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बिहार चुनाव से पहले नीतीश को तगड़ा झटका, लक्ष्मेश्वर राय ने छोड़ी JDU, थामा तेजस्वी का हाथ

Bihar Elections: JDU को करारा झटका देते हुए पूर्व मंत्री लक्ष्मेश्वर राय ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और सीधे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में शामिल हो गए।

Bihar Elections: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की रणभूमि में एक और बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) को करारा झटका देते हुए पूर्व मंत्री लक्ष्मेश्वर राय ने गुरुवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और सीधे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में शामिल हो गए। मधुबनी जिले के लौकहा विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक राय ने पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का हाथ थाम लिया, जिसे RJD के लिए बड़ा राजनीतिक लाभ माना जा रहा है। यह घटना JDU की आंतरिक कलह को उजागर करती है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी को कमजोर करने का काम कर रही है। चुनावी माहौल में नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले यह कदम NDA गठबंधन के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है, जबकि महागठबंधन को मजबूती मिल रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राय का पाला बदलना मधुबनी क्षेत्र के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।

Bihar Elections: लक्ष्मेश्वर राय का राजनीतिक सफर: पूर्व मंत्री से विधायक तक

लक्ष्मेश्वर राय बिहार की राजनीति के एक प्रमुख चेहरे रहे हैं। वे मधुबनी जिले की लौकहा विधानसभा सीट से पूर्व विधायक हैं और नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री के पद पर भी रह चुके हैं। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्हें RJD प्रत्याशी भारत भूषण मंडल ने मात्र 1,007 वोटों के मामूली अंतर से हरा दिया था। उस समय लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान के कारण वोट कटने को उनकी हार का मुख्य कारण माना गया था। JDU में रहते हुए राय ने पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन हाल के दिनों में वे असंतुष्ट नजर आ रहे थे। राय का RJD में शामिल होना उनके लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक संघर्ष का नया अध्याय है, जहां वे अब विपक्षी खेमे में नीतीश सरकार की कमियों को उजागर करने का माध्यम बन सकते हैं।

Bihar Elections: संजय झा की ‘मनमानी’ से तंग आकर कदम

गुरुवार को पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लक्ष्मेश्वर राय ने अपना इस्तीफा पत्र मीडिया को सौंपा। उन्होंने JDU कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा की ‘मनमानी’ को इस्तीफे का मुख्य कारण बताया। राय ने कहा कि पार्टी में अब नीतीश कुमार का कोई प्रभाव नहीं बचा है। संजय झा सब कुछ चला रहे हैं, मुख्यमंत्री को किनारे कर दिया गया है, और कार्यकर्ताओं की कोई सुनवाई नहीं होती। इससे पहले, हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान राय ने संकेत दिए थे कि यदि उन्हें लौकहा से टिकट नहीं मिला, तो वे RJD का रुख करेंगे। अंततः ऐसा ही हुआ। राय ने कहा, मैंने JDU में वर्षों सेवा की, लेकिन अब यह पार्टी बदल चुकी है। नीतीश जी को दरकिनार कर लिया गया है। यह इस्तीफा JDU के लिए सिर्फ एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि संगठन की कमजोर होती पकड़ का संकेत है।

Bihar Elections: RJD में शामिल: तेजस्वी यादव का स्वागत

इस्तीफे के तुरंत बाद लक्ष्मेश्वर राय ने RJD मुख्यालय पहुंचकर पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से मुलाकात की और पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। तेजस्वी ने राय का स्वागत किया, हालांकि उनका कोई प्रत्यक्ष बयान अभी तक सामने नहीं आया है। RJD सूत्रों के अनुसार, यह शामिल होना पार्टी के लिए मधुबनी क्षेत्र में मजबूत आधार प्रदान करेगा। राय ने कहा, तेजस्वी यादव के नेतृत्व में RJD बिहार की सच्ची आवाज है। यहां कार्यकर्ताओं का सम्मान होता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन JDU के अंदरूनी हलकों में हड़कंप मच गया है। संजय झा पर लगे आरोपों ने पार्टी में असंतोष को और बढ़ा दिया है।

Bihar Elections: मधुबनी समीकरण बदलेंगे, NDA को नुकसान

यह घटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए JDU को बड़ा झटका साबित हो रही है। लौकहा सीट पर नीतीश कुमार ने पिछले दो महीनों में दो बार दौरा किया था, जो इस क्षेत्र को उनकी प्राथमिकता दर्शाता है। राय के RJD में जाने से यहां के वोट बैंक पर असर पड़ेगा, खासकर यादव और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं पर। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 2020 की हार का बदला राय अब RJD के टिकट पर ले सकते हैं। NDA गठबंधन के लिए यह पूर्व मंत्री का पलायन पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़ा करता है, जबकि महागठबंधन को अप्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। बिहार की 243 सीटों पर NDA के पास वर्तमान में 129 विधायक हैं, लेकिन ऐसे उलटफेर से समीकरण बिगड़ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि JDU में और असंतुष्ट नेता बाहर आ सकते हैं।

Bihar Elections: JDU की आंतरिक कलह: कार्यकर्ताओं में असंतोष

JDU में संजय झा की भूमिका को लेकर लंबे समय से आलोचना हो रही है। राय के इस्तीफे ने इसे और उजागर कर दिया। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि टिकट वितरण और संगठनात्मक फैसलों में पारदर्शिता की कमी है। नीतीश कुमार का ‘किनारे’ होना पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच नाराजगी पैदा कर रहा है। RJD ने इस मौके का फायदा उठाते हुए राय को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है, जो चुनावी प्रचार में उनकी भूमिका बढ़ाएगी।

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