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Thursday, July 16, 2026
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Bhajanlal Sharma: गहलोत राज में बने 9 जिले और 3 संभाग होंगे खत्म, भजनलाल सरकार का बड़ा फैसला

Bhajanlal Sharma: भजनलाल सरकार ने शनिवार को हुई कैबिनेट में पूर्ववर्ती सरकार के फैसले को बदल दिया है। 9 जिलों और 3 संभागों वाला पुराना फैसला रद्द कर दिया है।

Bhajanlal Sharma: राजस्थान सरकार द्वारा शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक में पूर्ववर्ती सरकार के कई फैसलों को बदलने और संशोधन करने का निर्णय लिया गया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण निर्णय समान पात्रता परीक्षा (CET) के स्कोर कार्ड में बदलाव और राजस्थान अधीनस्थ एवं लिपिक सेवा नियम 2022 में संशोधन से संबंधित है। पहला बड़ा निर्णय यह है कि पहले के 9 जिलों और 3 संभागों वाले फैसले को निरस्त कर दिया गया है।

सीईटी स्कोर को बढ़ाकर किया तीन साल

इसके साथ ही सीईटी स्कोर को 1 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष किया गया है, जो अभ्यर्थियों को भविष्य में अधिक अवसर देगा। कर्मचारी चयन बोर्ड के इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है, और इससे राज्य में विभिन्न सरकारी पदों के लिए चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।

हजारों सरकारी नौकरी के अभ्यर्थियों को होगा फायदा

इसके अलावा, राजस्थान अधीनस्थ एवं लिपिक सेवा नियम 2022 में भी संशोधन किया गया है, जिसे चयन बोर्ड ने सरकार को भेजा था। यह बदलाव सरकारी सेवाओं में चयन प्रक्रिया को और अधिक सुव्यवस्थित और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से किया गया है। राजस्थान सरकार के इस फैसले से हजारों सरकारी नौकरी के अभ्यर्थियों को फायदा होगा, क्योंकि इससे चयन प्रक्रिया को और अधिक स्पष्ट और अवसरवादी बनाया जा सकेगा।

गहलोत सरकार के बनाए नए जिलें रद्द

गहलोत सरकार द्वारा बनाए गए 9 नए जिलों को भजनलाल सरकार ने रद्द कर दिया है। ये जिलें दूदू, केकड़ी, जोधपुर ग्रामीण, शाहपुरा, नीमकाथाना, अनूपगढ़, गंगापुर सिटी, जयपुर ग्रामीण और सांचौर थे। इन फैसलों के साथ राजस्थान में अब कुल 41 जिले होंगे, जो पहले के 50 जिलों से कम हैं। यह प्रशासनिक ढांचे में बदलाव और संसाधनों के बेहतर वितरण के उद्देश्य से किया गया है।

9 जिले समाप्त:

  • दूदू
  • केकड़ी
  • शाहपुरा
  • नीमकाथाना
  • गंगापुरसिटी
  • जयपुर ग्रामीण
  • जोधपुर ग्रामीण
  • अनूपगढ़
  • सांचौर

ये जिले रहेंगे:

  • डीग
  • बालोतरा
  • खैरथल-तिजारा
  • ब्यावर
  • कोटपूतली-बहरोड़
  • डीडवाना-कुचामन,
  • फलोदी और संलूबर

संभागों का को किया गया रद्द

कैबिनेट बैठक में सीकर, पाली और बांसवाड़ा संभागों को भी रद्द करने का निर्णय लिया गया है। इसके बाद राजस्थान में कुल 7 संभाग ही बचेंगे। यह कदम राज्य के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक समेकित और सरल बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

जनघोषणा पत्र और बजट की क्रियान्विति

जोगाराम पटेल और सुमित गोदारा ने प्रेस वार्ता में बताया कि भजनलाल सरकार ने जनघोषणा पत्र के 50% से अधिक कार्यों को पूरा किया है। इसके साथ ही बजट घोषणाओं की भी सफल क्रियान्विति की गई है।

राइजिंग राजस्थान कार्यक्रम की सफलता

भजनलाल सरकार ने “राइजिंग राजस्थान” कार्यक्रम को भी सफल बताया, जो राज्य के विकास को प्रोत्साहित करने और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनता को लाभ पहुंचाने के लिए चलाया गया था।

जानिए क्यों रद्द किए जिले

मंत्री जोगाराम पटेल ने जिलों को रद्द करने के निर्णय पर विस्तार से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कदम राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को सुधारने और वित्तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। उनके अनुसार, ये नए जिले और संभाग चुनाव से पहले बनाए गए थे, लेकिन वे व्यवहारिक दृष्टिकोण से प्रभावी नहीं थे।

वित्तीय संसाधनों का आभाव

मंत्री पटेल ने बताया कि इन नए जिलों और संभागों को बनाने के निर्णय में वित्तीय संसाधनों और जनसंख्या की वास्तविकताओं को ध्यान में नहीं रखा गया था। इसके परिणामस्वरूप इन जिलों में आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाओं और सुविधाओं की कमी रही।

कम तहसीलें और आधारभूत ढांचा

कई नए जिलों में तो 6-7 तहसीलें तक नहीं थीं, और इन जिलों को संचालन के लिए पर्याप्त आधारभूत ढांचा नहीं था। मंत्री ने कहा कि यदि इन जिलों की आवश्यकता होती तो उनका गहन परीक्षण किया जाता, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन जिलों को वास्तविक रूप से संचालन और प्रशासन की जरूरत है या नहीं।

पद सृजन और प्रशासनिक सुविधाओं की कमी

इन जिलों में पद सृजन और कार्यालय भवनों की व्यवस्था की गई थी, लेकिन अन्य आवश्यक प्रशासनिक सुविधाओं का ध्यान नहीं रखा गया। केवल 18 विभागों में ही पद सृजित किए गए थे, जबकि अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं नहीं की गई थीं।

राजस्थान पर अनावश्यक भार

जोगाराम पटेल ने यह भी कहा कि इन जिलों का अस्तित्व राज्य पर अनावश्यक भार डाल रहा था। रीव्यू कमेटी ने भी यह पाया था कि इन जिलों की उपयोगिता नहीं थी और इनके अस्तित्व से राज्य के संसाधनों का सही उपयोग नहीं हो पा रहा था।

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