Ukraine-Russia war: रूस ने जब यूक्रेन पर 24 फरवरी, 2022 को पूर्ण पैमाने पर आक्रमण किया तब ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना था कि ये लड़ाई 10-15 दिन से ज्यादा नहीं चलेगी. किसी को यकीन नहीं था कि रूस जैसी महाशक्ति के आगे यूक्रेन टिक पाएगा. रूस की सेनाओं के पास मौजूद हथियारों को देखा जाए तो इसके सामने यूक्रेन कहीं खड़ा नहीं दिखता. लेकिन, सच ये है कि आज 4 साल बाद भी यूक्रेन युद्ध के मैदान में टिका हुआ है. यूक्रेन ने शुरुआत में हुए नुकसान के बाद अपनी रणनीति बदली और सैनिकों को सीमा पर भेजने के बदले रोबोट, ड्रोन और दूर से नियंत्रित होने वाले टैंकों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. इस रणनीति के दम पर यूक्रेन ने कई मोर्चों पर बढ़त हासिल कर ली है.
सीमा से दूर रहकर लड़ रहे हैं यूक्रेनी सैनिक
CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के सैनिक अब रूस से लड़ाई सीमा से काफी दूर जमीन के नीचे बने बंकरों में बैठकर लड़ रहे हैं. ये सैनिक अब ड्रोन युद्ध और रोबोटिक उपकरणों को दूर से कंट्रोल करने में माहिर हो चुके हैं. हाल ही में पूर्वी यूक्रेन में रूस की अग्रिम पंक्ति के तीन ठिकानों पर यूक्रेनी सैनिकों ने दूर से ही छह धमाके किए. रिपोर्ट में बताया गया है कि यूक्रेन के ज्यादातर मिशन अब मानवरहित हैं.
22,000 से ज्यादा मानवरहित मिशन पूरे किए गए
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने दावा किया है कि उनकी सेना ने पूरी तरह से रोबोट और ड्रोनों की मदद से इस साल अप्रैल में रूस के एक ठिकाने पर पहली बार कब्जा किया. जेलेंस्की ने ये भी बताया कि जनवरी से अब तक इन मानवरहित मशीनों ने 22,000 से ज्यादा मिशन पूरे किए हैं. यूक्रेन ने इस युद्ध में ड्रोन का इस्तेमाल बेहद चतुराई से किया है. CNN की रिपोर्ट बताती है कि रूस के सैनिकों में यूक्रेनी ड्रोन का इतना खौफ है कि उनके खेमें में इसे “मौन मृत्यु” कहा जाता है. ये ड्रोन तब सामने आते हैं जब ये केवल 10 मीटर दूर होते हैं. यूक्रेन पहले छोटे ड्रोन रूसी सैनिकों का ध्यान भटकाने के लिए भेजता है. ऊपर निगरानी ड्रोन से लाइव फीड दूर बंकर में बैठे सैनिक देख रहे होते हैं. जब रूसी सैनिकों का ध्यान भटकता है तो बड़े कामिकेज ड्रोन से असली हमला किया जाता है.
कैसे रूस को आगे बढ़ने से रोक रहा है यूक्रेन?
रूस-यूक्रेन युद्ध एक लाइव ‘प्रयोगशाला’ बन चुका है. इसमें बड़े पैमाने पर ग्राउंड रोबोट्स, ड्रोन्स और रीमोटली कंट्रोल्ड हथियारों का इस्तेमाल हो रहा है. यूक्रेन ने युद्ध के मैदान को पूरी तरह ‘डिजिटाइज़’ कर दिया है. यूक्रेन सरकार ने ‘Brave1’ जैसे प्रोजेक्ट्स शुरू किए हैं जिसके तहत कड़ों घरेलू टेक कंपनियां लगातार नए-नए रोबोट्स विकसित कर रही हैं. छोटे साइज के मानवरहित ग्राउंड व्हीकल्स (UGVs) बनाए जा रहे हैं. यूक्रेन ने छोटे रिमोट-कंट्रोल्ड टैंकों पर हैवी मशीन गन फिट की है. इन अनमैन्ड ‘मिनी-टैंकों’ से रॉकेट भी दागे जा रहे हैं. इनकी मदद से यूक्रेन सीधे रूसी ट्रेंच पर हमला कर रहा है.
आत्मघाती रोबोट भी मैदान में…
यूक्रेन ने कुछ रोबोट्स को ‘चलता-फिरता बम’ बना दिया है. ये करीब 30 से 200 किलोग्राम तक विस्फोटक लेकर रूसी बंकरों या सैन्य ठिकानों में घुस जाते हैं. ये रोबोट रूसी सैनिकों के छिपने के ठिकानों को उड़ा देते हैं. इनके अलावा ‘Bizon-L’ जैसे रोबोट अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों तक खाना, दवाइयां और गोला-बारूद पहुंचा रहे हैं. कैमरे और बारूद से लैस बेहद सस्ते ड्रोन्स सीधे रूसी टैंकों या सैनिकों पर जाकर टकराते हैं और भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं. खास बात ये है कि यूक्रेनी ड्रोन AI से भी लैस हैं. रूसी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इन्हें रोकना असंभव साबित हो रहा है.
