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Thursday, August 20, 2026
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WHO का Hantavirus अलर्ट: कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक? जानिए कैसे फैलता है ये वायरस

Hantavirus : इस समय हंता वायरस को लेकर हर तरफ चर्चा देखने को मिल रही है.  इसको बड़ा सवाल यही है कि क्या यह वायरस भी कोरोना की तरह तेजी से फैल सकता है? क्या छूने भर से संक्रमण हो जाएगा और क्या दुनिया फिर किसी नई महामारी की तरफ बढ़ रही है? इन तमाम सवालों के बीच डब्ल्यूएचओ ने अलर्ट जारी करते हुए स्थिति को लेकर बड़ी जानकारी दी है.

क्या है मामला?

दरअसल यह मामला डच झंडे वाले लग्जरी क्रूज शिप MV Hondius से जुड़ा है, जहां रहस्यमयी सांस संबंधी बीमारी के बाद अब हंता वायरस इंफेक्शन की पुष्टि हुई है. अब तक इस जहाज से जुड़े आठ मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें पांच लोगों में हंता वायरस की पुष्टि हुई है जबकि तीन मामले संदिग्ध माने जा रहे हैं. तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है.

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन का क्या कहना?

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अधिकारियों के मुताबिक जहाज पर पहला इंफेक्टेड व्यक्ति 6 अप्रैल को बीमार पड़ा था और 11 अप्रैल को उसकी मौत हो गई. शुरुआत में डॉक्टरों को हंता वायरस का शक नहीं हुआ क्योंकि उसके लक्षण सामान्य सांस संबंधी इंफेक्शन जैसे थे. इसी वजह से शुरुआती सैंपल भी नहीं लिए गए. बाद में जब दूसरे यात्री भी बीमार पड़ने लगे, तब स्वास्थ्य एजेंसियों ने हंता वायरस की जांच शुरू की.

एक्सपर्ट का क्या कहना?

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की इंफेक्शन रोग एक्सपर्ट Dr Maria Van Kerkhove ने साफ कहा कि इस वायरस की तुलना कोरोना से नहीं करनी चाहिए. उन्होंने कहा, “यह SARS-CoV-2 नहीं है और यह उसी तरह नहीं फैलता. इंफेक्शन केवल बेहद करीबी और लंबे संपर्क में फैलने की आशंका होती है.” उन्होंने यह भी बताया कि ज्यादातर हंता वायरस इंसान से इंसान में फैलते ही नहीं हैं.

कैसे फैलता है यह वायरस?

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि हंता वायरस आमतौर पर इंफेक्टेड चूहों या उनके मल-मूत्र के संपर्क से फैलता है. हालांकि इस मामले में एंडीज स्ट्रेन का शक जताया जा रहा है, जो हंता वायरस का ऐसा रेयर प्रकार है जिसमें सीमित स्तर पर इंसान से इंसान में इंफेक्शन फैलने की क्षमता देखी गई है। यही वजह है कि डब्ल्यूएचओ इस मामले पर बेहद करीबी नजर बनाए हुए है.

इन्क्यूबेशन अवधि छह हफ्ते तक

डब्ल्यूएचओ ने यह भी बताया कि हंता वायरस की इन्क्यूबेशन अवधि छह हफ्ते तक हो सकती है. यानी इंफेक्शन होने के कई हफ्तों बाद भी लक्षण सामने आ सकते हैं. इसी कारण दुनिया के कई देशों में यात्रियों की निगरानी की जा रही है.  डब्ल्यूएचओ ने उन 12 देशों को अलर्ट भेजा है, जहां के यात्री सेंट हेलेना में जहाज से उतर चुके थे.  स्थिति की गंभीरता को देखते हुए WHO के विशेषज्ञ, नीदरलैंड के डॉक्टर और यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल की टीम जहाज पर पहुंच चुकी है. यह टीम यात्रियों की मेडिकल जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इंफेक्शन जहाज के अंदर फैला या लोग पहले से इंफेक्टेड थे. हालांकि, डब्ल्यूएचओ फिलहाल दुनियाभर में इसके खतरे को कम बता रहा है, लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि बंद जगहों जैसे क्रूज शिप में लंबे समय तक साथ रहने से इंफेक्शन फैलने का खतरा बढ़ सकता है. यही वजह है कि दुनिया भर की स्वास्थ्य एजेंसियां इस मामले पर बेहद सतर्क नजर बनाए हुए हैं.

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