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Sunday, October 4, 2026
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UCC के बाद बदलेंगे कई नियम, राजस्थान में लिव-इन कपल्स के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी

राजस्थान में अब जल्द ही व्यक्तिगत कानूनों की व्यवस्था हमेशा के लिए बदलने वाली है। राज्य की भजनलाल सरकार प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मंत्रिपरिषद की ओर से लिए गए फैसले के बाद अब ‘राजस्थान समान नागरिक संहिता 2026’ विधेयक को विधानसभा में लाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस नए कानून के लागू होते ही प्रदेश में सालों से चले आ रहे हिंदू कोड और मुस्लिम पर्सनल लॉ जैसे धार्मिक कानून खत्म हो जाएंगे। शादी, तलाक से लेकर संपत्ति के अधिकार तक, हर धर्म के नागरिक के लिए सिर्फ एक ही कानून होगा।

प्रस्तावित यूसीसी कानून में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव युवाओं की लाइफस्टाइल को लेकर होने जा रहा है। नए नियमों के मुताबिक, राजस्थान में अब कोई भी जोड़ा बिना रजिस्ट्रेशन के लिव-इन रिलेशनशिप में नहीं रह सकेगा। अगर कोई लिव-इन में रहना चाहता है, तो उसे सरकारी रिकॉर्ड में इसका पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। यह कदम सुरक्षा और सामाजिक पारदर्शिता को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है।

बहुविवाह पर पूरी तरह रोक, बेटी-बेटे को बराबर हक

राजस्थान यूसीसी के लागू होने के बाद प्रदेश में कई बड़े सामाजिक बदलाव देखने को मिलेंगे-

एक से ज्यादा शादी पर रोक: किसी भी धर्म या समुदाय का व्यक्ति अब एक से ज्यादा विवाह नहीं कर सकेगा।

शादी-तलाक का अनिवार्य पंजीकरण: हर शादी और तलाक का सरकारी तौर पर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।

संपत्ति में समान अधिकार: पैतृक संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में बेटे और बेटी को बिल्कुल एक समान अधिकार मिलेगा।

गोद और भरण-पोषण: बच्चा गोद लेने और तलाक के बाद गुजारा भत्ता देने के नियम भी सभी मजहबों के लिए एक जैसे होंगे।

जनजातियों को दायरे से बाहर रखा, रिटायर जज देसाई संभालेंगी कमान

राजस्थान की एक बड़ी आबादी जनजातीय क्षेत्रों में रहती है, जिनकी अपनी अनूठी परंपराएं हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आदिवासियों की संस्कृति को अक्षुण्ण रखने के लिए जनजातियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।

इस कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति में सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह, अतिरिक्त महाधिवक्ता बसंत सिंह छाबा, सेवानिवृत्त प्राचार्य रामस्वरूप अग्रवाल और डॉ. शुचि चौहान को सदस्य बनाया गया है, जबकि गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव इसके सदस्य सचिव होंगे।

संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना और राजस्थान

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य को देश के सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश देता है। राजस्थान सरकार इसी संवैधानिक भावना के तहत यह कदम उठा रही है। आपको बता दें कि देश में उत्तराखंड और गुजरात पहले ही इसे लागू कर चुके हैं, जबकि असम में राष्ट्रपति की मुहर लगना बाकी है। अब राजस्थान भी इस कतार में शामिल होकर इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ा है।

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