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Thursday, October 15, 2026
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अब अवैध बोरवेल पर लगेगी लगाम! दिल्ली सरकार जल्द लागू करेगी नई वाटर मीटर पॉलिसी

दिल्ली में अवैध भूजल दोहन पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार नई बोरवेल पॉलिसी (Borewell Policy) लाने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि इस नीति का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत राजधानी में मौजूद सभी घरेलू और व्यावसायिक बोरवेल पर वाटर मीटर (Water Meater) लगाना अनिवार्य किया जाएगा, ताकि भूजल के उपयोग की सटीक निगरानी की जा सके। अधिकारियों के मुताबिक, नई पॉलिसी का उद्देश्य भूजल के अनियंत्रित और अवैध दोहन को रोकना, जल संसाधनों का संरक्षण करना और राजधानी में भूजल प्रबंधन को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाना है। वाटर मीटर लगने से यह पता चल सकेगा कि अलग-अलग क्षेत्रों में कितना भूजल निकाला जा रहा है और उसके आधार पर आवश्यक नियामकीय कदम उठाए जा सकेंगे।

अधिकारियों के अनुसार, इस नीति का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। प्रस्तावित पॉलिसी के तहत सभी घरेलू और व्यावसायिक बोरवेल पर वाटर मीटर लगाना अनिवार्य किया जाएगा, ताकि भूजल के उपयोग की सटीक निगरानी की जा सके। अधिकारियों ने बताया कि नई नीति में वर्तमान में संचालित हजारों अवैध बोरवेल को नियमित (रेगुलर) करने का प्रावधान भी शामिल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य अवैध बोरवेल को कानूनी दायरे में लाकर भूजल के दोहन पर प्रभावी निगरानी और नियंत्रण स्थापित करना है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सभी घरेलू और व्यावसायिक बोरवेल पर वाटर मीटर लगाए जाएंगे और उपभोक्ताओं से जमीन से निकाले गए भूजल की वास्तविक मात्रा के आधार पर शुल्क लिया जाएगा। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि इस नीति का उद्देश्य केवल एक बार अनुमति (वन-टाइम अप्रूवल) देना नहीं, बल्कि बोरवेल की लगातार निगरानी करना और वास्तविक भूजल उपयोग के आधार पर यूजर चार्ज लागू करना है। नई व्यवस्था में प्रत्येक बोरवेल कनेक्शन पर वाटर मीटर लगाया जाएगा, जिससे यह रिकॉर्ड किया जा सके कि किसी उपभोक्ता ने कितना भूजल निकाला है। उसी के आधार पर बिल जारी किया जाएगा।

अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड (CGWB) के पास अवैध बोरवेल के मामलों में पर्यावरण मुआवजा (Environmental Compensation) लगाने के नियम लागू करने का अधिकार है, लेकिन वैध रूप से निकाले जाने वाले भूजल के लिए कोई निर्धारित टैरिफ नहीं है। इसी वजह से दिल्ली सरकार ने भूजल उपयोग शुल्क तय करने के तरीके पर CGWB और पर्यावरण विभाग से सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित नीति में राजधानी में संचालित हजारों अवैध बोरवेल को नियमित (रेगुलर) करने की प्रक्रिया भी शामिल की जाएगी, ताकि उन्हें कानूनी दायरे में लाकर उनके उपयोग की निगरानी की जा सके। सरकार का मानना है कि इससे भूजल दोहन पर नियंत्रण और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी।

पानी के कनेक्शन की जांच के लिए होगा घर-घर सर्वे

दिल्ली में अवैध बोरवेल पर रोक लगाने के लिए सरकार जल्द ही घर-घर सर्वे शुरू करने की तैयारी में है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अधिकांश अवैध बोरवेल घरों के भीतर बने होने के कारण उनकी पहचान करना बेहद मुश्किल है और इनकी संख्या लाखों तक हो सकती है। सरकार पानी के कनेक्शनों की जांच के लिए घर-घर सर्वे कराएगी। साथ ही इस बात पर भी विचार किया जा रहा है कि सर्वे के दौरान प्रत्येक घर से बोरवेल संबंधी जानकारी भी जुटाई जाए, ताकि अवैध बोरवेल की सही पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

वर्तमान नियमों के तहत राजधानी में पूर्व अनुमति के बिना बोरवेल लगाना प्रतिबंधित है। बोरवेल लगाने के लिए आए आवेदनों की जांच दिल्ली जल बोर्ड (DJB), जिला प्रशासन, केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) और अन्य संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों वाली जिला स्तरीय सलाहकार समितियां करती हैं। ये समितियां सामान्यतः केवल उन्हीं क्षेत्रों में बोरवेल की अनुमति देती हैं, जहां भूजल स्तर ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में नहीं है, ताकि भूजल संसाधनों का संरक्षण किया जा सके और जल संकट को बढ़ने से रोका जा सके।

भूजल दोहन की निगरानी के लिए बनेगी नई व्यवस्था

दिल्ली जल बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2010 से मौजूदा बोरवेल अनुमति प्रणाली लागू है। इसके तहत आवेदक केवल एक बार 500 रुपये की प्रोसेसिंग फीस जमा कर अनुमति प्राप्त कर लेते हैं। हालांकि, अनुमति मिलने के बाद इस बात की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है कि संबंधित बोरवेल से कितना भूजल निकाला जा रहा है। अधिकारी के अनुसार, प्रस्तावित नई नीति में इस कमी को दूर करने के लिए पानी के बिल की तरह अनिवार्य जल मीटर लगाने और नियमित उपयोग शुल्क (यूजर चार्ज) लागू करने का प्रस्ताव है। इससे भूजल के उपयोग की निगरानी की जा सकेगी और अत्यधिक दोहन पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि नीति का मसौदा सुझावों और भूजल दोहन के लिए शुल्क तय करने के उद्देश्य से केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अधीन केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) को भेजा गया है। खबर लिखे जाने तक इस विषय पर दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के प्रवक्ता की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली थी।

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