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Friday, October 16, 2026
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Rajasthan News: “105 KM दूर से पानी ला सकते हैं, तो 5 KM का अतिक्रमण क्यों नहीं हटता?” हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

रामगढ़ बांध के संरक्षण और पुनर्जीवन से जुड़े मामले की राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया कि जब सरकार 105 किलोमीटर दूर से पानी लाने की योजना बना रही है, तब बांध के आसपास महज 5 किलोमीटर के दायरे में फैले अतिक्रमण को हटाने में आखिर देरी क्यों हो रही है?

“जमीनी स्तर पर कार्रवाई नहीं दिख रही”

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश भुवन गोयल की खंडपीठ ने कहा कि साल 2012 से लगातार केवल रिपोर्ट पेश की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही. अदालत ने यह भी कहा कि बांध क्षेत्र में कई फार्म हाउस विकसित हो चुके हैं, जहां पार्टीज होती हैं. इसके अलावा 2 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले एनिकट तोड़े गए हैं, और बांध में पानी पहुंचाने वाले प्राकृतिक मार्ग भी प्रभावित हुए हैं.

105 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाई जाएगी  

सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कोर्ट को बताया कि ईसरदा बांध से करीब 105 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से रामगढ़ बांध तक पानी पहुंचाने की योजना पर काम चल रहा है. अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार ने कोर्ट को बताया कि परियोजना वर्ष 2028 तक पूरी होने की संभावना है, और इसका उपयोग पेयजल सप्लाई के लिए भी किया जाएगा. उन्होंने बताया कि ईसरदा से पहले पानी नहर के जरिए लाने की योजना थी, लेकिन रास्ते में आने वाली बाधाओं के कारण अब पाइपलाइन का विकल्प अपनाया गया है.

बहाव क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण  

न्याय मित्र अधिवक्ता अभिनव शर्मा ने कोर्ट को बताया कि रामगढ़ बांध के कैचमेंट और बहाव क्षेत्र में अब भी बड़े पैमाने पर अतिक्रमण मौजूद है. उन्होंने कहा कि भूमि आवंटन निरस्त करने के लिए अब तक लगभग 600 रेफरेंस प्रस्तुत किए जा चुके हैं, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी.  उन्होंने यह भी बताया कि विराटनगर क्षेत्र की करीब 600 बीघा भूमि को पहले नाले की श्रेणी में दिखाते हुए नामांतरण किया गया था, जिसे वर्ष 2024 में निरस्त कर दोबारा नामांतरण की प्रक्रिया शुरू की गई.

30 जुलाई को होगी अगली सुनवाई 

खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि लंबित सभी रेफरेंस और उन पर हुई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा शपथ पत्र के साथ अगले गुरुवार तक अदालत में प्रस्तुत किया जाए.  साथ ही जयपुर जिला कलेक्टर को भी अगली सुनवाई में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए. मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को निर्धारित की गई है.

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी, “रामगढ़ बांध का संरक्षण किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि इसकी प्राकृतिक जलधाराओं और पर्यावरण को सुरक्षित रखना वर्तमान और आने वाली सभी पीढ़ियों का साझा दायित्व है.”

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