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Tuesday, July 21, 2026
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CG High Court : महादेव सट्टा एप केस में हाईकोर्ट का सख्त रुख, संदिग्ध बैंक खातों को अनफ्रीज करने से किया इनकार

CG High Court : महादेव ऑनलाइन सट्टा एप मामले में बिलासपुर कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों को अनफ्रीज करने की मांग को खारिज करते हुए स्पष्ट कहा है कि जिन खातों का इस्तेमाल संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और अपराध से अर्जित रकम के लिए किया गया हो, उन्हें जांच पूरी होने तक अनफ्रीज नहीं किया जा सकता। कोर्ट के इस फैसले को जांच एजेंसियों के लिए बड़ी राहत और ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

मामले की सुनवाई के दौरान जांच एजेंसियों ने अदालत को बताया कि महादेव ऑनलाइन सट्टा एप के जरिए करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध वित्तीय लेन-देन किया गया है। इस अवैध नेटवर्क को संचालित करने के लिए कई बैंक खातों का उपयोग किया गया था। जांच के दौरान इन खातों को फ्रीज कर दिया गया, ताकि पैसों के लेन-देन और नेटवर्क की गतिविधियों की गहन जांच की जा सके। जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क शेल कंपनियों और फर्जी बैंक खातों के माध्यम से संचालित किया जा रहा था। पुलिस का दावा है कि सट्टेबाजी से जुड़े लेन-देन को छिपाने और रकम को इधर-उधर करने के लिए कई लोगों के नाम पर बैंक खाते खोले गए थे। इन खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर अवैध धन के ट्रांजेक्शन में किया जा रहा था।

जांच के दौरान कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। आरोप है कि आईसीआईसीआई बैंक के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से खाताधारकों के नाम पर फर्जी तरीके से अकाउंट खोले गए। इसके लिए ओटीपी और दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया गया। पुलिस इस पूरे मामले में बैंकिंग सिस्टम के दुरुपयोग और संभावित साठगांठ की भी जांच कर रही है। याचिकाकर्ता विकास कुमार सिंह ने अदालत में दलील दी कि वह मामले में सीधे तौर पर आरोपी नहीं है और पुलिस पहले ही जरूरी दस्तावेज और सबूत जुटा चुकी है। इसलिए खाते को फ्रीज रखने का कोई औचित्य नहीं है। हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।

कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और खातों का उपयोग कथित तौर पर अवैध गतिविधियों में हुआ है। ऐसे में खातों को अनफ्रीज करना जांच को प्रभावित कर सकता है। अदालत ने यह भी माना कि प्रथम दृष्टया यह मामला गंभीर आर्थिक अपराध और संगठित ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। इससे पहले न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने भी खाते को अनफ्रीज करने की याचिका खारिज कर दी थी। बाद में सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर की गई, लेकिन वहां भी निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए राहत देने से इनकार कर दिया गया।मामले में तारबाहर थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी रजत जैन और उसके सहयोगियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि आरोपियों ने संगठित तरीके से सट्टेबाजी का नेटवर्क खड़ा कर कई लोगों के नाम पर बैंक खाते खोलकर अवैध लेन-देन किया।

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