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व्यापम घोटाले में इंदौर CBI कोर्ट का बड़ा फैसला: 12 डमी उम्मीदवारों को 5 साल की सजा

Vyapam Scam: यह मामला 24 जुलाई 2011 को उस समय सामने आया जब इंदौर के एक परीक्षा केंद्र में सत्येंद्र वर्मा को आशीष यादव उर्फ आशीष सिंह बनकर परीक्षा देते रंगे हाथों पकड़ा गया।

Vyapam Scam: मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापम घोटाले से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में इंदौर की विशेष CBI अदालत ने शनिवार को सख्त फैसला सुनाया। अदालत ने 2011 की प्री-मेडिकल टेस्ट (PMT) परीक्षा में दूसरे के स्थान पर परीक्षा देने वाले 12 डमी उम्मीदवारों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 5 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, हर दोषी पर 6,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। यह फैसला 14 साल पुराने मामले में न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

Vyapam Scam: मामले की शुरुआत और पकड़

यह मामला 24 जुलाई 2011 को उस समय सामने आया जब इंदौर के एक परीक्षा केंद्र में सत्येंद्र वर्मा को आशीष यादव उर्फ आशीष सिंह बनकर परीक्षा देते रंगे हाथों पकड़ा गया। इंदौर के सशक्त उत्कृष्ट विद्यालय के उप प्रधानाध्यापक ने व्यापम द्वारा आयोजित PMT-2011 परीक्षा के दौरान फर्जीवाड़े की शिकायत की थी। इसके बाद तुकोगंज पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। शुरुआत में राज्य पुलिस ने जांच की और दो आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया।

Vyapam Scam: CBI जांच और खुलासे

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामले की जांच CBI को सौंपी गई। CBI की गहन जांच में पता चला कि फर्जी उम्मीदवारों को बिचौलियों के एक संगठित नेटवर्क के जरिए नियुक्त किया गया था। आरोपियों ने असली परीक्षार्थियों से मिलीभगत कर पहचान बदलकर और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके परीक्षा केंद्रों में प्रवेश लिया। फर्जी उम्मीदवारों को इंदौर लाया गया, होटल में ठहराया गया और वे फर्जी प्रवेश पत्रों से परीक्षा देते पाए गए।

जांच में होटल रिकॉर्ड, दस्तावेजी सबूत और गवाहों के बयानों से उम्मीदवारों, डमी कैंडिडेट्स और बिचौलियों की साजिश की पुष्टि हुई। CBI ने दर्जनों गवाहों के बयान दर्ज किए और ठोस सबूत अदालत में पेश किए।

Vyapam Scam: दोषी ठहराए गए आरोपी

अदालत ने निम्नलिखित 12 आरोपियों को दोषी ठहराया:

  • आशीष यादव उर्फ आशीष सिंह
  • सत्येंद्र वर्मा
  • धीरेंद्र तिवारी
  • बृजेश जायसवाल
  • दुर्गा प्रसाद यादव
  • राकेश कुर्मी
  • नरेंद्र चौरसिया
  • अभिलाष यादव
  • खूब चंद राजपूत
  • पवन राजपूत
  • लखन धनगर
  • सुंदरलाल धनगर

इन सभी को IPC की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सजा सुनाई गई। अपराध के समय नाबालिग दीपक गौतम के मामले में किशोर न्याय बोर्ड ने पहले ही कार्रवाई कर दी थी।

व्यापम घोटाले का व्यापक प्रभाव

व्यापम घोटाला भारत के सबसे बड़े परीक्षा और भर्ती घोटालों में से एक है, जिसमें अधिकारियों, राजनेताओं और बिचौलियों का नेटवर्क शामिल था। इसमें मेडिकल, इंजीनियरिंग और सरकारी नौकरियों की प्रवेश परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हेराफेरी हुई। घोटाले के खुलासे के बाद कई मौतें भी हुईं, जिसने इसे और विवादास्पद बना दिया। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से सभी मामलों की जांच CBI को सौंपी गई।

यह फैसला व्यापम से जुड़े कई मामलों में सजा का सिलसिला जारी रखता है। हाल ही में पटवारी भर्ती जैसे अन्य मामलों में भी दोषियों को सजा सुनाई गई है। CBI का कहना है कि यह सजा परीक्षा प्रणाली से खिलवाड़ करने वालों के लिए कड़ा संदेश है।

न्याय की लंबी प्रक्रिया

यह मामला 14 साल तक चला, जिसमें लंबी सुनवाई और सबूतों की जांच शामिल रही। विशेष न्यायाधीश शुभ्रा सिंह की अदालत ने सभी पक्ष सुनने के बाद दोषियों को सजा सुनाई। फैसले के बाद सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया। कोर्ट परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

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