Khejri Bachao Andolan: बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन ने मंगलवार को नया मोड़ ले लिया, जब सैकड़ों पर्यावरण प्रेमी, बिश्नोई समाज के सदस्य और 363 धार्मिक संतों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। प्रदर्शनकारी आंखों पर पट्टी बांधकर बैठे, प्रतीकात्मक रूप से यह दिखाते हुए कि वे खेजड़ी के पेड़ों की कटाई को “अंधे” होकर नहीं देख सकते। यह आंदोलन मुख्य रूप से सोलर प्रोजेक्ट्स के नाम पर खेजड़ी वृक्षों की अंधाधुंध कटाई के विरोध में है। खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है, जो मरुस्थल में जीवनदायिनी भूमिका निभाता है।
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Khejri Bachao Andolan: वसुंधरा राजे का समर्थन
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने आंदोलन को मजबूत समर्थन दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर खेजड़ी के पेड़ की पूजा करते हुए अपनी तस्वीर शेयर की और लिखा, “सिर सांठे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण… खेजड़ी साधारण पेड़ नहीं, यह हमारे लिए देववृक्ष है। यह हमारी आस्था और भावनाओं से गहराई से जुड़ा है। मैं खुद भी खेजड़ी की पूजा करती हूं। राजनीति से ऊपर उठकर हमें इसे बचाना चाहिए। भले ही इसके लिए जान भी देनी पड़े, पेड़ों को बचाया जाना चाहिए।” उन्होंने खेजड़ी और ओरण (चारागाह) जमीन की रक्षा के अभियान में एकजुटता जताई।
Khejri Bachao Andolan: पूर्व मंत्री मेघवाल की मांग
पूर्व मंत्री गोविंदराम मेघवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा चाहें तो विधानसभा में तुरंत ट्री प्रोटेक्शन एक्ट की घोषणा कर सकते हैं। उन्होंने मांग की कि दो दिनों के भीतर कानून पारित किया जाए, ताकि खेजड़ी सहित हरे वृक्षों की कटाई पर सख्त रोक लगे।
Khejri Bachao Andolan: आंदोलन का इतिहास और विस्तार
सोमवार को पॉलीटेक्निक कॉलेज मैदान में महापड़ाव हुआ, जहां हजारों लोग जुटे। बाजार बंद रहे, स्कूलों में आधे दिन की छुट्टी दी गई। शाम को प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट के पास बिश्नोई धर्मशाला पहुंचे और मंगलवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। संत सच्चिदानंद ने कहा कि राजस्थान और अन्य क्षेत्रों से पुरुष-महिलाएं शामिल हो रही हैं। मुख्य मांग है कि ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लागू होने तक एक भी पेड़ नहीं कटना चाहिए।
Khejri Bachao Andolan: धर्मशाला में चुनौतियां
भीड़ इतनी ज्यादा थी कि बिश्नोई धर्मशाला अपर्याप्त साबित हुई। कई प्रदर्शनकारियों को टेंट में रात गुजारनी पड़ी, जबकि कुछ पूरी रात जागते रहे। आंदोलन में महिलाओं की बड़ी भागीदारी ने इसे और मजबूती दी।
Khejri Bachao Andolan: पर्यावरण और आस्था का संघर्ष
खेजड़ी सिर्फ पेड़ नहीं, बल्कि मरुधरा की जीवनरेखा है। यह पशुपालकों, किसानों और पर्यावरण के लिए अहम है। सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए कटाई को “विकास के नाम पर विनाश” कहा जा रहा है। 1730 के खेजड़ली बलिदान की याद ताजा करते हुए लोग कह रहे हैं कि इतिहास दोहराया जाएगा।
Khejri Bachao Andolan: सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने पहले ही हरे वृक्षों की कटाई पर सख्त कानून लाने का आश्वासन दिया है। बजट सत्र में विधेयक पेश करने की तैयारी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि अब समय कम है, तुरंत कार्रवाई जरूरी।
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