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Wednesday, August 26, 2026
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IMD का पूर्वानुमान: सामान्य से अधिक बारिश की भविष्यवाणी, बाढ़-भूस्खलन का खतरा

Weather Update: भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अपनी मासिक रिपोर्ट जारी की, जिसमें सितंबर 2025 में सामान्य से अधिक बारिश की भविष्यवाणी की गई है।

Weather Update: भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अपनी मासिक वर्षा और तापमान आउटलुक रिपोर्ट जारी की, जिसमें सितंबर 2025 में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश की भविष्यवाणी की गई है। यह पूर्वानुमान ऐसे समय में आया है, जब देश के कई हिस्सों में बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएं पहले से ही कहर बरपा रही हैं।

Weather Update: सामान्य से अधिक बारिश की संभावना

आईएमडी की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में देश में औसत मासिक बारिश लंबी अवधि के औसत (एलपीए) 167.9 मिमी के 109 प्रतिशत से अधिक होने की संभावना है। यह आंकड़ा 1971-2020 के डेटा पर आधारित है। भौगोलिक दृष्टिकोण से, देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश की उम्मीद है। हालांकि, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों, दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत और सबसे उत्तरी भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है।

Weather Update: कृषि के लिए वरदान, लेकिन जोखिम भी

सामान्य से अधिक बारिश कृषि और जल संसाधनों के लिए लाभकारी हो सकती है। यह खरीफ फसलों की पैदावार बढ़ाने और जलाशयों के जल स्तर को सुधारने में मदद कर सकती है। हालांकि, इसके साथ बाढ़, भूस्खलन, सड़क परिवहन में व्यवधान, सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियां और पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान जैसे जोखिम भी जुड़े हैं। हाल के महीनों में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में भूस्खलन और बाढ़ से हुए नुकसान ने इन जोखिमों को और स्पष्ट किया है।

Weather Update: जोखिम प्रबंधन के लिए जरूरी कदम

इन जोखिमों से निपटने के लिए विशेषज्ञ बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, आईएमडी की पूर्व चेतावनियों का प्रभावी उपयोग, निगरानी और संरक्षण प्रयासों को बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों में मजबूत आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली स्थापित करने की सलाह दे रहे हैं। स्थानीय प्रशासन को नदियों के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ प्रबंधन योजनाओं को लागू करने और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने की आवश्यकता है।

मल्टी-मॉडल एनसेंबल पद्धति पर आधारित पूर्वानुमान

आईएमडी 2021 से दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए मासिक और मौसमी पूर्वानुमान जारी कर रहा है। यह पूर्वानुमान मल्टी-मॉडल एनसेंबल (एमएमई) पद्धति पर आधारित है, जिसमें विश्व के विभिन्न जलवायु पूर्वानुमान और शोध केंद्रों के कपल्ड ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल्स (सीजीसीएम) शामिल हैं। इसमें आईएमडी का मॉनसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्टिंग सिस्टम (एमएमसीएफएस) भी एक प्रमुख मॉडल है। इस पद्धति ने हाल के वर्षों में मौसम पूर्वानुमान की सटीकता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मानसून 2025 के लिए पूर्वानुमान का समय-क्रम

आईएमडी ने 15 अप्रैल को 2025 के दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) के लिए पहला चरण का पूर्वानुमान जारी किया था, जिसे 27 मई को अपडेट किया गया। इसके बाद, जून के लिए वर्षा पूर्वानुमान 27 मई को और जुलाई के लिए 30 जून को जारी किया गया। अगस्त-सितंबर के लिए मौसमी वर्षा का पूर्वानुमान और अगस्त 2025 के लिए मासिक वर्षा व तापमान का दृष्टिकोण 31 जुलाई को जारी हुआ था।

तापमान का पूर्वानुमान

सितंबर के लिए तापमान के पूर्वानुमान में आईएमडी ने कहा है कि पश्चिम-मध्य, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में मासिक औसत अधिकतम तापमान सामान्य से कम रहने की संभावना है। वहीं, पूर्व-मध्य, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में यह सामान्य से अधिक हो सकता है। यह तापमान भिन्नता फसलों और मानव स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है।

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