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Friday, August 7, 2026
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Maoists: NIA ने विस्फोटक आपूर्ति मामले में दो माओवादियों पर कसा शिकंजा, दाखिल किया आरोपपत्र

Maoists: एनआईए ने छत्तीसगढ़ में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन सीपीआई (माओवादी) द्वारा विस्फोटकों की खरीद और आपूर्ति के मामले में दो आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया।

Maoists: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने छत्तीसगढ़ में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) द्वारा विस्फोटकों की खरीद और आपूर्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में दो आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया। यह कार्रवाई आतंकवाद विरोधी अभियानों के तहत एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। एनआईए ने छत्तीसगढ़ के जगदलपुर स्थित विशेष अदालत में सुकमा जिले के पटनमपारा निवासी मंतोष मंडल और सेला नागार्जुन उर्फ एस नागार्जुन को आरोपी के रूप में नामित किया है। दोनों के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

Maoists: एनआईए की जांच और आरोप पत्र

छत्तीसगढ़ पुलिस ने सितंबर 2024 में इस मामले का भंडाफोड़ करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनके पास से विस्फोटकों में इस्तेमाल होने वाली बड़ी मात्रा में सामग्री जब्त की गई थी। बरामद सामग्री में पोटेशियम नाइट्रेट के दो डिब्बे, दो किलोग्राम यूरिया पाउडर, एल्यूमीनियम पाउडर के तीन डिब्बे, एक टिफिन बम, दो डेटोनेटर, माओवादी साहित्य, एक लैपटॉप, एक मोबाइल सिम कार्ड और एक मोबाइल फोन शामिल थे। जांच में खुलासा हुआ कि यह खेप माओवादियों तक पहुंचाने की योजना थी, जिसका इस्तेमाल सुरक्षा बलों के खिलाफ आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) हमलों में किया जाना था।

एनआईए की जांच में यह भी सामने आया कि दोनों आरोपी माओवादी संगठन के लिए ऑनलाइन माध्यम से विस्फोटक और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद में सक्रिय रूप से शामिल थे। यह गतिविधियां मुख्य रूप से सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र में माओवादी कैडर को समर्थन देने के उद्देश्य से की जा रही थीं।

Maoists: गिरफ्तारी और मामला दर्ज होने की प्रक्रिया

सुकमा पुलिस ने 25 सितंबर 2024 को मंतोष मंडल और सेला नागार्जुन को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उनके खिलाफ विस्फोटकों की अवैध आपूर्ति और माओवादियों को समर्थन देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया। बाद में, 23 दिसंबर 2024 को एनआईए ने इस मामले को अपने हाथ में लिया और विस्तृत जांच शुरू की।

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे 2020 से माओवादियों की सशस्त्र शाखा पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) बटालियन नंबर 1 के लिए विस्फोटक, बारूद, रसायन, डेटोनेटर, वॉकी-टॉकी और राशन जैसी सामग्रियों की आपूर्ति कर रहे थे। उनकी गिरफ्तारी के साथ ही माओवादी आपूर्ति नेटवर्क पर एक महत्वपूर्ण चोट पहुंची है।

Maoists: एनआईए का बयान और आगे की कार्रवाई

एनआईए ने इस मामले में बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई देश में आतंकवाद विरोधी अभियानों को मजबूत करने और माओवादियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। एनआईए अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत एकत्र किए गए हैं और उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस मामले में और भी लोगों की संलिप्तता की जांच की जा रही है। संभव है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हों।

छत्तीसगढ़ में माओवादियों की गतिविधियां और सुरक्षा बलों की चुनौतियां

छत्तीसगढ़ विशेष रूप से सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जैसे जिलों में माओवादी गतिविधियों से प्रभावित रहा है। सुरक्षा बल लगातार इन इलाकों में माओवादियों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। हालांकि, माओवादी गुट अब भी जंगलों में सक्रिय हैं और आए दिन सुरक्षाबलों पर हमले की साजिशें रचते रहते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि माओवादियों तक विस्फोटकों और हथियारों की आपूर्ति रोकना, उनके नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है। इस दृष्टिकोण से एनआईए की इस कार्रवाई को एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

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