Railway New Ticket Booking System: भारतीय रेल अत्याधुनिक तकनीक क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई के ट्रैक पर तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी के तहत रेलवे अपने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम को अगली पीढ़ी का बनाने जा रही है। इससे व्यस्त सीजन में रेलवे की वेबसाइट और ऐप धीमे नहीं होंगे। ऐसे में तत्काल टिकट सुपरफास्ट गति से बुक होंगे। नई तकनीक से यात्रियों को वेटिंग टिकट के कंफर्म होने के चांस के बारे में बुकिंग के समय पता चल जाएगा। यात्रियों को यह सुविधा आगामी अगस्त यानी त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले मिलने लगेगी।
रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नया सिस्टम भारतीय रेल के इतिहास का सबसे बड़ा डिजिटल बदलाव है। रेलवे के मिशन अगस्त में चुटकियों में टिकटों की बुकिंग होगी और आम यात्रियों के बीच तत्काल टिकटों के खत्म होने का तनाव गायब होगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उन्नत पीआरएस को अगस्त के पहले हफ्ते तक पूरा करने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग व एआई तकनीक यात्रियों के टिकट बुकिंग अनुभव को वेबसाइट के हैंग और अन्य बाधा वाले दौर से बाहर निकालकर हाईस्पीड के युग में ले जाएगी। रेलवे का प्रति मिनट टिकट बुक करने की क्षमता अभी 25 हजार है। इसे बढ़ाकर पांच लाख प्रति मिनट से अधिक करने का लक्ष्य है। नई तकनीक से सर्वर क्रैश का डर भी खत्म हो जाएगा।
दलालों पर अंकुश लगेगा
अधिकारी ने बताया कि दलालों के बॉट सॉफ्टवेयर को ब्लॉक करने के लिए एडवांस्ड एआई का इस्तेमाल होगा, जिससे कि असली यात्रियों को ही टिकट मिले। ऐप पर लॉगिन से लेकर पेमेंट तक की प्रक्रिया इतनी तेज होगी कि तत्काल बुकिंग चुटकियों में पूरी हो जाएगी।
तत्काल रिफंड भी
वर्तमान में यात्री के अकाउंट से रुपये कट जाते हैं, लेकिन टिकट बुक नहीं हो पाता। रेलवे का जीरो-फेल मिशन इसे ठीक करेगा। स्मार्ट पेमेंट गेटवे को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह पेमेंट फेल होने की दर को न्यूनतम स्तर पर ले आएगा। अगर राशि का ट्रांजेक्शन पूरा नहीं होता, तो रिफंड के लिए कई दिनों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
दो करोड़ यूजर्स को एक साथ संभालेंगे
रेलवे के वर्तमान सिस्टम पर जब एक साथ 10 लाख से अधिक यूजर्स लॉगिन करते हैं, तो सर्वर का रिस्पॉन्स टाइम 40-60 फीसदी तक गिर जाता है। क्लाउड-आधारित नया सिस्टम एक साथ दो करोड़ तक सक्रिय यूजर्स को संभालने में सक्षम होगा। तत्काल विंडो के शुरुआती दो मिनट में ट्रांजेक्शन लोड से 30 से 40 प्रतिशत तक पेमेंट फेलियर हो जाते हैं। नई तकनीक से इसकी सफलता दर 99.9 प्रतिशत तक पहुंचने का लक्ष्य है।
सीट नहीं मिलने पर दूसरी ट्रेन का विकल्प
नए सिस्टम का सबसे शानदार फीचर इसका एआई आधारित आकलन मॉडल है। यात्री जैसे ही वेटिंग टिकट चुनेगा, सिस्टम बुकिंग पेज पर ही बता देगा कि इसके कंफर्म होने की कितनी संभावना है। यदि यात्री की पसंदीदा ट्रेन में जगह नहीं है, तो सिस्टम दूसरी ट्रेन का सुझाव भी देगा, जहां सीट खाली है या टिकट कंफर्म होने के चांस 100 फीसदी हैं।
