Rajasthan Politics: राजस्थान की अंता विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद भाजपा प्रत्याशी रहे मोरपाल सुमन की वायरल चिट्ठी ने पार्टी में हलचल मचा दी है। पार्टी ने अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह घटना भाजपा की आंतरिक कलह को उजागर करती है, जहां हार के दो महीने बाद भी आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
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Rajasthan Politics: उपचुनाव में हार और वायरल चिट्ठी
नवंबर 2025 में हुए अंता विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया ने भाजपा के मोरपाल सुमन को 15,612 वोटों से हराया था। प्रमोद जैन ने 69,571 वोट हासिल किए, जबकि सुमन को 53,959 वोट मिले। स्वतंत्र प्रत्याशी नरेश मीणा तीसरे स्थान पर रहे, जिन्हें 53,800 वोट मिले। यह उपचुनाव भाजपा विधायक कंवरलाल मीणा की अयोग्यता के बाद हुआ था।
हार के दो महीने बाद, जनवरी 2026 के अंत में मोरपाल सुमन की एक चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इस पत्र में सुमन ने भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं पर “आंतरिक साजिश” का आरोप लगाया। उन्होंने लोकसभा स्पीकर और कोटा सांसद ओम बिरला, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, पूर्व जिला अध्यक्ष आनंद गर्ग, अन्य विधायकों और पदाधिकारियों पर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में काम करने का दावा किया।
Rajasthan Politics: आरोपों की मुख्य बातें – टिकट में देरी और संगठनात्मक कमजोरी
सुमन ने चिट्ठी में लिखा कि पार्टी टिकट की घोषणा में अनावश्यक देरी हुई, जिससे कार्यकर्ताओं में भ्रम फैला और संगठनात्मक समन्वय कमजोर हुआ। उन्होंने दावा किया कि कुछ प्रभावशाली नेता कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन के पक्ष में सक्रिय रहे। सुमन ने चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और कांग्रेस तथा स्वतंत्र प्रत्याशियों द्वारा संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया, लेकिन कोई कार्रवाई न होने की शिकायत की।
Rajasthan Politics: पार्टी अध्यक्ष मदन राठौड़ का सख्त रुख
सोमवार को राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने मोरपाल सुमन को शो-कॉज नोटिस जारी किया। नोटिस में कहा गया है कि पार्टी को जानकारी मिली है कि सुमन ने 2025 अंता उपचुनाव में हार के संबंध में कई जिम्मेदार पदाधिकारियों और वरिष्ठ सदस्यों पर बेबुनियाद, असत्यापित आरोप लगाए और उन्हें सार्वजनिक किया।
नोटिस में स्पष्ट किया गया कि पार्टी सदस्यों के लिए आंतरिक मंच उपलब्ध हैं, जहां वे अपनी शिकायतें मौखिक या लिखित रूप से व्यक्त कर सकते हैं, लेकिन सुमन ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाकर पार्टी अनुशासन का उल्लंघन किया और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया।
Rajasthan Politics: तीन दिन में लिखित जवाब की मांग
नोटिस में सुमन से तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है। यदि वे कोई जवाब नहीं देते, तो इसे उनके पास कोई सफाई न होने के रूप में माना जाएगा। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सुमन के जवाब की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, जिसमें अनुशासनात्मक कदम जैसे निलंबन या अन्य दंड शामिल हो सकते हैं।
Rajasthan Politics: भाजपा में बढ़ती आंतरिक कलह
यह घटना राजस्थान भाजपा में चल रही गुटबाजी और असंतोष को दर्शाती है। अंता उपचुनाव हार के बाद से ही पार्टी में रणनीति, समन्वय और नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं। सुमन के आरोपों ने ओम बिरला जैसे बड़े चेहरे को भी घेर लिया है, जिससे पार्टी उच्च नेतृत्व के लिए चुनौती बनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी सार्वजनिक आलोचना पार्टी की एकजुटता को प्रभावित कर सकती है, खासकर जब 2028 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।
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