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She Marts: SHE Marts का लॉन्च, महिलाओं के बिज़नेस सपनों को मिलेगी नई उड़ान

She Marts: 1 फरवरी 2026 को मोदी सरकार के कार्यकाल का तीसरा बजट पेश हुआ, जो महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन गया। इसका पहला कारण है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार आम बजट पेश किया है। दूसरा कारण है कि इस बजट में महिला  उद्यमिता को बढ़ावा देने की घोषणा की गई। केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा देने के लिए SHE-Marts योजना की घोषणा की है। यह योजना सेल्फ-हेल्प एंटरप्रेन्योर मार्ट्स (Self-Help Entrepreneur Marts) पर आधारित है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को सिर्फ़ आजीविका तक सीमित न रखकर उद्यमिता और बाज़ार से सीधे जोड़ना है।

यह पहल ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम की सफलता से प्रेरित है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जमीनी स्तर पर मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

SHE-Marts क्या हैं?

SHE-Marts ऐसे सामुदायिक रिटेल आउटलेट्स होंगे, जिनका स्वामित्व और संचालन पूरी तरह महिलाओं के हाथों में होगा। इन मार्ट्स के ज़रिए ग्रामीण महिलाएं कृषि, संबद्ध क्षेत्रों और छोटे घरेलू व्यवसायों से जुड़े अपने उत्पाद सीधे बाज़ार में बेच सकेंगी। इस योजना का मूल उद्देश्य महिलाओं को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उन्हें निर्णय लेने वाली उद्यमी के रूप में स्थापित करना है, ताकि उनकी आय में स्थायी वृद्धि हो और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

कैसे काम करेगी SHE-Marts योजना?

  • एग्री-क्लस्टर्स में स्थापना

SHE-Marts को कृषि क्लस्टर्स में विकसित किया जाएगा, जहां ये नियमित बाज़ार की तरह संचालित होंगी।

  • वित्तीय और तकनीकी सहायता

महिलाओं को कार्यशील पूंजी, आसान क्रेडिट और आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

  • बायर-सेलर मीट्स

लगभग 50 बायर-सेलर मीट्स आयोजित होंगी, जिससे ग्रामीण महिलाएं बड़े खरीदारों और संस्थागत बाज़ारों से जुड़ सकें।

  • जोखिम और तरलता समर्थन

योजना के तहत जोखिम कम करने, नकदी प्रवाह बनाए रखने और क्रेडिट तक आसान पहुंच सुनिश्चित की जाएगी।

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सरकारी सहयोग और डिजिटल सुविधा

SHE-Marts योजना को ग्रामीण विकास मंत्रालय और कृषि मंत्रालय के संयुक्त सहयोग से लागू किया जाएगा। इसमें ऑनलाइन लोन सिस्टम की व्यवस्था होगी, जिससे स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं बिना जटिल प्रक्रिया के ऋण प्राप्त कर सकेंगी। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण इलाकों से शहरों की ओर होने वाले पलायन पर भी लगाम लगेगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार पर क्या होगा असर?

इस योजना के ज़रिए महिलाओं को उच्च मूल्य वाली फसलें, पशुपालन और कौशल आधारित गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। सरकार का अनुमान है कि SHE-Marts से लाखों ग्रामीण महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। इससे न केवल उनकी आय में बढ़ोतरी होगी, बल्कि वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनेंगी और ग्रामीण भारत में महिला-नेतृत्व वाली उद्यमिता को नई मजबूती मिलेगी।

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