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Sunday, August 2, 2026
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क्या आप भी टॉयलेट में फोन लेकर जाते हैं? जानें कैसे यह छोटी आदत आपके स्वास्थ्य पर बन सकती है बड़ा खतरा 

हाई टेक्नोलॉजी की दुनिया में लोगों के लिए मोबाइल से पांच मिनट भी दूर रह पाना मुश्किल होता जा रहा है. रील देखने और सोशल मीडिया पर वक्त बिताने की लत इतनी ज्यादा लग चुकी है कि लोग टॉयलेट में भी मोबाइल अपने साथ लेकर जाते हैं और जरूरत से ज्यादा समय वहीं बिता देते हैं. क्या आप जानते हैं कि टॉयलेट में मोबाइल का इस्तेमाल आपकी सेहत को कितनी बुरी तरह प्रभावित करता है?

रिसर्च में सामने आई यह बात

टॉयलेट में मोबाइल का इस्तेमाल करने की बढ़ती आदत पर कई रिसर्च हो चुकी हैं, जिसमें ये साफ पाया गया कि ऐसा करने वाले लोगों में पाचन की परेशानी और पाइल्स की समस्या ज्यादा देखी गई है. टॉयलेट सीट पर समय से अधिक समय तक बैठे रहने से रेक्टम पर असर पड़ता है, जिसकी वजह से पाइल्स होने की आशंका बाकी लोगों की तुलना में ज्यादा बढ़ जाती है. इसके अलावा पेट पर पड़ने वाले दबाव की वजह से पाचन शक्ति पर असर पड़ता है और इससे कब्ज की समस्या बढ़ सकती है.

मांसपेशियों और हड्डियों पर भी पड़ता है असर

टॉयलेट में मोबाइल का इस्तेमाल करने की आदत से मांसपेशियों और हड्डियों पर भी असहनीय दबाव पड़ता है. मोबाइल को लगातार देखने के लिए गर्दन और कंधों पर बोझ बढ़ता है और मांसपेशियों में दर्द और जकड़न बढ़ जाती है. इससे रीढ़ की हड्डी भी प्रभावित होती है. अगर किसी को पहले से ही स्पाइनल कॉर्ड से जुड़ी परेशानी है तो उन्हें ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए.

सर्वाइकल होने का भी बढ़ता है खतरा

मोबाइल चलाने की खराब आदत की वजह से सर्वाइकल का रिस्क होने का खतरा रहता है. टॉयलेट में लंबे समय तक एक ही पोस्चर में बैठने की वजह से सिर और गर्दन के ऊपरी हिस्से पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है. कभी-कभी इससे तेज सिरदर्द और गर्दन में दर्द की परेशानी भी हो सकती है.

पेट भी नहीं हो पाता है साफ

इसके अलावा मोबाइल को टॉयलेट में ले जाने से उस पर खतरनाक बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं. जितनी बार मोबाइल को पकड़ेंगे, उतनी ही बार हाथ धोना जरूरी होगा. यही वजह है कि टॉयलेट में मोबाइल के इस्तेमाल से परहेज करना चाहिए. टॉयलेट में मोबाइल का इस्तेमाल करने से पेट पूरी तरह साफ भी नहीं होता है और मेंटल प्रेशर बढ़ता है. शरीर जब विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है, तब दिमाग का इस क्रिया में बड़ा योगदान होता है. दिमाग से सिग्नल मिलने के बाद ही शरीर के बाकी अंग अपने काम करते हैं. ऐसे में जब दिमाग मोबाइल चलाने में बिजी होगा तो विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया पूरी तरह से नहीं हो पाती है और पेट में बची गंदगी शरीर को धीरे-धीरे बीमार करने लगती है.

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