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Friday, August 7, 2026
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लाड़ली बहनों को मंत्री की सख्त चेतावनी – कार्यक्रम में अनुपस्थित रहने पर नाम कट सकते हैं

Ladli Bahna Controversy: सीहोर के धामंदा में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का विवादित बयान, 894 लाभार्थियों में कम उपस्थिति पर नाराजगी, योजना के लाभ को उपस्थिति से जोड़ने पर उठे सवाल।

Ladli Bahna Controversy: मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार सकारात्मक कारणों से नहीं। सीहोर जिले के धामंदा गांव में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने लाड़ली बहना योजना की लाभार्थी महिलाओं को खुली चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं सरकारी कार्यक्रमों में शामिल नहीं होंगी, तो उनके नाम योजना की सूची से काट दिए जाएंगे। इस बयान से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बवाल मच गया है।

Ladli Bahna Controversy: कार्यक्रम का उद्देश्य और मंत्री की नाराजगी

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्राम नापलाखेड़ी में 56.09 लाख रुपये की लागत से बने नए उप-स्वास्थ्य केंद्र और ग्राम धामंदा में 65 लाख रुपये की लागत से निर्मित आयुष्मान आरोग्य मंदिर का लोकार्पण था। मंत्री ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की सरकारी पहल की सराहना की और कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज की सुविधा बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना का जिक्र करते हुए गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज की बात कही और लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच, स्वच्छता तथा संतुलित आहार अपनाने की अपील की।

Ladli Bahna Controversy: 894 लाड़ली बहनों को हर महीने 1500 रुपये

लेकिन कार्यक्रम के दौरान मंत्री की नजर धामंदा गांव में लाड़ली बहना योजना की लाभार्थियों की कम उपस्थिति पर गई। उन्होंने बताया कि यहां 894 लाड़ली बहनों को हर महीने 1500 रुपये दिए जा रहे हैं, लेकिन सरकारी आयोजनों में उनकी मौजूदगी न के बराबर है। नाराजगी जताते हुए मंत्री ने मंच से कहा, ‘एक दिन सभी बहनों को बुलाया जाएगा। जो नहीं आएंगी, उनके नाम कटवाने की रिपोर्ट भेज दी जाएगी।’ उन्होंने आगे कहा कि वे सीईओ से बात करके सभी लाभार्थियों को बुलवाएंगे और यदि फिर भी उपस्थिति नहीं हुई तो रिपोर्ट बनवाकर नाम कटवाने की कार्रवाई करेंगे।

Ladli Bahna Controversy: योजना की पृष्ठभूमि और विवाद का मुद्दा

मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार की प्रमुख महिला कल्याण योजनाओं में से एक है। शुरू में इसमें 1000 रुपये मासिक दिए जाते थे, जिसे बाद में बढ़ाकर 1250 और अब 1500 रुपये कर दिया गया है। योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। पात्रता में मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी, विवाहित/विधवा/तलाकशुदा/परित्यक्ता महिलाएं शामिल हैं, जिनकी उम्र 21 से 60 वर्ष के बीच हो और परिवार में कोई आयकर दाता न हो।
मंत्री के बयान ने सवाल खड़े किए हैं कि क्या योजना के लाभ को सरकारी कार्यक्रमों में उपस्थिति से जोड़ा जा सकता है? योजना सामाजिक कल्याण से जुड़ी है, न कि किसी राजनीतिक या प्रशासनिक इवेंट की उपस्थिति से। कई लोग इसे महिलाओं पर अनुचित दबाव मान रहे हैं। विपक्षी दलों ने भी इस बयान की आलोचना की है, इसे बीजेपी की महिला विरोधी मानसिकता का उदाहरण बताया जा रहा है।

Ladli Bahna Controversy: पहले भी ऐसे बयान, राजनीतिक गूंज

यह पहला मौका नहीं है जब लाड़ली बहना योजना को लेकर ऐसे विवादित बयान आए हैं। इससे पहले भी कुछ मंत्रियों ने समान तरह की टिप्पणियां की थीं। मंत्री वर्मा ने कांग्रेस सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि पहले महिलाओं को ऐसा पैसा नहीं मिलता था, अब केंद्र और राज्य सरकारें किसानों-महिलाओं के खाते में पैसे डाल रही हैं, लेकिन लोग ध्यान नहीं दे रहे। उन्होंने प्रधानमंत्री के गेहूं भेजने और खातों में पैसे ट्रांसफर करने का भी जिक्र किया।

कार्यक्रम में कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा, सीएमएचओ सुधीर कुमार डेहरिया सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद थे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं, लेकिन मंत्री का यह बयान पूरे आयोजन पर भारी पड़ता दिख रहा है।

Ladli Bahna Controversy: क्या यह चेतावनी लागू होगी?

अभी तक कोई आधिकारिक आदेश या नीति नहीं आई है कि कार्यक्रम में अनुपस्थिति से योजना का लाभ रुकेगा। ऐसे बयान अक्सर स्थानीय स्तर पर दबाव बनाने के लिए दिए जाते हैं, लेकिन योजना के नियम अलग हैं। लाड़ली बहना योजना से नाम कटने के मामले पहले भी तकनीकी गड़बड़ियों, उम्र सीमा या अपात्रता के कारण होते रहे हैं।

यह घटना मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की योजनाओं को लेकर उठने वाले सवालों को फिर से उजागर करती है। क्या लाभार्थियों से सरकारी कार्यक्रमों में मजबूरी उपस्थिति मांगी जा सकती है? या यह उनकी स्वतंत्रता पर अतिक्रमण है? समय बताएगा कि मंत्री की इस चेतावनी का क्या असर होता है।

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