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Sunday, November 1, 2026
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जैसलमेर में डायनासोर युग के अवशेष: खुदाई में निकले जीवाश्म को लेकर वैज्ञानिक जांच में जुटे

Dinosaur Era Fossils: जैसलमेर के मेघा गाँव में मिले जीवाश्म जैसे अवशेषों से डायनासोर युग की अटकलें तेज हो गई हैं। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) इस स्थल की जांच करेगा, जो इस क्षेत्र में इस तरह की पाँचवीं खोज है।

Dinosaur Era Fossils: राजस्थान के जैसलमेर जिले के फतेहगढ़ उपखंड में मेघा गांव के पास एक तालाब की खुदाई के दौरान वैज्ञानिकों को डायनासोर युग से जुड़े संभावित जीवाश्म मिले हैं। इन अवशेषों में एक बड़ा कंकाल जैसा ढांचा और पथरीली लकड़ी जैसे टुकड़े शामिल हैं, जो इस खोज को खास बनाते हैं। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) की टीम अब इन अवशेषों की वैज्ञानिक जांच करेगी ताकि उनकी आयु और प्रकार की पुष्टि हो सके। इस खोज ने स्थानीय लोगों और वैज्ञानिक समुदाय में उत्साह पैदा कर दिया है।

Dinosaur Era Fossils: खुदाई में मिले हड्डी जैसे ढांचे

मेघा गांव में तालाब की सफाई और खुदाई के दौरान स्थानीय लोगों को पत्थरों में धंसे हुए असामान्य ढांचे दिखाई दिए। इनमें से कुछ टुकड़े जीवाश्म लकड़ी जैसे प्रतीत होते हैं, जबकि एक बड़ा ढांचा हड्डियों जैसा दिखता है, जिसे डायनासोर का कंकाल माना जा रहा है। पुरातत्वविद् पार्थ जगानी के अनुसार, इन संरचनाओं का संयोजन यह संकेत देता है कि ये अवशेष लाखों साल पुराने हो सकते हैं, संभवतः जुरासिक काल (लगभग 180 मिलियन वर्ष पुराना) से संबंधित। हालांकि, उन्होंने वैज्ञानिक परीक्षणों के बिना निष्कर्ष निकालने से बचने की सलाह दी है।

Dinosaur Era Fossils: जीएसआई की जांच शुरू

फतेहगढ़ के उपखंड अधिकारी (एसडीएम) भरतराज गुर्जर और तहसीलदार ने बुधवार को घटनास्थल का दौरा कर अवशेषों का निरीक्षण किया। गुर्जर ने बताया, हमें सूचना मिली कि मेघा गांव में हड्डी जैसा ढांचा मिला है। हमने क्षेत्र को सुरक्षित कर लिया है और जीएसआई को सूचित किया गया है। उनकी टीम अगले सप्ताह जांच के लिए पहुंचेगी। जीएसआई की वैज्ञानिक जांच, जिसमें कार्बन डेटिंग जैसे तरीके शामिल होंगे, यह स्पष्ट करेगी कि ये अवशेष वास्तव में डायनासोर युग के हैं या नहीं।

Dinosaur Era Fossils: क्या हैं ये अवशेष?

विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी राजस्थान में जीवाश्म लकड़ी मिलना असामान्य नहीं है, लेकिन हड्डी जैसे ढांचे इस खोज को अनूठा बनाते हैं। जैसलमेर के सरकारी कॉलेज में जूलॉजी के प्रोफेसर श्याम सुंदर मीणा ने चेतावनी दी कि ये अवशेष सतह पर मिले हैं, न कि गहरी खुदाई से। इसलिए, ये केवल 50 से 100 साल पुराने भी हो सकते हैं। उन्होंने कहा, केवल कार्बन डेटिंग और अन्य वैज्ञानिक विश्लेषण ही इनकी सही आयु बता सकते हैं। दूसरी ओर, भूवैज्ञानिक नारायण दास इंखिया ने कहा कि ये अवशेष मध्यम आकार के डायनासोर के हो सकते हैं, जिनमें पंख जैसे ढांचे भी दिखाई दे रहे हैं।

जैसलमेर का जीवाश्म इतिहास

जैसलमेर और आसपास के क्षेत्र, जैसे बाड़मेर और गुजरात का कच्छ, पहले भी डायनासोर युग के जीवाश्म और पैरों के निशान देने के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। 2018 में जीएसआई और आईआईटी रुड़की ने इस क्षेत्र में व्यवस्थित खुदाई शुरू की थी, जिसके परिणामस्वरूप 167 मिलियन वर्ष पुराने डायनासोर ‘थारोसॉरस इंडिकस’ की खोज हुई थी। 2023 में जैसलमेर में डायनासोर का एक अंडा भी मिला था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नवीनतम खोज प्रमाणित होती है, तो यह राजस्थान को जीवाश्म विज्ञान अनुसंधान के लिए और महत्वपूर्ण बनाएगी।

सोशल मीडिया पर उत्साह

खोज की खबर फैलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल पर जमा हो गए और अवशेषों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। स्थानीय निवासी श्याम सिंह ने बताया कि उन्होंने कंकाल जैसी संरचना और पत्थरों पर निशान देखे, जिसके बाद उन्होंने प्रशासन और पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को सूचित किया। इस खोज ने इलाके के प्रागैतिहासिक अतीत को उजागर करने की संभावना को बढ़ा दिया है।

पर्यटन की संभावनाएं

भूवैज्ञानिक नारायण दास इंखिया ने कहा, यह खोज न केवल जीवाश्म विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि जैसलमेर के पर्यटन को भी बढ़ावा दे सकती है। जैसलमेर, जो पहले से ही अपने किलों और रेगिस्तानी परिदृश्य के लिए प्रसिद्ध है, अब विज्ञान और इतिहास प्रेमियों के लिए एक नया आकर्षण बन सकता है।

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