33 C
New Delhi
Sunday, September 13, 2026
Homeदेशचांद पर SpaceX रॉकेट की जोरदार टक्कर, NASA की HD तस्वीरों में...

चांद पर SpaceX रॉकेट की जोरदार टक्कर, NASA की HD तस्वीरों में दिखा 60 फीट का विशाल गड्ढा

चांद पर 5 अगस्त को SpaceX के भारी भरकम रॉकेट के टकराने से बने गड्ढे की अब नई तस्वीरें सामने आई हैं. तस्वीरें भी एकदम HD क्वालिटी कीं. अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर ने इस गड्ढे को अलग-अलग एंगल से अपने कैमरे में कैद किया है. इन तस्वीरों में रॉकेट के टक्कर से चांद की सतह पर पड़े निशान और उसके आसपास फैली हल्की-गहरी धारियां साफ दिखाई दे रही हैं.  ये तस्वीरें लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (LRO) ने 11 और 12 अगस्त को ली थीं. इनमें 5 अगस्त को SpaceX के फाल्कन 9 रॉकेट के ऊपरी हिस्से के चांद की सतह से टकराने के बाद बना गड्ढा साफ दिखाई दे रहा है.

60 फीट चौड़ा गड्ढा

NASA के वैज्ञानिकों ने बताया कि यह गड्ढा करीब 60 फीट यानी 18 मीटर चौड़ा है. इसकी गहराई 10 फीट से भी कम है. वैज्ञानिकों ने यह अनुमान गड्ढे की परछाई की लंबाई के आधार पर लगाया. बता दें कि फाल्कन 9 रॉकेट को जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था. यह फायरफ्लाई एयरोस्पेस के ब्लू घोस्ट-1 लूनर लैंडर को लेकर गया था. यह एक प्राइवेट मिशन था, जिसने चांद पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग की थी.

नासा को इतना वक्त क्यों लगा?

नासा का LRO साल 2009 से काम कर रहा है. यह हर दो घंटे में चांद के एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक चक्कर लगाता है, जबकि चांद उसके नीचे घूमता रहता है. नासा ने बताया कि इस तस्वीर को लेना आसान नहीं था. चांद की किसी खास जगह की तस्वीर लेने के लिए अंतरिक्ष यान को तब तक इंतजार करना पड़ता है, जब तक वह जगह उसके कैमरे की नजर में नहीं आ जाती. इस मामले में इसमें छह दिन लगे. इसके अलावा अंतरिक्ष यान को बिल्कुल सही एंगल पर झुकाना पड़ा, ताकि जब वह चांद की सतह से करीब 60 मील ऊपर से गुजरे, तब उसका कैमरा ठीक गड्ढे की ओर हो. नासा ने बताया कि सही समय भी एक बड़ी चुनौती थी. अगर कैमरा सिर्फ 10 सेकंड पहले या बाद में तस्वीर लेता, तो तस्वीर में गड्ढे की जगह करीब 10 मील दूर दिखाई देती.

अलग-अलग एंगल से ली गई तस्वीरों में गड्ढे के आसपास की अलग-अलग चीजें साफ दिखाई दीं. इनमें गड्ढे के चारों ओर फैली हल्की और गहरी धारियां भी शामिल हैं. नासा ने बताया कि गहरी धारियां सतह की धूल और चट्टानों से बनी हैं. ये चीजें लंबे समय से सौर हवा, आकाशगंगा से आने वाली अंतरिक्ष किरणों और बहुत छोटे उल्कापिंडों के टकराव से बदलती रही हैं. टक्कर के दौरान ये चीजें सतह से करीब 1.5 फीट नीचे से बाहर निकलकर चारों ओर फैल गईं.

RELATED ARTICLES
New Delhi
few clouds
33 ° C
33 °
32.1 °
66 %
5.1kmh
18 %
Sun
35 °
Mon
34 °
Tue
34 °
Wed
37 °
Thu
37 °

Most Popular