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निजामुद्दीन में हुमायूं के मकबरे के पास दरगाह की छत ढही: छह की मौत, कई घायल

Humayun Tomb: दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित हुमायूं के मकबरे के पास बड़ी दुर्घटना हो गई। इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए।

Humayun Tomb: दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में एक दुखद हादसा हुआ, जब हुमायूं के मकबरे के निकट दरगाह शरीफ पत्ते शाह से सटी एक इमारत की छत ढह गई। इस घटना में तीन महिलाओं समेत छह लोगों की मौत हो गई। वहीं, चार अन्य घायल हुए। भारी बारिश के कारण कमजोर हुई संरचना के ढहने से यह हादसा हुआ, जिसने स्वतंत्रता दिवस के उत्सव को मातम में बदल दिया।

Humayun Tomb: भारी बारिश बनी कारण

दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के अनुसार, दोपहर करीब 3:55 बजे सूचना मिली कि निजामुद्दीन पूर्व में दरगाह शरीफ पत्ते शाह के दो कमरों वाली एक मंजिला इमारत की छत और पिछली दीवार ढह गई। यह दरगाह हुमायूं के मकबरे की बाहरी दीवार से सटी हुई है। डीएफएस के एक अधिकारी ने बताया कि भारी बारिश के कारण इमारत की संरचना कमजोर हो गई थी, जिसके चलते छत और दीवार अचानक ढह गई। घटनास्थल पर तुरंत चार दमकल गाड़ियों के साथ 25 दमकलकर्मी भेजे गए।

Humayun Tomb: एनडीआरएफ और पुलिस का त्वरित प्रयास

हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की टीमें मौके पर पहुंचीं। डीएम सरवन कुमार ने बताया कि मलबे में करीब 10-12 लोग फंसे थे, जिनमें से 11 को निकाला गया। नौ लोगों को एम्स ट्रॉमा सेंटर और एक को आरएमएल अस्पताल भेजा गया। बचाव कार्य देर रात तक जारी रहा, जिसमें स्थानीय लोग और दरगाह के कर्मचारी भी शामिल हुए।

Humayun Tomb: इस प्रकार हुई पीड़ितों की पहचान

मृतकों में जंगपुरा की 56 वर्षीय अनीता सैनी और जाकिर नगर के 32 वर्षीय मोइन उद्दीन शामिल हैं। अनीता के बेटे शिवांश सैनी ने बताया कि उन्हें एक फोन कॉल से मां के घायल होने की खबर मिली, लेकिन एम्स पहुंचने पर उनकी मृत्यु की पुष्टि हुई। मोइन, जो अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला था, शुक्रवार की नमाज के लिए दरगाह गया था। उसका पांच साल का बेटा और तीन साल की बेटी अब अनाथ हो गए। अन्य मृतकों में 79 वर्षीय स्वरूप चंद और 24 वर्षीय मोनू शाह अरोड़ा शामिल हैं।

दरगाह की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पत्ते शाह दरगाह, जिसे स्थानीय लोग ‘पत्ते वाले बाबा’ की दरगाह के नाम से जानते हैं, सौ साल से अधिक पुरानी है। इतिहासकार सोहेल हाशमी के अनुसार, यह दरगाह सूफी संत हजरत निजामुद्दीन औलिया से जुड़ी है, हालांकि ढही हुई संरचना 60-80 साल पुरानी थी। यह हुमायूं के मकबरे के संरक्षित क्षेत्र से बाहर है, जैसा कि पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने स्पष्ट किया। एएसआई ने पुष्टि की कि यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हुमायूं का मकबरा पूरी तरह सुरक्षित है।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया और जांच

दिल्ली पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है और दरगाह के रखवालों से पूछताछ की जा रही है। डीसीपी (दक्षिण-पूर्व) हेमंत तिवारी ने बताया कि संरचना की मरम्मत की जरूरत और निरीक्षण की स्थिति की जांच की जाएगी। स्थानीय लोगों ने दमकल सेवाओं की देरी का आरोप लगाया, लेकिन डीएफएस के अधिकारी मुकेश वर्मा ने कहा कि उनकी टीम 30 मिनट में पहुंची, हालांकि मलबे को हाथ से हटाना पड़ा।

आम लोगों में दहशत, परिवारों का दर्द

हादसे ने निजामुद्दीन और आसपास के इलाकों में दहशत फैला दी। प्रत्यक्षदर्शी गीता कुमार ने बताया कि वह दरगाह में ताबीज लेने गई थीं जब छत ढही। “सब कुछ सेकंडों में हुआ, चारों तरफ चीखें थीं,” उन्होंने कहा। पीड़ितों के परिवार अस्पतालों के बाहर अपने प्रियजनों की खबर का इंतजार करते रहे।

सुरक्षा पर सवाल

इस हादसे ने पुरानी इमारतों की सुरक्षा और रखरखाव पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारी बारिश और अपर्याप्त रखरखाव इस तरह के हादसों का कारण बन सकते हैं। प्रशासन ने क्षेत्र को सील कर दिया है और बचाव कार्यों के बाद मलबा हटाने का काम जारी है। यह घटना दिल्ली में बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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