35.1 C
New Delhi
Tuesday, June 2, 2026
HomeदेशISRO MIssion Gaganyan: गगनयान मिशन को बड़ी सफलता, दूसरा एयर ड्रॉप टेस्ट...

ISRO MIssion Gaganyan: गगनयान मिशन को बड़ी सफलता, दूसरा एयर ड्रॉप टेस्ट सफल, अंतरिक्ष की ओर भारत की मजबूत छलांग

ISRO MIssion Gaganyan: अंतरिक्ष में जाना देखने और सुनने में जितना रोमांचक लगता है, वहां से सुरक्षित वापसी उतनी ही मुश्किलों से भरी है. कोई भी मानव अंतरिक्ष मिशन जब अंतरिक्ष से सुरक्षित वापसी कर लेता है तब वह अपनी परीक्षा में पास नहीं माना जाता. इसी वजह से भारत अपने महत्वाकांक्षी मिशन गगनयान के हर परीक्षण पर गंभीरता से नजर बनाए हुए है. अंतरिक्ष में भारत को बड़ी सफता हासिल हुई है. ISRO ने दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट कर लिया है. यह इस बात का संकेत है कि कल्पना चावला की तरह भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों की स्पेस से सुरक्षित वापसी होना महज सपना नहीं रह जाएगा. इसे बड़ी तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है.

डॉ. जितेंद्र सिंह ने ISRO को दी बधाई

ISRO को यह सफलता एक या दो दिन में नहीं मिली है, इसके लिए वह महीनों से तैयारी में जुटा हुआ था. इस उपलब्धि के लिए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसरो को बधाई दी है. उन्होंने गगनयान मिशन के लिए इसे महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है. भारत भी जल्द उन देशों में शुमार होने जा रहा है. जो मानव को स्पेस में भेजने और वहां से सुरक्षित वापस लाने में सक्षम हैं. टेस्ट की हर सफलता देश की तकनीकी ताकत और आत्मनिर्भरता को मजबूत बनाती है.

इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट सफल 

इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) आंध्र प्रदेश के  श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष स्टेशन पर हुआ. टेस्ट के दौरान एक डमी क्रू मॉड्यूल को ऊंचाई से गिराया गया. इस दौरान पैराशूट सिस्टम सही समय पर खुल गया. दरअसल जब कोई अंतिरिक्ष यान स्पेस से पृथ्वी की ओर लौटता है तो उसकी स्पीड बहुत तेज होती है. तब पैराशूट ही उसकी स्पीड को कंट्रोल करता है, जिसकी वजह से सुरक्षित लैंडिंग संभव हो पाती है. इसरो के इस टेस्ट की सफलता से यह साबित हो गया है कि पूरा सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा है.

गगनयान मिशन पर ISRO चीफ का बयान

इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने बुधवार को कहा कि भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान से पहले तीन मानवरहित (अनक्रूड) मिशन भेजे जाएंगे. क्रूड मिशन से पहले तीन अनक्रूड मिशन निर्धारित किए गए हैं. फिलहाल हम पहले मानवरहित मिशन पर काम कर रहे हैं और सभी गतिविधियां सुचारु रूप से चल रही हैं. उन्होंने यह भी बताया कि मिशनों की समय-सीमा और अन्य जानकारियां उचित समय पर साझा की जाएंगी.

मंगल ऑर्बिटर मिशन का जिक्र

इसरो प्रमुख ने कहा कि किसी भी अंतरिक्ष मिशन में यह बेहद अहम भूमिका निभाता है. लॉन्च व्हीकल केवल 20-25 मिनट तक काम करता है, जबकि मिशन ऑपरेशन लंबे समय तक जारी रहता है. उदाहरण के तौर पर, 15 साल तक काम करने वाले संचार उपग्रहों के लिए लगातार ऑपरेशन जरूरी होता है. नारायणन ने मंगल ऑर्बिटर मिशन का जिक्र करते हुए कहा कि इस मिशन में करीब 300 दिनों तक ऑपरेशन चलाना पड़ा था, तब जाकर यह सफल हो सका था.

RELATED ARTICLES
New Delhi
haze
35.1 ° C
35.1 °
35.1 °
41 %
4.1kmh
40 %
Tue
37 °
Wed
43 °
Thu
43 °
Fri
43 °
Sat
42 °

Most Popular