राजधानी दिल्ली में लंबे समय से लंबित पड़े लाखों ट्रैफिक चालानों (Traffic challan) के निपटारे की प्रक्रिया आसान बनाने की तैयारी है। दिल्ली सरकार सभी 39 SDM और परिवहन विभाग के कुछ अधिकारियों को चालान जमा करने की शक्ति देने पर विचार कर रही है। इसके लिए परिवहन विभाग ने एक प्रस्ताव तैयार कर दिल्ली सरकार (Delhi Government) को भेज दिया है। प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद लंबित चालानों के निपटारे के लिए अधिक अधिकारियों को अधिकृत किया जा सकेगा। फिलहाल चालान से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए लोगों को सीमित अधिकारियों और निर्धारित प्रक्रियाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में बड़ी संख्या में लंबित चालानों के कारण लोगों को परेशानी होती है। नए प्रस्ताव के लागू होने पर 39 SDM और परिवहन विभाग के अधिकृत अधिकारी चालान जमा करने की प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। इससे लंबित चालानों के निपटारे की प्रक्रिया तेज होने और लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
चालान जमा होते ही ट्रैफिक पुलिस को मिलेगी जानकारी
फिलहाल चालान का भुगतान मुख्य रूप से ऑनलाइन या लोक अदालतों के माध्यम से किया जाता है। हालांकि, इन माध्यमों से एक सीमित संख्या में ही मामलों का निपटारा हो पाता है। नए प्रस्ताव के तहत लोग अपने क्षेत्र के SDM कार्यालय में जाकर चालान जमा कर सकेंगे। इसके लिए एक विशेष पोर्टल तैयार किया जाएगा, जिसे ट्रैफिक पुलिस के पोर्टल से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत SDM कार्यालय में चालान जमा होते ही इसकी जानकारी स्वचालित रूप से ट्रैफिक पुलिस के पोर्टल पर अपडेट हो जाएगी। इसके बाद संबंधित चालान को पोर्टल से हटा दिया जाएगा, जिससे रिकॉर्ड भी अपडेट होता रहेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को अपने क्षेत्र में ही लंबित चालान निपटाने की सुविधा देना है। अधिकारियों का मानना है कि इससे चालान के निपटारे की प्रक्रिया तेज और आसान होगी। साथ ही लंबित चालानों के अधिक मामलों के निपटारे से सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
लोक अदालत में भी लोगों को होती है परेशानी
वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, कैबिनेट से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए संबंधित संशोधन को छह महीने के भीतर विधानसभा से पास कराना होगा। इसके बाद ही नई व्यवस्था को जमीन पर उतारने का रास्ता साफ होगा। अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में आयोजित होने वाली लोक अदालतों के जरिए चालान का निपटारा करना भी आम लोगों के लिए आसान नहीं है। इसके लिए पहले ऑनलाइन समय लेना पड़ता है, जिसके लिए सीमित स्लॉट होने के कारण लोगों में काफी मारामारी रहती है। इसके अलावा, बड़ी संख्या में लोग चालान का निपटारा कराने के लिए अधिवक्ताओं की मदद लेते हैं, जिसके लिए उन्हें अलग से फीस का भुगतान करना पड़ता है।
दिल्ली में लंबित ट्रैफिक चालानों के निपटारे को आसान बनाने के लिए पहले से ही स्पेशल वीकेंड ट्रैफिक कोर्ट (WTC) की व्यवस्था शुरू की गई है। दिल्ली जिला अदालतों ने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के समन्वय से 5 जुलाई से शहर में इन विशेष अदालतों की शुरुआत की थी। इस पहल का उद्देश्य लोगों को लंबित समझौता योग्य (कंपाउंडेबल) ट्रैफिक नोटिस और चालानों का निपटारा कराने की सुविधा देना है। इसके तहत नागरिक वर्चुअल कोर्ट के माध्यम से भी अपने लंबित मामलों का निपटारा करा सकते हैं।
हर महीने दूसरे शनिवार और रविवार को सुनवाई
स्पेशल वीकेंड ट्रैफिक कोर्ट हर महीने के दूसरे शनिवार और सभी रविवार को संचालित की जाती हैं। अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली के 11 जिला अदालत परिसरों में कुल 22 ट्रैफिक कोर्ट बेंच स्थापित करने की योजना है। प्रत्येक बेंच एक बैठक में करीब 700 कंपाउंडेबल नोटिस या चालानों पर सुनवाई करेगी। इससे बड़ी संख्या में लंबित मामलों को तेजी से निपटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
6 प्रमुख अदालत परिसरों में व्यवस्था
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, स्पेशल ट्रैफिक कोर्ट तीस हजारी, पटियाला हाउस, साकेत, द्वारका, रोहिणी और कड़कड़डूमा समेत प्रमुख जिला अदालत परिसरों में संचालित की जा रही हैं। अदालतें दो सत्रों में काम करती हैं। पहला सत्र सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक और दूसरा सत्र दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक रखा गया है।
