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Tuesday, July 14, 2026
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राजस्थान में 2 महीने में डिलीवरी के बाद 18 महिलाओं की मौत, स्वास्थ्य मंत्री ने दिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों से एक बेहद ही चिंताजनक खबर सामने आई है। राज्य में मई महीने से अब तक प्रसव के बाद कम से कम 18 महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि सिजेरियन ऑपरेशन के बाद किडनी फेल होने के कारण 7 अन्य महिलाएं अभी भी डायलिसिस पर हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय और विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। यह मामला तब और ज्यादा गरमा गया जब 5 से 10 जुलाई के बीच भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में ही 9 महिलाओं की जान चली गई।

कहां और कैसे हुईं मौतें?

  1. भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में छह दिनों के भीतर 5 महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी के बाद मौत हो गई। रिकॉर्ड के अनुसार, सर्जरी के बाद इन महिलाओं की तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
  2. कोटा में मई महीने में एक सरकारी अस्पताल में 5 प्रसूताओं की मौत की खबर आई थी।
  3. बीकानेर में जून महीने में सिजेरियन सेक्शन के बाद 6 महिलाओं की किडनी फेल हो गई थी, जिनमें से 2 की बाद में मौत हो गई। बाकी 7 महिलाएं अभी भी डायलिसिस पर जिंदगी की जंग लड़ रही हैं।

कारण समझ से परे, हम भी हैरान हैं- स्वास्थ्य मंत्री

बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि मौतों का यह पैटर्न अधिकारियों के लिए भी हैरान करने वाला है। उन्होंने कहा, “हमारे लिए यह बहुत आश्चर्यजनक है कि ये मौतें इतने कम अंतराल पर और एक साथ हो रही हैं कि इसका सटीक कारण समझ नहीं आ रहा है। शुरुआत में हमें लगा कि शायद अत्यधिक गर्मी की वजह से ऐसा हो रहा है, लेकिन अब तो गर्मी का मौसम भी निकल चुका है। ब्लड रिपोर्ट्स और बाकी सभी जांचें सामान्य आ रही हैं, फिर भी मौतें हो रही हैं। हमें इसके पीछे की असली वजह का पता लगाना होगा।”

मंत्री ने बताया कि प्रभावित जिलों (कोटा, जोधपुर, बीकानेर) के वरिष्ठ अधिकारियों, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल्स और अधीक्षकों को बैठक के लिए बुलाया गया है। सरकार ने AIIMS दिल्ली की टीम से भी समीक्षा कराई है और राज्य के शीर्ष स्त्री रोग विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। उन्होंने साफ किया कि डॉक्टरों या अधिकारियों पर कार्रवाई तभी होगी, जब लापरवाही या मेडिकल चूक की पुष्टि होगी।

जांच के दायरे में अस्पताल

स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित अस्पतालों के मेडिकल रिकॉर्ड, इलाज के तौर-तरीकों, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम और इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं के ऑडिट के आदेश दिए हैं। जयपुर से विशेषज्ञों की एक विशेष टीम भी समीक्षा के लिए बनाई गई है।

इस बीच, भीलवाड़ा अस्पताल में संसाधनों की भारी कमी की बात सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल में रोजाना 30 से 40 सिजेरियन ऑपरेशन होते हैं, लेकिन सर्जरी के लिए केवल 8 इंस्ट्रूमेंट सेट ही उपलब्ध हैं (5 नियमित और 3 इमरजेंसी के लिए)। नियमों के मुताबिक, हर सेट को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले कम से कम 3 घंटे तक स्टेरलाइज (संक्रमण मुक्त) करना जरूरी होता है। ऐसे में भारी वर्कलोड के कारण इंफेक्शन फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

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