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Wednesday, May 13, 2026
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Brahma stotram: ब्रह्मा जी का ये ब्रह्मस्तोत्रम् करता है हर भय का नाश, जानें किस दिन पाठ करना है शुभ

Brahma stotram: प्रदोष के दिन या सोमवार को ब्रह्मस्तोत्रम् के पाठ से जीवन को सही दिशा मिलती है। इसके साथ ही इसका पाठ हमारे जीवन में हर बाधा को दूर करने और सभी प्रयासों में सफलता पाने की शक्ति देता है।

Brahma stotram benefits: मान्यता के अनुसार इस ब्रह्माण्ड के रचयिता भगवान ब्रह्मा के ब्रह्मस्तोत्रम् के पाठ को बहुत प्रभावशाली माना गया है। इसे पञ्चरत्नस्तोत्रम् भी कहा जाता है। प्रदोष के दिन या सोमवार को ब्रह्मस्तोत्रम् के पाठ से जीवन को सही दिशा मिलती है। इसके साथ ही इसका पाठ हमारे जीवन में हर बाधा को दूर करने और सभी प्रयासों में सफलता पाने की शक्ति देता है। ये हमारे एकाग्रता की शक्ति को बढ़ाता है। वहीं इसका पाठ करने से ब्रह्मा जी की कृपा से मनुष्य को सभी भय और चिंताओं से छुटकारा पाने में मदद मिलती है। मान्यता है कि जो कोई हर सोमवार को ब्रह्मस्तोत्रम् का श्रद्धा से पाठ करता है उसके ज्ञान, कौशल में वृद्धि होने के साथ ही यह आपके जीवन में सुख-समृद्धि और शांति प्रदान करता है। आइए जानते हैं क्या है ब्रह्मस्तोत्रम्…

ब्रह्मस्तोत्रम् अथवा पञ्चरत्नस्तोत्रम्

स्तोत्रं श‍ृणु महेशानि ब्रह्मणः परमात्मनः ।
उच्छ्रुत्वा साधको देवि ब्रह्मसायुज्यमश्नुते ॥

ॐ नमस्ते सते सर्वलोकाश्रयाय
नमस्ते चिते विश्वरूपात्मकाय ।
नमोऽद्वैततत्त्वाय मुक्तिप्रदाय
नमो ब्रह्मणे व्यापिने निर्गुणाय ।।

त्वमेकं शरण्यं त्वमेकं वरेण्यं
त्वमेकं जगत्कारणं विश्वरूपम् ।
त्वमेकं जगत्कर्तृपातृप्रहार्तृ
त्वमेकं परं निश्चलं निर्विकल्पम् ।।

भयानां भयं भीषणं भीषणानां
गतिः प्राणिनां पावनं पावनानाम् ।
महोच्चैः पदानां नियन्तृ त्वमेकं
परेशं परं रक्षणं रक्षणानाम् ।।

परेश प्रभो सर्वरूपाविनाशिन्
अनिर्देश्य सर्वेन्द्रियागम्य सत्य ।
अचिन्त्याक्षर व्यापकव्यक्ततत्त्व
जगद्भासकाधीश पायादपायात् ।।

तदेकं स्मरामस्तदेकं भजाम-
स्तदेकं जगत्साक्षिरूपं नमामः ।
सदेकं निधानं निरालम्बमीशं
भवाम्भोधिपोतं शरण्यं व्रजामः ।।

पञ्चरत्नमिदं स्तोत्रं ब्रह्मणः परमात्मनः ।
यः पठेत्प्रयतो भूत्वा ब्रह्मसायुज्यमाप्नुयात् ।।

प्रदोषेऽदः पठेन्नित्यं सोमवारे विशेषतः ।
श्रावयेद्बोधयेत्प्राज्ञो ब्रह्मनिष्ठान्स्वबान्धवान् ।।

इति ते कथितं देवि पञ्चरत्नं महेशितुः ।

इति महानिर्वाणतंत्रे ब्रह्मस्तोत्रं एवं पञ्चरत्नस्तोत्रं समाप्तम् ।।

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