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नेपाल को मिली पहली महिला प्रधानमंत्री: सुशीला कार्की बनेंगी देश की नई PM

Sushila Karki: नेपाल ने इतिहास रचते हुए अपनी पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में सुशीला कार्की को चुना है। 73 वर्षीय सुशीला कार्की, जो नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस रह चुकी हैं।

Sushila Karki: नेपाल ने इतिहास रचते हुए अपनी पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में सुशीला कार्की को चुना है। 73 वर्षीय सुशीला कार्की, जो नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस रह चुकी हैं, जल्द ही देश की बागडोर संभालेंगी। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल उन्हें प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाएंगे। यह निर्णय काठमांडू में विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच बनी सहमति के बाद लिया गया। कार्की की नियुक्ति न केवल नेपाल की राजनीति में एक मील का पत्थर है, बल्कि यह देश में महिला सशक्तिकरण और सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है।

Sushila Karki: भ्रष्टाचार विरोधी चेहरा

सुशीला कार्की का नाम नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के लिए प्रसिद्ध है। 2016 में नेपाल की सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस बनीं कार्की ने अपने कार्यकाल में कई साहसिक फैसले लिए। उन्होंने भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कठोर निर्णय सुनाए, जिससे वह विशेष रूप से युवा पीढ़ी और Gen Z के बीच लोकप्रिय हुईं। कार्की ने महिलाओं को अपने बच्चों को नागरिकता प्रदान करने का अधिकार देने जैसे प्रगतिशील फैसले भी लिए, जो पहले केवल पुरुषों तक सीमित था। उनकी यह छवि उन्हें नेपाल की राजनीति में एक विश्वसनीय और मजबूत नेता बनाती है।

Sushila Karki: प्रधानमंत्री पद की दौड़

सुशीला कार्की का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए तब सामने आया, जब अंतरिम प्रधानमंत्री के लिए कई दावेदारों पर चर्चा हो रही थी। काठमांडू के मेयर बालेन शाह ने कार्की का समर्थन किया, जिसने उनकी दावेदारी को और मजबूती दी। नेपाल बिजली बोर्ड के पूर्व प्रमुख कुलमान घिसिंग भी इस पद की दौड़ में थे, लेकिन अंततः कार्की के नाम पर सहमति बनी। यह नियुक्ति नेपाल के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि अब देश की तीन प्रमुख संस्थाएं—राष्ट्रपति (बिद्या देवी भंडारी), संसद अध्यक्ष (ओंसरी घर्ती), और प्रधानमंत्री—महिलाओं के नेतृत्व में होंगी।

शिक्षा और करियर

सुशीला कार्की का जन्म 7 जून 1952 को नेपाल के बिराटनगर में हुआ था। वह अपने माता-पिता की सात संतानों में सबसे बड़ी हैं। उन्होंने 1972 में बिराटनगर के महेंद्र मोरांग कैंपस से बीए और 1975 में भारत के बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स की डिग्री हासिल की। 1978 में त्रिभुवन यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री प्राप्त करने के बाद उन्होंने वकालत शुरू की। 2016 में वह सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस बनीं, लेकिन 2017 में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया।

चुनौतियों से भरा सफर

कार्की का करियर चुनौतियों से भरा रहा। 2017 में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था, जिसके चलते उन्हें चीफ जस्टिस के पद से निलंबित कर दिया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस महाभियोग को असंवैधानिक घोषित कर उन्हें बहाल किया। इस घटना ने उनकी भ्रष्टाचार विरोधी छवि को और मजबूत किया। कार्की ने हमेशा स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका की वकालत की, जिसने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाया।

भारत के साथ संबंध

सुशीला कार्की भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों की पक्षधर रही हैं। उन्होंने कई मौकों पर भारत के साथ सहयोग की वकालत की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की तारीफ की है। उनकी यह सोच भारत-नेपाल संबंधों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी नियुक्ति से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

नेपाल में बदलाव की उम्मीद

कार्की की नियुक्ति ने नेपाल में बदलाव की उम्मीद जगाई है। उनकी भ्रष्टाचार विरोधी नीतियां और महिलाओं के अधिकारों के लिए किए गए कार्यों ने उन्हें युवाओं के बीच प्रेरणा का स्रोत बनाया है। उनकी सख्त और निष्पक्ष छवि को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि वह नेपाल में सुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा देंगी। यह नियुक्ति विश्व स्तर पर नेपाल की प्रगतिशील छवि को भी मजबूत करती है।

चुनौतियों से उबारने की बड़ी जिम्मेदारी

सुशीला कार्की के सामने नेपाल को आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों से उबारने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, और बुनियादी ढांचे की कमी जैसे मुद्दों पर उन्हें ठोस कदम उठाने होंगे। उनकी सख्त और निष्पक्ष छवि को देखते हुए उम्मीद है कि वह नेपाल को एक नई दिशा प्रदान करेंगी। यह ऐतिहासिक नियुक्ति न केवल नेपाल, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए महिला नेतृत्व का प्रतीक बनेगी।

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