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Tuesday, September 1, 2026
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चार दिन की लड़ाई से बाजार हिले, भारत को आर्थिक नुकसान

West Asia Tensions: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। ईरान से जुड़े संघर्ष और क्षेत्रीय अस्थिरता के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, वहीं डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर हुआ है। इन दोनों कारणों से बीते चार दिनों में भारत पर करीब 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान है।

भारत रोजाना लगभग 50 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में औसतन 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि होती है, तो भारत को प्रतिदिन करीब 50 मिलियन डॉलर अतिरिक्त चुकाने पड़ते हैं। डॉलर का मूल्य 91 रुपये मानें तो यह लगभग 455 करोड़ रुपये रोज का अतिरिक्त खर्च बनता है। इस तरह सिर्फ चार दिनों में तेल की कीमत बढ़ने से करीब 1,820 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ चुका है।

इसके साथ ही रुपये में गिरावट ने भी दबाव बढ़ाया है। भारत का वार्षिक तेल आयात बिल लगभग 160 बिलियन डॉलर है। यदि रुपया डॉलर के मुकाबले 1 रुपये कमजोर होता है, तो सालाना करीब 16,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है। चार दिनों के अनुपात में देखें तो यह लगभग 175 से 180 करोड़ रुपये का प्रभाव डालता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ता है। समुद्री और हवाई मार्गों में अनिश्चितता से कार्गो मूवमेंट प्रभावित हो सकता है। यदि स्थिति लंबी चली, तो महंगाई, आपूर्ति और सरकारी वित्तीय संतुलन पर दबाव और बढ़ सकता है।

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