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Monday, October 12, 2026
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मुख्यमंत्री जन आवास योजना में बड़े बदलाव की तैयारी, जानिए क्या होंगे नए नियम

Jan Awas Yojana: राजस्थान में मुख्यमंत्री जन आवास योजना में बड़े बदलाव की तैयारी है। बिल्डरों और जरूरतमंदों की मांग पर अब 2 BHK फ्लैट, दरों में बढ़ोतरी और नई शर्तों पर विचार किया जा रहा है।

Jan Awas Yojana: राजस्थान में मुख्यमंत्री जन आवास योजना में जल्द बड़े बदलाव हो सकते हैं। दरअसल, सस्ते आवास आबादी से दूर बनाए जाने के कारण न तो लोग वहां बस रहे हैं और न ही बिल्डर अब नए प्रोजेक्ट लाने को तैयार हैं। कई जगहों पर तैयार फ्लैट बिके ही नहीं, और जहां बिक भी गए, वहां लोग रह नहीं रहे। ऐसे में सरकार अब योजना में ऐसे प्रावधान जोड़ने जा रही है जिससे जरूरतमंदों और बिल्डरों दोनों का हित सुरक्षित हो सके।

Jan Awas Yojana: बिल्डरों की मांगों पर सरकार का मंथन

इस मुद्दे पर बुधवार को नगर नियोजन कार्यालय में नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव देबाशीष पृष्टी की मौजूदगी में क्रेडाई और टाउनशिप डवलपर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (टोडार) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। इसमें बिल्डरों ने योजना की कई शर्तों को अव्यावहारिक बताते हुए निर्माण कार्य में रुचि नहीं लेने और यह काम आवासन मंडल या अन्य सरकारी एजेंसी को देने तक की बात कह दी।

Jan Awas Yojana दर बढ़ाने और लचीलापन लाने की मांग

  1. निर्माण लागत दर बढ़ाने की जरूरत:
    फिलहाल 2248 रुपये प्रति वर्गफीट की दर तय है, जबकि बिल्डर इसे 3500 रुपये करने और इसमें हर साल 5% बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।
  2. 2 BHK फ्लैट की अनुमति:
    फिलहाल EWS के लिए 1 BHK फ्लैट बनाने की बाध्यता है, जबकि अब हर जरूरतमंद भी 2 BHK फ्लैट लेना चाहता है। बिल्डरों ने फ्लैट साइज तय करने का अधिकार विकासकर्ता को देने की मांग रखी है।
  3. निर्माण समय सीमा में लचीलापन:
    प्रोजेक्ट तय समय में पूरा नहीं होने पर पेनल्टी इतनी अधिक है कि प्रोजेक्ट अटक जाते हैं। बिल्डर चाहते हैं कि पेनल्टी व्यावहारिक हो ताकि प्रोजेक्ट समय पर पूरे किए जा सकें।
  4. छोटे एरिया में अनुमति मिले:
    ड्राफ्ट में बड़े शहरों में न्यूनतम 2 हेक्टेयर और छोटे शहरों में 1 हेक्टेयर की शर्त है, जबकि बिल्डरों ने इसे क्रमशः 1 हेक्टेयर और 0.5 हेक्टेयर करने की मांग की है।
  5. महाराष्ट्र की तर्ज पर आय सीमा तय हो:
    महाराष्ट्र में EWS के लिए 6 लाख, LIG के लिए 9 लाख और MIG के लिए 12 लाख की आय सीमा तय है। राजस्थान में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।
  6. बैंक लोन न मिलने की समस्या:
    बिल्डरों ने कहा कि बैंकों द्वारा EWS श्रेणी के लिए लोन नहीं दिया जाता, जिससे इन आवासों की बिक्री नहीं हो पा रही है।

Jan Awas Yojana: ड्राफ्ट में प्रस्ताव और बिल्डरों की आपत्ति

प्रस्ताव: EWS और LIG आवास ऐसी जगह बनाए जाएं, जहां 500 मीटर के दायरे में बिजली, पानी, परिवहन, स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं हों।

आपत्ति: बेचान दर कम और जमीन महंगी होने से शहर के कोर एरिया में आवास बनाना संभव नहीं है।

प्रस्ताव: यदि बिल्डर मुख्य प्रोजेक्ट में भूखंड नहीं दे सकता तो उसे निकायों की योजनाओं में जरूरतमंदों के लिए भूखंड खरीदकर देने होंगे।

आपत्ति: निकायों की योजनाएं भी आबादी से दूर हैं। वहां लोग बसते नहीं, इसलिए बिल्डर निर्माण कराने को तैयार नहीं हैं। आवासन मंडल की योजनाओं को इसमें समाहित किया जाए।

क्यों जरूरी हैं ये बदलाव?

राज्य में सस्ते आवासों की मांग तो है, लेकिन लोकेशन, सुविधाओं और वित्तीय संरचना में लचीलापन नहीं होने से यह योजना सफल नहीं हो पा रही। यदि बिल्डरों की मांगें मानी जाती हैं तो इससे न केवल जरूरतमंदों को सस्ती दर पर फ्लैट मिल सकेंगे, बल्कि बिल्डर भी नए प्रोजेक्ट लाने के लिए प्रोत्साहित होंगे। राज्य सरकार इस योजना को अधिक व्यावहारिक और आकर्षक बनाने के लिए बदलाव की तैयारी कर रही है ताकि मुख्यमंत्री जन आवास योजना को नया जीवन मिल सके और शहरों में जरूरतमंदों के लिए किफायती आवास उपलब्ध हो सकें।

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