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अब कुत्ते के काटने पर सरकार देगी मोटा मुआवजा? सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को लगाई फटकार, खिलाने वालों के लिए बदला नियम

Supreme court: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्यों को भारी फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बच्चों या बुजुर्गों पर कुत्ते के काटने से मौत या चोट लगने पर राज्य सरकारें भारी मुआवजा चुकाने के लिए तैयार रहें।

Supreme court: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और इससे जुड़ी मौतों-चोटों पर अब पूरी तरह सख्त रुख अपना लिया है। कोर्ट ने राज्यों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर कोई बच्चा, बुजुर्ग या कोई भी नागरिक आवारा कुत्ते के हमले में मारा गया या गंभीर रूप से घायल हुआ, तो राज्य सरकार को भारी मुआवजा चुकाना होगा। साथ ही, जो लोग सड़कों, गलियों या सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खिलाते हैं, उन्हें भी इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी।

Supreme court: इतना प्यार है तो घर ले जाओ

13 जनवरी 2026 को तीन जजों की बेंच – जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया – ने इस मामले की सुनवाई की। जस्टिस विक्रम नाथ ने फीडर्स को संबोधित करते हुए तीखी टिप्पणी की: “इतना प्यार है तो घर ले जाओ! उन्हें अपने घर में रखो। क्यों सड़कों पर घूमकर लोगों को काटते और डराते फिरें?”

Supreme court: कुत्ता हमला करे तो जिम्मेदार कौन होगा?

जस्टिस संदीप मेहता ने सवाल उठाया, 9 साल के बच्चे पर कुत्ता हमला करे तो जिम्मेदार कौन होगा? क्या वो संगठन या व्यक्ति नहीं, जो रोजाना उसे खाना खिलाता है?” बेंच ने कहा कि पिछले कई सालों से Animal Birth Control (ABC) Rules, 2001 का पालन नहीं हो रहा है। सिविक बॉडीज और नगर निगम स्टेरलाइजेशन, वैक्सीनेशन और शेल्टर में रखने के अपने दायित्व से मुंह मोड़ रहे हैं।

Supreme court: सड़क हादसों के लिए भी कुत्ते जिम्मेदार

कोर्ट ने यह भी कहा कि आवारा कुत्ते न केवल रेबीज फैलाते हैं, बल्कि सड़क हादसों का कारण भी बनते हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर हमले के कई वीडियो कोर्ट में पेश किए गए, जिनमें कुत्तों के झुंड द्वारा हमला करने के दृश्य थे। कोर्ट ने कुछ दलीलों को ‘वास्तविकता से पूरी तरह दूर’ बताते हुए खारिज कर दिया।

Supreme court: जारी किए महत्वपूर्ण निर्देश

यह मामला जुलाई 2024 में स्वत: संज्ञान पर शुरू हुआ था, जब दिल्ली और अन्य शहरों में बच्चों पर रेबीज के हमलों की खबरें लगातार आ रही थीं। नवंबर 2025 में कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे:

  • स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, पार्क, बाजार जैसे संस्थागत और भीड़-भाड़ वाले इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर में रखा जाए।
  • कुत्तों का स्टेरलाइजेशन और एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन अनिवार्य।
  • इलाज के बाद इन्हें मूल जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा।
  • हाईवे और प्रमुख सड़कों से मवेशी और अन्य आवारा जानवर हटाए जाएं।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश सभी आवारा कुत्तों को हटाने का नहीं है, बल्कि ABC नियमों के सख्त पालन का है। लेकिन लापरवाही के कारण मौतें और चोटें बढ़ रही हैं। फीडर्स के लिए सख्त संदेश: अगर आप कुत्तों से इतना लगाव रखते हैं, तो उन्हें अपने घर में रखें या किसी शेल्टर में ट्रांसफर करवाएं। सड़कों पर खिलाना अब सिर्फ भावनाओं का खेल नहीं रहेगा, बल्कि कानूनी जिम्मेदारी भी बनेगा। कोर्ट ने महिलाओं पर उत्पीड़न के आरोपों को भी संबोधित किया और कहा कि ऐसे मामलों में तुरंत FIR दर्ज की जाए, क्योंकि यह कानून-व्यवस्था का मामला है।

एनिमल राइट्स और पब्लिक सेफ्टी के बीच विवाद

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला एनिमल राइट्स और पब्लिक सेफ्टी के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद में संतुलन बनाने की कोशिश है। कई एनजीओ और एनिमल वेलफेयर एक्टिविस्ट्स ने फैसले का विरोध किया है, लेकिन आम नागरिकों, खासकर बच्चों के माता-पिता ने इसे राहत की बात माना है।

20 जनवरी को अगली सुनवाई

राज्यों को अब जल्द से जल्द ABC नियमों को लागू करना होगा। अगली सुनवाई 20 जनवरी 2026 को होगी, जहां राज्यों से स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है। अगर पालन नहीं हुआ, तो मुआवजे के अलावा कोर्ट कॉन्टेम्प्ट ऑफ कोर्ट तक की कार्रवाई कर सकती है।

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