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Tuesday, July 28, 2026
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Rajasthan News: रिहाई के आदेश के बावजूद नहीं छोड़ा गया बंदी, हाई कोर्ट ने सरकार को लगाई कड़ी फटकार

Rajasthan News: देश के नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और उनके संवैधानिक अधिकारों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने बेहद अहम फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट के  जस्टिस फरजंद अली की खंडपीठ ने   नागौर जिले के एक मामले की सुनवाई करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था को कड़ी फटकार लगाई है.  न्यायाधीश फरजंद अली अदालत में सुनवाई के दौरान कहा कि किसी नागरिक को कानूनी रूप से रिहाई का अधिकार मिलने के बाद भी हिरासत में रखना, केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि यह सीधे तौर पर संविधान की भावना पर बड़ा प्रहार है.

रिहाई के बाद भी 53 दिनों तक अवैध हिरासत में रहे

दरअसल, यह पूरा मामला नागौर जिले का है, जहां के देह  इलाके में रहने वाले घमंडनाथ के खिलाफ सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण को लेकर कार्रवाई की गई थी. जिसके तहत उन्हें सिविल कारावास की सजा सुनाई गई थी. इस सजा के खिलाफ जब उन्होंने अपील दायर की , जिस पर सुनवाई करते हुए अजमेर  के  अतिरिक्त संभागीय आयुक्त ने 15 अप्रैल 2026 को सजा के संचालन को स्थगित कर उनकी रिहाई के आदेश जारी किए थे. लेकिन संबंधित अधिकारियों  की घोर लापरवाही के कारण पीड़ित घमंडनाथ को करीब 53 दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रखा.

पत्नी ने दायर की थी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका

अपीलीय प्राधिकारी के आदेश के बावजूद जब घमंडनाथ को जेल से रिहा नहीं किया गया तो  पीड़ित की पत्नी ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की. इस याचिका पर हाईकोर्ट ने तुरंत संज्ञान लिया जिसके बाद 8 जून को उनकी रिहाई हो सकी.मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि किसी सक्षम अपीलीय प्राधिकारी के आदेश की इस तरह अनदेखी करना न्याय व्यवस्था में कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता.

 सजा के बाद बीमार परिवार की बढ़ीं थी मुश्किलें 

अदालत ने यह भी माना कि हिरासत की शुरुआत भले ही वैध रही हो, लेकिन जैसे ही उनकी सजा स्थगन जारी किया था उसके बाद भी उन्हें 53 दिनों तक जेल में रखना पूरी तरह अवैध था. इसके साथ ही, कोर्ट ने कोर्ट ने मानवीय संवेदनाओं को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि पीड़ित घमंडनाथ खुद एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, जबकि उनकी पत्नी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रही हैं.

इसी मानवीय और कानूनी आधार पर हाईकोर्ट ने  राजस्थान सरकार को आदेश दिया है कि वह पीड़ित घमंडनाथ को 45 दिनों के भीतर 2 लाख रुपये का मुआवजा दे. इसके साथ ही कोर्ट ने इस लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी उचित कार्रवाई के संकेत दिए हैं.

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