नई दिल्ली : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं के पुनर्मूल्यांकन के परिणाम का इंतजार कर रहे विद्यार्थियों को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने बड़ी राहत दी है। डीयू ने स्पष्ट किया है कि जिन विद्यार्थियों के संशोधित परिणाम अभी जारी नहीं हुए हैं, वे फिलहाल अपने पुराने अंकों के आधार पर स्नातक प्रवेश के लिए आवेदन कर दें। परिणाम घोषित होने के बाद उन्हें अपने अंक संशोधित करने का अवसर दिया जाएगा।
संशोधित परिणाम अभी तक घोषित नहीं
डीयू ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी बीच बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी हैं, जिन्होंने अपने अंकों के सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था और उनके संशोधित परिणाम अभी तक घोषित नहीं हुए हैं। इसे देखते हुए डीयू ने विद्यार्थियों की चिंता दूर करने के लिए यह व्यवस्था की है। डीयू के अधिकारियों के मुताबिक, जिन विद्यार्थियों के पुनर्मूल्यांकन के परिणाम अभी नहीं आए हैं, वे सामान्य रूप से अपने पहले घोषित अंक दर्ज कर आवेदन करें। संशोधित परिणाम जारी होने के बाद वे प्रवेश पोर्टल पर अपने अंक बदल सकेंगे।
प्रवेश का आधार मुख्य रूप से सीयूईटी के अंक
अधिकारियों ने कहा कि विद्यार्थियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आवेदन पोर्टल कई सप्ताह तक खुला रहेगा और परिणाम आने के बाद भी अंक संशोधित करने की सुविधा उपलब्ध रहेगी। डीयू में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश का आधार मुख्य रूप से सीयूईटी के अंक हैं। 12वीं के अंक केवल यह सुनिश्चित करने के लिए देखे जाते हैं कि अभ्यर्थी ने परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है। यदि दो अभ्यर्थियों के प्रवेश परीक्षा में समान अंक होते हैं, तभी 12वीं के अंकों का उपयोग निर्णय लेने के लिए किया जाता है। सीबीएसई के मुताबिक, इस वर्ष 12वीं के करीब 1.68 लाख विद्यार्थियों ने अंक सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था। इनमें से करीब 1.47 लाख विद्यार्थियों के संशोधित परिणाम जारी किए जा चुके हैं। शेष लगभग 20 हजार विद्यार्थियों के परिणाम अगले कुछ दिनों में घोषित होने की संभावना है।
डीयू ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में विश्वविद्यालय के 67 महाविद्यालयों में संचालित 73 स्नातक पाठ्यक्रमों के 100 से अधिक विषय संयोजनों में प्रवेश केवल सीयूईटी के अंकों के आधार पर होगा। प्रवेश प्रक्रिया के दूसरे चरण में अभ्यर्थियों को 12वीं में पढ़े गए विषयों का प्रवेश परीक्षा के विषयों से मिलान करना होगा और इसके बाद महाविद्यालयों व पाठ्यक्रमों की प्राथमिकताएं भरनी होंगी। दूसरे चरण का विस्तृत कार्यक्रम विश्वविद्यालय अलग से जारी करेगा।
