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Friday, August 7, 2026
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सरकारी खर्च पर पढ़े, अस्पताल में ड्यूटी से गायब! 118 डॉक्टरों पर गाज

Uttarakhand: सरकारी खर्च पर बने डॉक्टरों ने बॉन्ड नियमों का उल्‍लंघन किया। विभिन्न सरकारी अस्पतालों में तैनाती के बाद 118 बॉन्ड धारक डॉक्‍टर वहां अपनी सेवा देने के लिए नहीं पहुंचे।

Uttarakhand: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी से प्रशिक्षित 118 बॉन्ड धारक डॉक्टर अपने सरकारी तैनाती स्थलों पर पहुंचे ही नहीं। बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने पर कॉलेज प्रशासन ने इन सभी डॉक्टरों को अंतिम नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब मांगा है। जवाब न मिलने की स्थिति में संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उनसे 20 लाख से लेकर 2.5 करोड़ रुपये तक की वसूली भी हो सकती है।

Uttarakhand: सरकार के खर्च पर हुई पढ़ाई, लेकिन सेवा से किया इनकार

राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी ने एमबीबीएस और पीजी कोर्स के दौरान इन डॉक्टरों से बॉन्ड साइन करवाया था। इस बॉन्ड के तहत रियायती फीस और सरकारी खर्च पर पढ़ाई के बदले, डॉक्टरों को निर्धारित अवधि तक उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में सेवा देना अनिवार्य था। सरकार की योजना के तहत डीजी हेल्थ के माध्यम से इन डॉक्टरों की राज्यभर के विभिन्न अस्पतालों में तैनाती भी कर दी गई थी। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि 28 पीजी और 90 एमबीबीएस डिग्री धारक ये डॉक्टर अपने-अपने कार्यस्थलों पर पहुंचे ही नहीं।

Uttarakhand: पहले भी भेजे गए थे नोटिस, नहीं मिला संतोषजनक जवाब

मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने बताया कि पूर्व में इन सभी डॉक्टरों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अब अंतिम नोटिस जारी किया गया है और 15 दिनों की समयसीमा तय की गई है। अगर इस अवधि में डॉक्टरों ने जवाब नहीं दिया, तो कॉलेज प्रशासन संबंधित डॉक्टर के गृह जनपद के जिलाधिकारी को पत्र भेजकर कानूनी कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश करेगा।

Uttarakhand: कानूनी कार्रवाई और भारी वसूली की तैयारी

प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी के अनुसार, बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन गंभीर मामला है। “इन डॉक्टरों ने अपनी पढ़ाई के दौरान स्पष्ट रूप से सहमति दी थी कि वे पढ़ाई पूरी होने के बाद सरकारी सेवा में योगदान देंगे। अब जब उन्होंने सेवा से इनकार कर दिया है, तो बॉन्ड की शर्तों के अनुसार उनसे 20 लाख से 2.5 करोड़ रुपये तक की राशि वसूली जाएगी,” उन्होंने कहा।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन डॉक्टरों की अनुपस्थिति से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर नकारात्मक असर पड़ा है। उत्तराखंड में कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहले से ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। इस स्थिति में बॉन्ड धारक डॉक्टरों का ड्यूटी से गायब रहना, व्यवस्था पर और दबाव डाल रहा है।

क्यों जरूरी है बॉन्ड व्यवस्था

बॉन्ड व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य में प्रशिक्षित डॉक्टर, खासकर सरकारी संसाधनों पर पढ़ने वाले, कम से कम कुछ सालों तक सरकारी अस्पतालों में सेवा दें। इससे ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाएं बेहतर होती हैं और डॉक्टरों की कमी को दूर किया जा सकता है। लेकिन इस मामले ने बॉन्ड व्यवस्था की सख्ती और अनुपालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शुरू होगी कानूनी कार्रवाई

मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि अंतिम नोटिस के बाद किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। डॉक्टरों के खिलाफ न केवल आर्थिक वसूली होगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर उनके मेडिकल काउंसिल पंजीकरण को भी प्रभावित करने के लिए अनुशंसा की जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग इस मामले में सख्त रुख अपनाने के मूड में है ताकि भविष्य में अन्य डॉक्टर इस तरह बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन न करें।

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