31.1 C
New Delhi
Friday, May 22, 2026
HomeBlog24×7 मोबाइल स्क्रीन का असर: मोबाइल स्क्रीन आपकी दिल की सेहत के...

24×7 मोबाइल स्क्रीन का असर: मोबाइल स्क्रीन आपकी दिल की सेहत के लिए क्यों है खतरनाक

आज की जिंदगी में स्क्रीन इतनी आम हो चुकी है कि हम यह तक नहीं नोटिस करते हैं कि दिन का कितना वक्त मोबाइल, लैपटॉप और टीवी  के सामने निकल जाता है. काम, मैसेज, खबरें, सोशल मीडिया रील्स और नोटिफिकेशन सब कुछ एक ही स्क्रीन में सिमट गया है. धीरे-धीरे पूरे दिन एक लंबी भी डिजिटल रोशनी में घुल जाता है और इसके साथ जुड़ा तनाव भी नॉर्मल लगने लगता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि मोबाइल स्क्रीन का साइलेंट स्ट्रेस क्या है और 24*7 डिजिटल लाइफ दिल की सेहत पर कैसे असर डाल रही है.

स्क्रीन स्ट्रेस कब बन जाता है लाइफस्टाइल?

मोबाइल देखते हुए खाना खाना, परिवार के साथ बैठकर भी नोटिफिकेशन चेक करना और देर रात स्क्रीन पर कुछ आखिरी देखने की आदत अब आम हो चुकी है. यही आदतें धीरे-धीरे शरीर पर असर डालने लगती है. स्क्रीन से जुड़ा तनाव सिर्फ दिमाग तक सीमित नहीं रहता है, बल्कि शरीर में उतर जाता है, ब्लड प्रेशर बढ़ना, दिल की धड़कन का अनियमित होना, एंग्जायटी अटैक, लगातार थकान, सिरदर्द और नींद से जुड़ी समस्याएं इसके संकेत है. कुछ मामलों में लंबे समय तक डिजिटल तनाव को दिल की गंभीर बीमारियों और अचानक मेडिकल इमरजेंसी से भी जोड़ा गया है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

एक्सपर्ट्स के अनुसार लंबे समय तक बैठकर स्क्रीन देखने से शरीर की मूवमेंट कम हो जाती है. इससे ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ता है और मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और खराब कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ता है, जो दिल की बीमारी की बड़ी वजह है. डॉक्टर बताते हैं कि स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है, जिससे नींद खराब होती है. खराब नींद खुद हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज का बड़ा रिस्क फैक्टर है.

नोटिफिकेशन भी बढ़ा रहे हैं दिल पर दबाव 

लगातार नोटिफिकेशन और सोशल मीडिया का इस्तेमाल शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल का बढ़ाता है. समय के साथ यह ब्लड प्रेशर को ऊपर ले जाता है और दिल पर एक्स्ट्रा दबाव डालता है. कुछ रिसर्च में यह भी सामने आया है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम खासतौर पर टीवी देखने की आदत आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकती है. इसके अलावा जब कोई चीज लगभग हर किसी की जिंदगी का हिस्सा बन जाए, तो वह खतरनाक लगनी बंद हो जाती है. वहीं थकान और तनाव को आजकल लोग मजाक या बिजी लाइफ का हिस्सा मान लेते हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार यह डिजिटल स्ट्रेस अचानक नजर नहीं आता है. इसमें न कोई चोट होती है और न एक पल में गिरावट होती है. डिजिटल स्ट्रेस सालों तक  तक चुपचाप बढ़ता रहता है और जब समस्या गंभीर होती है, तब फोन जैसी आम चीज को वजह मानना मुश्किल लगता है.

शरीर देता है संकेत जिस नजरअंदाज कर देते हैं लोग 

एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर स्क्रीन टाइम से सेहत प्रभावित हो रही है तो इसके संकेत लगातार थकान, खराब नींद, बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर, वजन बढ़ना, फोन या कंप्यूटर से जुड़ी बेचैनी और फिजिकल एक्टिविटी में कमी शामिल होते हैं. वहीं डिजिटल स्ट्रेस इसलिए खतरनाक है क्योंकि यह दिखने में नॉर्मल लगता है, लेकिन शरीर इसे लगातार दबाव की तरह लेता है. इससे दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर पूरी तरह नॉर्मल मोड में वापस नहीं आ पाते हैं.

दिल को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?

एक्सपर्ट्स के अनुसार हर 30 से 40 मिनट में खड़े होकर थोड़ा चलना या स्ट्रेच करना मददगार हो सकता है. सोने से 1 से 2 घंटे पहले स्क्रीन से दूरी, हफ्ते में कम से कम 150 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी और सोशल मीडिया से ब्रेक दिल की सेहत के लिए जरूरी है.

RELATED ARTICLES
New Delhi
haze
31.1 ° C
31.1 °
31.1 °
23 %
4.1kmh
0 %
Fri
44 °
Sat
44 °
Sun
46 °
Mon
46 °
Tue
46 °

Most Popular