37.1 C
New Delhi
Friday, April 24, 2026
Homeदेशअब गली-मोहल्लों में क्लीनिक खोलना आसान नहीं, DGHS ने तय किए सख्त...

अब गली-मोहल्लों में क्लीनिक खोलना आसान नहीं, DGHS ने तय किए सख्त मानक

नई दिल्ली : अब गली‑मोहल्लों में छोटे स्तर पर क्लीनिक चलाना पहले जैसा आसान नहीं होगा. केंद्रीय स्वास्थ्य महानिदेशालय (DGHS) ने क्लीनिक संचालन से जुड़े नियमों में अहम संशोधन करते हुए न्यूनतम जगह, स्टाफ और उपकरणों के मानक तय कर दिए हैं. इसके लिए क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत ड्राफ्ट नियम जारी किए गए हैं, जिनके लागू होने के बाद देशभर में क्लीनिकों को तय मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा. नए नियमों के मुताबिक, किसी भी क्लीनिक में डॉक्टर का कंसल्टेशन रूम अब 70 वर्ग फुट से कम नहीं हो सकता. इसके अलावा मरीजों के लिए कम से कम 35 वर्ग फुट का वेटिंग एरिया होना जरूरी होगा. क्लीनिक में ब्लड प्रेशर मशीन, थर्मामीटर, वजन मापने की मशीन, ऑक्सीजन सिलेंडर या ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और जरूरी इमरजेंसी उपकरण रखना अनिवार्य किया गया है. हर क्लीनिक में कम से कम एक पंजीकृत डॉक्टर और एक प्रशिक्षित स्टाफ सदस्य की मौजूदगी भी जरूरी होगी.

इन राज्यों में पहले लागू होंगे नियम

संशोधित नियमों के मसौदे के अनुसार, जिन राज्यों में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट पहले से लागू है, वहां इन नए मानकों के अनुसार जल्द ही आदेश जारी किए जाएंगे. फिलहाल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश सहित देश के 19 राज्यों में यह एक्ट लागू है. ऐसे में इन राज्यों के क्लीनिकों पर सबसे पहले नए नियमों का असर देखने को मिल सकता है.

शवगृह और अन्य सेवाओं के लिए भी तय मानक

DGHS ने केवल क्लीनिक ही नहीं, बल्कि औषधालय, निगरानी एवं अल्पकालिक प्रवास सुविधा, नैदानिक स्वास्थ्य सेवाएं और सैंपल कलेक्शन सेंटर के लिए भी न्यूनतम मानक तय किए हैं. इसके अलावा शवगृह के लिए भी पहली बार विस्तृत दिशा‑निर्देश बनाए गए हैं. नए नियमों के तहत शवगृह में हर शव को एक यूनिक कोड देना अनिवार्य होगा और तापमान 4 से 6 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना होगा.

मरीजों का रिकॉर्ड रखना होगा अनिवार्य

संशोधित नियमों के अनुसार अब हर क्लीनिक को मरीजों को रजिस्ट्रेशन नंबर देना होगा और इलाज, जांच व दी गई दवाओं का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखना पड़ेगा. बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट के कोई भी क्लीनिक दवाएं नहीं बेच सकेगा. दवा वितरण का पूरा लेखा‑जोखा रखना अनिवार्य होगा. पारदर्शिता बढ़ाने के लिए क्लीनिक के बाहर स्पष्ट रूप से बोर्ड लगाना होगा, जिसमें डॉक्टर की डिग्री, पंजीकरण और फीस का विवरण डिस्प्ले करना जरूरी होगा.

8 घंटे तक शॉर्ट स्टे की अनुमति

नए नियमों में क्लीनिकों को ऑब्जर्वेशन और शॉर्ट स्टे की सुविधा भी दी गई है. इसके तहत मरीज को अधिकतम 8 घंटे तक क्लीनिक में रखा जा सकेगा. इसके साथ ही जांच के लिए सैंपल लेने, उन्हें सुरक्षित तरीके से प्रयोगशाला तक पहुंचाने और ट्रांसपोर्ट से जुड़े मानक भी तय कर दिए गए हैं. इसके लिए प्रशिक्षित स्टाफ की मौजूदगी अनिवार्य होगी.

छोटे क्लीनिकों पर पड़ेगा असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि अगर इन मानकों का सख्ती से पालन कराया गया, तो 50 से 60 फीसदी छोटे क्लीनिकों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है. कई छोटे क्लीनिक या तो बंद होने के कगार पर आ सकते हैं या फिर उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश करना पड़ेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में जहां छोटे क्लीनिक ही प्राथमिक इलाज का साधन हैं, वहां मरीजों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं. बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च उठाना छोटे डॉक्टरों के लिए आसान नहीं होगा, जिसका असर अंततः मरीजों की जेब पर भी पड़ सकता है.

RELATED ARTICLES
New Delhi
clear sky
37.1 ° C
37.1 °
37.1 °
22 %
3.6kmh
1 %
Fri
42 °
Sat
44 °
Sun
45 °
Mon
45 °
Tue
43 °

Most Popular