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Tuesday, September 22, 2026
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kanwar yatra 2024: ‘दुकानों पर नाम-पहचान लगाने की जरूरत नहीं’, सुप्रीम कोर्ट ने UP, MP और उत्तराखंड सरकार को नोट‍िस

kanwar yatra 2024: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड सरकार ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर सभी दुकानों पर नेमप्लेट लगाने का आदेश पर रोक लगा दी है।

kanwar yatra 2024: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड सरकार ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर सभी दुकानों पर नेमप्लेट लगाने का आदेश पर रोक लगा दी है। कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित सभी भोजनालयों और ढाबों पर मालिकों और कर्मचारियों के नाम लिखने का आदेश जारी कि दिया गया था। श्रावण महीना आज यानी सोमवार से शुरू हो गया है। इस पवित्र महीने में भक्त और श्रद्धालु कांवड़ लेकर भोले शंकर को जल चढ़ाने के लिए कई किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं। इस दौरान यात्रा में कई दुकानों और ढाबों से वो खाने का सामान व अन्य चीजें खरीदते हैं। यूपी और उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा मार्ग पर नेमप्लेट लगाने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने दिल्ली में कांवड़ यात्रा मार्ग पर पड़ने वाली सभी दुकानों के बाहर नेमप्लेट लगाने का आदेश जारी करने की मांग की है।

कांवड़ रूट में नेमप्लेट लगाने पर रोक

शीर्ष कोर्ट में कांवड़ यात्रा-नेमप्लेट विवाद मामले में सोमवार को सुनवाई करते हुए योगी सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें कांवड़ रूट पर सभी दुकानदारों को अपनी पहचान उजागर करने के लिए आदेश जारी किया था। कोर्ट ने कहा कि दुकानदारों को अपना नाम या पहचान बताने कोई की जरूरत नहीं है।

यूपी, एमपी और उत्तराखंड सरकार को नोट‍िस

यूपी सरकार के साथ, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में भी इन दुकानों पर मालिकों का नाम लिखने का आदेश जारी किया था। जिससे श्रद्धालु अपनी पसंद की दुकान से सामान खरीद सकें। इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जस्टिस ऋषिकेश रॉय और एसवीएन भट्टी की पीठ ने नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि श्रद्धालुओं को मानक स्वच्छता बनाए रखते हुए उनकी पसंद का भोजन परोसा जा सकता है।

पहले दुकानों पर नेमप्लेट लगाने का जारी किया था आदेश

आपको बता दें कि बीते दिनों यूपी सरकार के निर्देशों के अनुसार, राज्य भर में सभी खाद्य दुकानों, भोजनालयों और फूड जॉइंट्स को मालिकों/प्रोपराइटरों और कर्मचारियों के नाम प्रदर्शित करने वाली “नेमप्लेट” लगाने के लिए कहा गया था। आदेश के मुताबिक, यात्रा मार्ग पर हलाल प्रमाणन वाले उत्पाद बेचने वालों पर भी दंडात्मक कार्रवाई की जानी थी। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राजनीतिक दलों की आई प्रतिक्रियाएं

कांवड़ यात्रा मार्ग पर सभी दुकानों पर नेमप्लेट लगाने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रोक लगा दी। कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित सभी भोजनालयों और ढाबों पर मालिकों और कर्मचारियों के नाम लिखने का आदेश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक दलों की ओर से प्रतिक्रियाएं आई। बीजेपी सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि कोर्ट का आज जो आदेश आया है, मैं उस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। वहीं, जदयू और कांग्रेस ने कांवड़ यात्रा नेम प्लेट विवाद पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया।

जेडीयू और कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले ​का किया स्वागत

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए जदयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगाई। इस आदेश से समाज में विभाजन पैदा होता। कोर्ट का फैसला सराहनीय है। वहीं, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि आज सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों के गैर संवैधानिक आदेश पर रोक लगा दी है। ये आदेश अलपसंख्यक, आदिवासी और पिछड़ी जाति के खिलाफ था और इसके पीछे आरएसएस की सोच दिखाई दे रही थी। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अब्बास हैदर ने कांवड़ यात्रा नेम प्लेट विवाद को लेकर योगी सरकार पर निशाना साधा है।

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