Naxalite Surrender: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। दरभा डिवीजन से जुड़े 10 माओवादी कैडरों ने शुक्रवार को हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। इनमें छह महिलाएं शामिल हैं और इन पर कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में प्लाटून कमांडर मीडियम भीमा (मिडियम भीमा) प्रमुख हैं, जिन पर अकेले 8 लाख रुपये का इनाम था।
Table of Contents
Naxalite Surrender: सरेंडर करने वालों की पहचान
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के नाम हैं: मीडियम भीमा (8 लाख इनाम), गंगा कुंजाम (5 लाख), लेकम रामा (5 लाख), ताती सोनी (5 लाख), शांति सोदी (5 लाख), मादवी नवीन (1 लाख), मादवी रुकनी (1 लाख), ओयम मंगली (1 लाख), पोडियम मांगी (1 लाख) और मादवी गंगी (1 लाख)। ये कैडर दरभा डिवीजन कमेटी और अन्य नक्सली संगठनों से जुड़े थे।
Naxalite Surrender: हथियारों की सुपुर्दगी
सरेंडर के दौरान इन कैडरों ने एक एके-47 राइफल, दो सेल्फ लोडिंग राइफल (एसएलआर), एक बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (बीजीएल) और एक स्टेन गन सौंपी। इन हथियारों पर अलग से 8 लाख रुपये का इनाम था। आत्मसमर्पण कार्यक्रम में बस्तर रेंज के आईजी पी सुंदरराज, सीआरपीएफ के डीआईजी आनंद सिंह राजपुरोहित, सुकमा एसपी किरण चव्हाण और कलेक्टर देवेश ध्रुव मौजूद रहे।
Naxalite Surrender: पुनर्वास नीति का असर
यह सरेंडर राज्य सरकार की “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” नीति के तहत हुआ। अधिकारियों ने सरेंडर करने वालों को भरोसा दिलाया कि हिंसा छोड़ने वालों को सम्मान, सुरक्षा, आजीविका और समाज में पुनर्स्थापना की गारंटी मिलेगी। सरेंडर के बाद इन कैडरों ने सुकमा के ‘वयन वाटिका’ (गोंडी भाषा में उम्मीद और भविष्य का बगीचा) में पौधे रोपे, जो मुख्यधारा में वापसी का प्रतीक माना जा रहा है।
Naxalite Surrender: सीएम विष्णु देव साय की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस घटना को नक्सलवाद मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने लिखा, “नक्सलवाद मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प अब तेजी से साकार हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सशक्त नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में बस्तर ऐतिहासिक परिवर्तन का साक्षी बन रहा है।”
सीएम ने आगे कहा, “हिंसा के मार्ग में न वर्तमान सुरक्षित है, न भविष्य। छत्तीसगढ़ सरकार की विशेष पुनर्वास नीति आत्मसमर्पण करने वालों को सम्मान, सुरक्षा, आजीविका और समाज में पुनर्स्थापना की गारंटी देती है। मुख्यधारा में लौटकर वे अपने परिवारों के साथ स्थायी, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत कर सकते हैं। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है— छत्तीसगढ़ को पूर्णतः नक्सलवाद मुक्त बनाना और बस्तर को विकास, विश्वास और अवसरों की नई पहचान देना।”
इस साल सुकमा में रिकॉर्ड सरेंडर
सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने बताया कि इस सरेंडर के साथ वर्ष 2025 में जिले में कुल 263 माओवादी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। पिछले दो वर्षों में पूरे छत्तीसगढ़ में लगभग 2400 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि यह हिंसक माओवादी विचारधारा के अंत का संकेत है। शेष माओवादियों, जैसे पॉलिटब्यूरो सदस्य देवजी और डंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य पप्पा राव, के पास अब हिंसा छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
अमित शाह का दौरा अहम
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस समय छत्तीसगढ़ के दौरे पर हैं। वे बस्तर ओलंपिक के समापन समारोह में शामिल हो रहे हैं और नक्सल विरोधी अभियानों की समीक्षा कर रहे हैं। यह दौरा हालिया सफलताओं को मजबूत करने और मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त बनाने के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह भी पढ़ें:-
1 करोड़ का इनामी रामधेर मज्जी समेत 12 नक्सलियों ने डाले हथियार, बालाघाट बना नक्सल-मुक्त
