाल की राजनीतिक उथल-पुथल के बाद से अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं।

Bangladesh: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। सोमवार शाम को जेसोर जिले के मणिरामपुर उपजिला में एक और दिल दहला देने वाली घटना हुई, जहां 45 वर्षीय हिंदू युवक राणा प्रताप बैरागी की सार्वजनिक बाजार में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना हाल के तीन हफ्तों में हिंदुओं पर हुए हमलों की पांचवीं बड़ी घटना है, जिसने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    Bangladesh: कोपालिया बाजार में दिनदहाड़े फायरिंग

    घटना मणिरामपुर के वार्ड नंबर 17 स्थित कोपालिया बाजार में शाम करीब 5:45 बजे हुई। राणा प्रताप बैरागी, जो केशबपुर उपजिला के अरुआ गांव के रहने वाले थे और तुषार कांति बैरागी के पुत्र थे, बाजार में मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक अज्ञात हमलावरों ने उन पर गोलियां चलाईं। गोलियां लगते ही राणा प्रताप मौके पर ही ढेर हो गए।

    घटना के बाद पूरे बाजार में अफरा-तफरी मच गई। लोग डर के मारे इधर-उधर भागने लगे। सूचना मिलते ही मणिरामपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने घटनास्थल को सील कर दिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मणिरामपुर थाने के प्रभारी अधिकारी राजिउल्लाह खान ने कहा, “हम जांच कर रहे हैं। हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए प्रयास जारी हैं।” अभी तक किसी संगठन या व्यक्ति ने इस हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली है, और मोटिव स्पष्ट नहीं है।

    Bangladesh: हालिया हमलों की श्रृंखला, तीन हफ्तों में पांचवीं घटना

    राणा प्रताप बैरागी की हत्या बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर बढ़ते हमलों की कड़ी में एक और कड़वा सच है। दिसंबर 2025 से अब तक कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं:

    • सबसे पहले मयमनसिंह जिले में दीपू चंद्र दास नाम के एक हिंदू गारमेंट कर्मचारी की भीड़ ने ईशनिंदा के आरोप में पीट-पीटकर हत्या कर दी और शव को जला दिया।
    • इसके बाद अमृत मंडल नाम के एक अन्य हिंदू युवक की क्रिसमस ईव पर राजबाड़ी जिले में हत्या हुई, जिसे अधिकारियों ने जबरन वसूली से जोड़ा।
    • मयमनसिंह में ही बजेंद्र बिस्वास को गोली मारी गई।
    • खोकन दास नाम के एक हिंदू कारोबारी पर भीड़ का हमला हुआ, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल होने के बाद मारे गए।

    ये घटनाएं बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के नेतृत्व में मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली व्यवस्था में अल्पसंख्यक सुरक्षा की कमी को उजागर कर रही हैं। राजनीतिक अस्थिरता और कट्टरपंथी तत्वों के सक्रिय होने के कारण हिंदू समुदाय डर के साए में जी रहा है।

    Bangladesh: इलाके में तनाव और समुदाय की चिंता

    कोपालिया बाजार और आसपास के इलाकों में घटना के बाद भारी तनाव है। स्थानीय हिंदू परिवारों में डर का माहौल है। कई लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं। हिंदू संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

    बांग्लादेश में हिंदू आबादी करीब 8-10 प्रतिशत है, लेकिन हाल की राजनीतिक उथल-पुथल के बाद से अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हिंसा स्थानीय आपराधिक तत्वों, पुरानी दुश्मनी या साम्प्रदायिक तनाव से जुड़ी हो सकती है, लेकिन व्यापक पैमाने पर यह अल्पसंख्यक असुरक्षा का प्रतीक बन गई है।

    अंतरराष्ट्रीय और भारतीय प्रतिक्रियाएं

    भारतीय मीडिया और संगठनों में इस घटना ने व्यापक चर्चा छेड़ दी है। विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों ने पहले की घटनाओं पर प्रदर्शन किए थे, और अब इस नई हत्या पर भी गुस्सा व्यक्त किया जा रहा है। भारत सरकार ने पहले की घटनाओं पर चिंता जताई थी और अपराधियों को सजा देने की मांग की थी। हालांकि इस विशिष्ट घटना पर अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।’

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