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Tuesday, October 20, 2026
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Blue Light Effects On Sleep: नींद का दुश्मन सिर्फ मोबाइल नहीं! लैपटॉप और ऑफिस की सफेद रोशनी भी बिगाड़ रही स्लीप साइकल

Blue Light Effects On Sleep: आजकल बहुत से लोग यह सोचकर सुकून महसूस करते हैं कि उन्होंने फोन का इस्तेमाल कम कर दिया है, इसलिए उनकी नींद और मेंटल हेल्थ बेहतर हो जाएगी. लेकिन असलियत इससे थोड़ी अलग है. आधुनिक ऑफिस लाइफ में स्क्रीन से दूरी बनाना इतना आसान नहीं है, क्योंकि लैपटॉप, मीटिंग्स और तेज रोशनी लगातार दिमाग को एक्टिव बनाए रखते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि मोबाइल के अलावा और क्या है कारण.

ईमेल भी है कारण

सुबह की शुरुआत ईमेल से होती है और दिन भर स्क्रीन के सामने बैठकर काम चलता रहता है. ऊपर से ऑफिस की तेज, सफेद रोशनी भी दिन जैसी ही लगती है. ऐसे में शरीर को यह संकेत ही नहीं मिल पाता कि अब आराम का समय है. नतीजा यह होता है कि रात में नींद हल्की लगती है, दिमाग शांत नहीं होता और सुबह उठना भारी महसूस होता है.

 छिपे हुए स्क्रीन एक्सपोजर

यह समस्या सिर्फ ज्यादा फोन चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि छिपे हुए स्क्रीन एक्सपोजर से जुड़ी है. एक सामान्य ऑफिस जॉब में 6 से 10 घंटे तक स्क्रीन देखना आम बात है. फर्क सिर्फ इतना है कि यह काम का हिस्सा होता है, इसलिए लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन दिमाग के लिए स्क्रीन स्क्रीन ही होती है, चाहे वह काम की हो या मनोरंजन की.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

डॉक्टर बताते हैं कि लोग अक्सर सोचते हैं कि फोन कम इस्तेमाल करने से वे स्क्रीन के नुकसान से बच जाएंगे, जबकि ऑफिस में लैपटॉप और कमरे की रोशनी भी शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित करती है. इससे मेलाटोनिन हार्मोन बनने में रुकावट आती है, जो नींद के लिए बेहद जरूरी है.  जब मेलाटोनिन का स्तर प्रभावित होता है, तो सोने का समय आगे खिसक जाता है. भले ही आप समय पर बिस्तर पर चले जाएं, लेकिन दिमाग ऑफ नहीं हो पाता. यही वजह है कि कई लोग थकान के बावजूद देर तक जागते रहते हैं.

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