केंद्रीय बजट 2026 में आयकर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कर प्रणाली में सुधार और सुविधा आधारित उपायों पर जोर देकर करदाताओं और निवेशकों के लिए भरोसे का संदेश दिया। यह उनका लगातार 12वां बजट है, जो दर्शाता है कि सरकार अब कर ढांचे में झटकों के बजाय दीर्घकालिक स्थिरता और विश्वास को प्राथमिकता दे रही है।
मध्यम वर्ग लंबे समय से प्रत्यक्ष कर राहत की उम्मीद कर रहा था। हालांकि, इस बार सरकार ने TDS और TCS व्यवस्थाओं में व्यावहारिक सुधार करके करदाताओं को वास्तविक नकदी राहत देने का रास्ता चुना। विदेश शिक्षा, चिकित्सा और यात्रा पर TCS दर को घटाकर 2 प्रतिशत किया गया, जो केवल कर कटौती नहीं, बल्कि परिवारों की वित्तीय योजना में लचीलापन लाने वाला कदम माना जा रहा है।
छोटे करदाताओं के लिए निल या कम TDS प्रमाणपत्र की स्वचालित व्यवस्था लागू की गई है, जिससे कर प्रणाली अधिक मानवीय और सुविधा-उन्मुख बनती है। करदाताओं को अब अनावश्यक कटौती और महीनों तक रिफंड की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी। इसके साथ ही, संशोधित आयकर रिटर्न की समयसीमा बढ़ाना और अपीलों में अग्रिम भुगतान घटाना कर विवादों को कम करने की सरकार की नीति को स्पष्ट करता है।
विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण के लिए एकमुश्त अवसर देना और पूंजी बाजार में शेयर बायबैक पर कर व्यवस्था को पूंजीगत लाभ से जोड़ना निवेशकों के भरोसे को मजबूत करता है। साथ ही, विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाना भारत को दीर्घकालिक पूंजी के लिए आकर्षक बनाता है।
मुख्य सुधार और बिंदु:
Securities Transaction Tax (STT):
फ्यूचर्स पर STT बढ़ाकर 0.05% (पहले 0.02%)
ऑप्शन्स प्रीमियम और एक्सरसाइज पर STT बढ़ाकर 0.15% (पहले 0.1% और 0.125%)
कॉर्पोरेट टैक्स और MAT:
पुराने MAT क्रेडिट का सेट-ऑफ केवल नए रेज़ीम में किया जा सकेगा
MAT को 1 अप्रैल 2026 से अंतिम कर बनाया गया; दर घटाकर 15% → 14%
31 मार्च 2026 तक मौजूद MAT क्रेडिट नियमों के अनुसार उपयोग किया जा सकेगा
हालांकि बढ़ती महंगाई के बीच प्रत्यक्ष कर स्लैब में कोई बदलाव न होना कुछ वर्गों के लिए निराशाजनक हो सकता है, लेकिन सरकार का संदेश स्पष्ट है — स्थिर कर दरें और सरल प्रक्रिया दीर्घकालिक कर अनुपालन सुनिश्चित करती हैं।
नया आयकर अधिनियम 2025, जो अप्रैल 2026 से लागू होगा, सरल भाषा और तकनीक-आधारित अनुपालन के जरिए भारतीय कर प्रणाली में ऐतिहासिक सुधार ला सकता है।
कुल मिलाकर, बजट 2026 तत्काल राहत देने के बजाय भरोसे, सरलता और दीर्घकालिक आर्थिक अनुशासन की दिशा में एक मजबूत कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट करदाताओं और निवेशकों दोनों के लिए विश्वास का वातावरण तैयार करेगा और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को मजबूत करेगा।
अंशुल चितौड़ा , सी ए
कॉर्पोरेट एवं कराधान विशेषज्ञ
