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Tuesday, July 28, 2026
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Citizenship Proof: आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट भी नहीं हैं नागरिकता का सबूत! जानें आखिर क्या है वैध प्रमाण

Citizenship Proof: पासपोर्ट सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद यह नागरिकता साबित करने का पुख्ता दस्तावेज़ नहीं है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर यह स्पष्टीकरण देकर एक नई बहस छेड़ दी है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस बात को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर भारत में नागरिकता का अंतिम और अकाट्य प्रमाण क्या है।

पासपोर्ट केवल एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट

विदेश मंत्रालय के अनुसार, पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज़ है, जिसे सरकार अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाने के लिए जारी करती है। इसका सीधा मतलब यह है कि किसी के पास पासपोर्ट होने मात्र से उसकी नागरिकता स्वतः सिद्ध नहीं हो जाती।

यह स्थिति अपने आप में एक विरोधाभास पैदा करती है, क्योंकि कोई भी गैर-नागरिक भारतीय पासपोर्ट हासिल नहीं कर सकता। इसके अलावा, पासपोर्ट आपके पास होने का मतलब यह नहीं है कि आप उसके मालिक हैं। पासपोर्ट के पिछले हिस्से पर स्पष्ट लिखा होता है कि यह “भारत सरकार की संपत्ति” है और सरकार के आदेश देने पर इसे कभी भी सरेंडर करना पड़ सकता है।

आधार और वोटर आईडी भी नागरिकता के सबूत नहीं

नागरिकता के प्रमाण को लेकर यह भ्रम नया नहीं है। इससे पहले देश की अन्य प्रमुख पहचानों को लेकर भी अदालतें और सरकार स्थिति साफ कर चुकी हैं। इस साल की शुरुआत में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि आधार नागरिकता का पक्का सबूत नहीं है। यह सिर्फ़ पहचान का एक दस्तावेज़ है। वोटर आईडी को भी नागरिकता का अंतिम दस्तावेज़ नहीं माना जाता। इसका मुख्य उद्देश्य नागरिक की पहचान सुनिश्चित करना और उसे चुनावों में मतदान का अधिकार देना है।

कानून के अनुसार कौन है भारत का नागरिक?

  1. 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच देश में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति जन्म से भारतीय है।
  2. 1 जुलाई 1987 के बाद जन्मे व्यक्ति को नागरिकता तभी मिलेगी, जब उसके माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक हो।
  3. 3 दिसंबर 2004 या उसके बाद जन्मे व्यक्ति को नागरिकता मिलने की शर्त और कठिन है। इसके लिए या तो माता-पिता दोनों भारतीय होने चाहिए, या फिर कोई एक भारतीय हो और दूसरा अवैध अप्रवासी न हो।

सरकार ने जारी किए आंकड़े

बुधवार को विदेश मंत्रालय ने भारत के पासपोर्ट सर्विस नेटवर्क के विस्तार और कई अहम उपलब्धियों का ज़िक्र किया, जिसमें चिप-इनेबल्ड ई-पासपोर्ट की सफल शुरुआत भी शामिल है। MEA के एक अधिकारी ने बताया, “साल 2025 में 1.5 करोड़ पासपोर्ट और उससे जुड़ी सेवाएं दी गईं, जिनमें से अकेले पासपोर्ट की संख्या 1.39 करोड़ थी।”

इसके अलावा, MEA ने बताया कि पासपोर्ट बनने में लगने वाले औसत समय में भी सुधार हुआ है; पुलिस वेरिफिकेशन में लगने वाले समय को छोड़कर, पासपोर्ट अब छह कामकाजी दिनों के भीतर मिल जाते हैं। अधिकारी ने कहा कि अब नागरिकों को पासपोर्ट सेवा केंद्रों पर औसतन 45 मिनट से भी कम समय बिताना पड़ता है। MEA अधिकारी के मुताबिक, प्रोसेसिंग में कम समय लगने की वजह पासपोर्ट सर्विस सेंटरों की संख्या में छह गुना बढ़ोतरी है। एक दशक पहले देश में सिर्फ़ 77 पासपोर्ट केंद्र थे, जबकि अभी इनकी संख्या 545 है।

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