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दिल्ली में लापता लोगों का संकट: 36 दिनों में 2,884 गुम, सिर्फ 17% मिले, पुलिस पर लापरवाही के आरोप

Delhi Person Missing: हाल के आंकड़े चौंकाने वाले हैं—बीते 36 दिनों में कुल 2,884 लोग लापता हो चुके हैं। इनमें से महज 409 लोग ही अब तक मिल पाए हैं, यानी कुल मामलों का मात्र 17 प्रतिशत।

Delhi Person Missing: देश की राजधानी दिल्ली, जो कभी सुरक्षा और व्यवस्था का प्रतीक मानी जाती थी, आज लापता लोगों की एक बड़ी समस्या से जूझ रही है। हाल के आंकड़े चौंकाने वाले हैं—बीते 36 दिनों में कुल 2,884 लोग लापता हो चुके हैं। इनमें से महज 409 लोग ही अब तक मिल पाए हैं, यानी कुल मामलों का मात्र 17 प्रतिशत। बाकी 83 प्रतिशत लोगों का कोई सुराग नहीं मिला है। यह आंकड़ा न केवल परिवारों के दर्द को दर्शाता है, बल्कि दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

Delhi Person Missing: हर घंटे 3, हर दिन 82 लोग गायब

आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में औसतन हर दिन 82 लोग लापता हो रहे हैं, जबकि हर घंटे करीब 3 लोग गुम हो जाते हैं। यह कोई साधारण संख्या नहीं है—यह हजारों परिवारों की टूटी उम्मीदों, बेचैनी और निराशा की कहानी है। इन लापता लोगों में 616 बच्चे और 1,372 महिलाएं शामिल हैं, जो शहर में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठाए जा रहे बड़े-बड़े दावों पर पानी फेरते नजर आते हैं।

Delhi Person Missing: एक मां की गुहार: मेरा बेटा वापस कर दो

एक दिल दहला देने वाली मिसाल है 17 वर्षीय ऋतिक झा की। 17 दिसंबर को कोचिंग से लौटते समय ऋतिक घर से लापता हो गया। उसका लैपटॉप घर पर छूट गया था, मां की डांट के बाद वह बाहर निकला और फिर कभी नहीं लौटा। परिवार ने उसी दिन FIR दर्ज कराई, लेकिन पुलिस की ओर से कोई गंभीर कार्रवाई नहीं हुई। ऋतिक की मां बेबी झा रो-रोकर कहती हैं, “मैं मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और यहां तक कि अगर किसी ने मेरे बेटे को अगवा किया है तो उससे भी हाथ जोड़कर अपील कर रही हूं—मेरा बेटा वापस कर दो।”

परिवार का आरोप है कि पुलिस ने न तो CCTV फुटेज समय पर चेक की, न ही कोई ठोस जांच की। मजबूरन ऋतिक के पिता सुदिष्ट झा और चाचा संतोष झा खुद ‘डिटेक्टिव’ बन गए। उन्होंने दर-दर भटककर फुटेज जुटाई, जिसमें पता चला कि ऋतिक सफेद स्वेटर पहने घर से निकला, ई-रिक्शा लिया और मजलिस पार्क मेट्रो स्टेशन पहुंचा। जब यह सबूत पुलिस को दिए गए, तो उन्हें मेट्रो मुख्यालय भेज दिया गया। वहां भी तरह-तरह के बहाने—कभी फुटेज डिलीट होने की बात, कभी संदिग्ध व्यवहार। परिवार का कहना है कि अगर पुलिस शुरू से सक्रिय होती, तो शायद आज ऋतिक का सुराग मिल चुका होता।

Delhi Person Missing: इनाम तक घोषित, फिर भी कोई सुराग नहीं

ऋतिक अकेला नहीं है। न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के तैमूर नगर से 16 वर्षीय सुराका पिछले एक महीने से लापता है। उसके पिता अब्दुस सलाम ने भी FIR दर्ज कराई और खुद CCTV फुटेज निकालकर पुलिस को सौंपी। फुटेज में सुराका हरा गमछा और काली जैकेट में दिख रहा है, लेकिन पुलिस अब तक कुछ नहीं कर पाई। हताश परिवार ने सुराका की जानकारी देने वाले के लिए 11 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया है।

Delhi Person Missing: पुलिस की सुस्ती, परिवारों की मजबूरी

इन सभी मामलों में एक बात साझा है—परिवार खुद जांच में जुटे हैं, जबकि पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है। आंकड़े बताते हैं कि 36 दिनों में सिर्फ 17 फीसदी लोगों को ही ट्रेस किया जा सका। बाकी 83 फीसदी के लिए कोई ठोस प्रगति नहीं। परिवारों को न केवल अपनों की तलाश है, बल्कि सिस्टम की बेरुखी से भी जूझना पड़ रहा है।

Delhi Person Missing: दिल्ली सुरक्षित है या ‘लापतागंज’?

दिल्ली में बढ़ती लापता होने की घटनाएं और पुलिस की धीमी गति एक बड़े संकट की ओर इशारा करती है। पिछले साल 2025 में भी हजारों मामले दर्ज हुए थे, लेकिन कई अनसुलझे रह गए। अब 2026 की शुरुआत ही इतनी चिंताजनक आंकड़ों के साथ हुई है। सवाल यह है कि क्या राजधानी वाकई सुरक्षित है, या यह धीरे-धीरे ‘लापतागंज’ बनती जा रही है?

परिवारों की गुहार और बढ़ते आंकड़े दिल्ली पुलिस और प्रशासन के लिए एक चेतावनी हैं। तत्काल कार्रवाई, बेहतर जांच प्रक्रिया और संवेदनशीलता की जरूरत है, वरना यह संकट और गहराता जाएगा।

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