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Tuesday, June 2, 2026
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Khel Ratna Award: मनु भाकर-गुकेश सहित चार को मिला खेल रत्न, राष्ट्रपति मुर्मू ने किया सम्मानित

Khel Ratna Award: गुकेश डी, मनु भाकर (निशानेबाजी), हरमनप्रीत सिंह (हॉकी) और प्रवीण कुमार (पैरा-एथलीट) को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से प्रतिष्ठित मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार दिया गया।

Khel Ratna Award: विश्व शतरंज चैंपियन गुकेश डी और पेरिस ओलंपिक और पैरालंपिक पदक विजेता – मनु भाकर (निशानेबाजी), हरमनप्रीत सिंह (हॉकी) और प्रवीण कुमार (पैरा-एथलीट) को शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से प्रतिष्ठित मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार दिया गया। गुकेश डी ने शतरंज के क्षेत्र में भारत को गर्वित किया है, जबकि मनु भाकर, हरमनप्रीत सिंह और प्रवीण कुमार ने ओलंपिक और पैरालंपिक में अपने-अपने खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करके देश का नाम रोशन किया। यह पुरस्कार न केवल उनके खेल कौशल को मान्यता देता है, बल्कि आने वाले खिलाड़ियों को प्रेरित करने का कार्य भी करता है।

शानदार और सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया जाता है राष्ट्रीय खेल पुरस्कार

राष्ट्रीय खेल पुरस्कार भारत में खेलों में उत्कृष्टता और योगदान को मान्यता देने के लिए दिए जाने वाले सबसे प्रतिष्ठित सम्मान हैं। इनमें सबसे उच्चतम पुरस्कार मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार है, जिसे खिलाड़ियों को पिछले चार वर्षों में उनके खेल प्रदर्शन की निरंतरता और वैश्विक मंच पर उपलब्धियों के आधार पर दिया जाता है। इस पुरस्कार का नाम हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के सम्मान में रखा गया है, जिन्होंने भारतीय हॉकी को वैश्विक पहचान दिलाई। इस पुरस्कार में विजेताओं को एक पदक, प्रमाण पत्र और नकद राशि दी जाती है।

विश्व शतरंज चैंपियन गुकेश डी

गुकेश डी ने सिंगापुर में चीन के डिंग लिरेन को हराकर सबसे कम उम्र के विश्व शतरंज चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल भारत बल्कि शतरंज की दुनिया में एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है।

पेरिस ओलंपिक और पैरालंपिक पदक विजेता मनु भाकर

मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक में 10 मीटर एयर पिस्टल और 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह एक ही ओलंपिक संस्करण में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बन गईं। यह उनके निरंतर प्रयास और अनुशासन का प्रतीक है।

हरमनप्रीत सिंह (हॉकी)

हरमनप्रीत सिंह ने भारतीय पुरुष हॉकी टीम को लगातार दूसरा ओलंपिक कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। यह भारत के हॉकी इतिहास में एक और गौरवशाली अध्याय जोड़ता है।

प्रवीण कुमार (पैरा-एथलीट)

प्रवीण कुमार ने पैरालंपिक में ऊंची कूद टी64 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। उनकी यह उपलब्धि प्रेरणा का स्रोत है, खासकर उन खिलाड़ियों के लिए जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को हासिल करने का प्रयास करते हैं।

17 पैरा-एथलीटों को अर्जुन पुरस्कार

अर्जुन पुरस्कार के लिए चुने गए इन 32 एथलीटों में से 17 पैरा-एथलीटों का शामिल होना भारतीय खेलों में समावेशिता और विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दर्शाता है कि भारत न केवल मुख्यधारा के खिलाड़ियों, बल्कि विशेष श्रेणी के एथलीटों को भी समान रूप से प्रोत्साहित और सम्मानित कर रहा है। इन खिलाड़ियों ने अपने खेल और समर्पण से भारत को गौरवान्वित किया है। अर्जुन पुरस्कार उनके परिश्रम और उपलब्धियों की एक महत्वपूर्ण मान्यता है, जो उन्हें और अधिक प्रेरित करेगा।
प्रमुख नाम और उनकी उपलब्धियां:

  • ज्योति याराजी और अन्नू रानी ने एथलेटिक्स में अपनी शानदार उपलब्धियों से भारत का नाम रोशन किया।
  • स्वीटी और नीटू ने बॉक्सिंग में अपने प्रभावशाली प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित किया।
  • वंतिका अग्रवाल (शतरंज) और सलीमा टेटे (हॉकी) ने अपनी-अपनी श्रेणियों में उत्कृष्टता दिखाई।
  • पैरा-एथलीटों में सचिन सरजेराव खिलारी, प्रणव सूरमा, और रूबीना फ्रांसिस जैसे खिलाड़ियों ने वैश्विक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर प्रेरणा दी।
  • तैराकी में भारत का नाम रोशन करने वाले साजन प्रकाश भी इस सूची का हिस्सा हैं।
  • सरबजोत सिंह और सिमरन ने शूटिंग में अपने प्रदर्शन से जगह बनाई।

इस वर्ष के द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता

द्रोणाचार्य पुरस्कार कोचों की भूमिका को मान्यता देने के लिए दिया जाने वाला भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान है। इस वर्ष जिन कोचों को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, उन्होंने अपने खिलाड़ियों को विश्व स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सुभाष राणा (पैरा-शूटर)

उन्होंने पैरा-शूटिंग में अपनी कोचिंग से खिलाड़ियों को शीर्ष स्तर पर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया और भारत को वैश्विक मंच पर कई पदक दिलवाए।

दीपाली देशपांडे (शूटिंग)

भारतीय शूटिंग में उनका योगदान उल्लेखनीय है। उन्होंने अपने शिष्यों को तकनीकी उत्कृष्टता सिखाई और उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया।

संदीप सांगवान (हॉकी)

हॉकी में कोचिंग के माध्यम से उन्होंने खिलाड़ियों को न केवल खेल कौशल में निपुण बनाया बल्कि मानसिक दृढ़ता का विकास भी किया, जिससे उनकी टीमों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया।

आजीवन श्रेणी में सम्मानित:

एस मुरलीधरन (बैडमिंटन)

दशकों तक बैडमिंटन में उनकी कोचिंग ने कई युवा खिलाड़ियों को प्रेरित किया, जिनमें से कई ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।

अरमांडो एग्नेलो कोलासो (फुटबॉल)

भारतीय फुटबॉल के विकास में उनकी भूमिका ऐतिहासिक है। उनके मार्गदर्शन में कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय टीम में स्थान पाया और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

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